बैंक फ्रॉड केस में CBI कोर्ट का बड़ा फैसला, प्राइवेट फर्म समेत 7 दोषियों को सजा
खबर सार :-
चेन्नई की सीबीआई कोर्ट का यह फैसला बैंक धोखाधड़ी के पुराने मामले में अहम माना जा रहा है। अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक से क्रेडिट सुविधाएं लेने और करीब 2.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्राइवेट फर्म समेत सात आरोपियों को दोषी ठहराया। एक आरोपी को दो साल और पांच को छह महीने की सश्रम कारावास की सजा मिली, जबकि कुछ आरोपियों को बरी या आरोपमुक्त किया गया।
खबर विस्तार : -
CBI Court Bank Fraud: बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक पुराने मामले में चेन्नई की सीबीआई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने प्राइवेट फर्म मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स समेत सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई है। यह मामला यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ था और इसमें बैंक से करीब 2.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।
सात आरोपियों को कोर्ट ने माना दोषी
सीबीआई के मुताबिक, अदालत ने 31 अगस्त 2026 को प्राइवेट फर्म मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और उससे जुड़े छह लोगों को दोषी ठहराया। दोषियों में एस. अमरुद्दीन, एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एस. शिवकुमार और एस. रविचंद्रन बाबू शामिल हैं। अदालत ने मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, आरोपी एस. अमरुद्दीन को दो साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एस. शिवकुमार और एस. रविचंद्रन बाबू को छह-छह महीने की सश्रम कारावास की सजा दी गई। इन छह आरोपियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए ली गईं क्रेडिट सुविधाएं
मामले में आरोप था कि मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और अन्य आरोपियों ने बैंक अधिकारियों के साथ कथित तौर पर साजिश रची। आरोपियों ने बैंक से विभिन्न प्रकार की क्रेडिट सुविधाएं हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसके बाद बैंक की रकम का कथित तौर पर गबन किया गया, जिससे बैंक को करीब 2.68 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने इस मामले में 21 अप्रैल 2008 को केस दर्ज किया था। जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर शुरू की थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
2009 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 23 जून 2009 को मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद मामले की सुनवाई अदालत में लंबे समय तक चली। ट्रायल पूरा होने के बाद अदालत ने 31 अगस्त 2026 को सात आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा का ऐलान किया। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंकिंग संस्थानों के साथ धोखाधड़ी में फर्जी दस्तावेजों और गलत तरीके से हासिल की गई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत के फैसले से लंबे समय से चल रहे इस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों की कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है।
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ट्रायल के दौरान चार आरोपियों की मौत
मामले की सुनवाई के दौरान चार प्राइवेट आरोपियों की मौत हो गई। इनमें जैलानी बीवी, ए. श्रीनिवासन, एन. मनोहरण और एस. जी. शेखर शामिल थे। आरोपियों की मृत्यु के बाद उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई समाप्त कर दी गई। वहीं, कुछ अन्य आरोपियों को अदालत से राहत भी मिली। एस.आर. ज्ञानशेखर, जो यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच मैनेजर और लोक सेवक थे, तथा प्राइवेट व्यक्ति एम. चक्रवर्ती को अदालत ने बरी कर दिया। इसके अलावा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के पैनल एडवोकेट और लोक सेवक पी.बी. संपत कुमार को आरोपमुक्त कर दिया गया।
लंबे समय बाद आया फैसला
करीब 18 साल पहले दर्ज हुए इस बैंक धोखाधड़ी मामले में जांच, चार्जशीट और लंबे ट्रायल के बाद अब अदालत ने सात आरोपियों को दोषी माना है। फैसले में एक आरोपी को दो साल की सश्रम कारावास, जबकि पांच आरोपियों को छह महीने की सश्रम कारावास की सजा मिली है। प्राइवेट फर्म पर भी जुर्माना लगाया गया है। मामले में कुछ आरोपियों की मौत के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई खत्म हुई, जबकि अन्य को अदालत ने बरी या आरोपमुक्त किया।
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