राष्ट्रधर्म की यात्रा में निरंतरता जरूरी, विचारों को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने पर जोर

खबर सार :-

राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के स्थापना दिवस पर स्वांत रंजन ने राष्ट्रवादी विचारों को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया। प्रतियोगिता विजेताओं का सम्मान हुआ।
राष्ट्रधर्म की यात्रा में निरंतरता जरूरी: स्वांत रंजन

खबर विस्तार : -

लखनऊः राष्ट्रवादी विचारों की यात्रा है ‘राष्ट्रधर्म’। इस यात्रा में निरंतरता बनी रहनी चाहिए और राष्ट्रवादी विचारों को समाज के सभी वर्गों तक बार-बार पहुंचाना आवश्यक है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कही। वह राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण भूमिका

स्वांत रंजन ने कहा कि आज विचारों को भ्रमित करने का कार्य योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। ऐसे में समाज को सतर्क रहने और इस तरह के प्रयासों को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ‘राष्ट्रधर्म’ जैसी पत्रिका का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रधर्म राष्ट्रवादी विचारों के साथ एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ते हुए समाज, संस्कृति और राष्ट्रहित का कार्य कर रही है। पत्रिका ने लंबे समय से राष्ट्र और समाज से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया है। इस दौरान स्वांत रंजन ने राष्ट्रधर्म के विकास और उसकी वैचारिक यात्रा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाऊराव देवरस के योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रधर्म की स्थापना जिन उद्देश्यों को लेकर हुई थी, उन्हें वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बनाए रखने की जरूरत है। बदलते सामाजिक और वैचारिक परिवेश में पत्रिका की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रतियोगिता विजेताओं का सम्मान

कार्यक्रम में राष्ट्रधर्म के संस्थापक निदेशक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। चित्र प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सुधांशु चौहान, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले सुदीप्त सिंह और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली महक रावत को पुरस्कार प्रदान किया गया।

चित्र प्रतियोगिता में प्रोत्साहन पुरस्कार प्रियांशी मिश्रा, लक्ष्मी सिंह और गौरी शुक्ला को दिया गया। वहीं लेख प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली अंजू और शिवा श्रीवास्तव, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रियांशु चौहान और वसुन्धरा बारी तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रियांशु आर्य और अंशिका को सम्मानित किया गया। लेख प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दो-दो प्रतिभागियों को दिए गए। इसके अलावा आकांक्षा जय प्रकाश सिंह को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया।

सितंबर अंक का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रधर्म के सितंबर अंक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर पत्रिका की वैचारिक भूमिका और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर उसके योगदान को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ए.पी. तिवारी ने की। संचालन प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रधर्म से जुड़े पदाधिकारियों, लेखकों, प्रतिभागियों और अन्य लोगों की उपस्थिति रही।

यह भी पढ़ेंः-राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति का रास्ता साफ, तीन नामों का पैनल तैयार

अन्य प्रमुख खबरें