56 म्यूल बैंक खातों में देशभर की 325 साइबर शिकायतें, 403 करोड़ की मनी ट्रेल का खुलासा
खबर सार :-
झांसी में साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, 56 म्यूल बैंक खातों से जुड़ी 325 शिकायतों में 403 करोड़ की मनी ट्रेल का खुलासा। रकम USDT में बदलकर विदेशी हैंडलर तक पहुंचाने का आरोप।
खबर विस्तार : -
झांसी: ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों में घुमाकर उसे क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदलने वाले एक बड़े नेटवर्क का थाना प्रेमनगर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में अब तक 56 म्यूल बैंक खातों का पता चला है, जिनसे देशभर की 325 साइबर शिकायतों के तार जुड़े बताए जा रहे हैं। इन खातों से जुड़ी मनी ट्रेल करीब 403 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा पुलिस ने किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, पॉकेट डायरी/रजिस्टर और 500 USDT भी बरामद कर सीज किए हैं।
पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क साइबर ठगी से हासिल रकम को सीधे किसी एक खाते में रखने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसकी कड़ियां तोड़ने का काम करता था। इसके बाद रकम को कई स्तरों पर घुमाया जाता था और कथित तौर पर USDT में बदलकर विदेशी हैंडलर तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क के पीछे मौजूद अन्य लोगों और विदेशी संपर्कों की तलाश में जुटी है।
मोहिनी गार्डन के पास छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार 28 अगस्त 2026 को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर थाना प्रेमनगर पुलिस ने मोहिनी गार्डन नहर रोड, गढ़ियागांव क्षेत्र में घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक वर्मा उर्फ सत्यम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जान पाल, अभिषेक चौधरी और अर्चित श्रीवास्तव के रूप में हुई है। पूछताछ और जांच के दौरान अरमान, अर्श शेख और मो. फैज की भूमिका भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है। इन तीनों को मामले में वांछित घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान साइबर ठगी की रकम को इधर से उधर करने के पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आई। इसके बाद बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू की गई।
गेमिंग एप के जरिए रकम का लेनदेन
जांच में सामने आए नेटवर्क का तरीका भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग बना है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य ऑनलाइन गेमिंग एप के माध्यम से साइबर ठगी से हासिल रकम को उन बैंक खातों में ट्रांसफर कराते थे, जिन्हें कमीशन के बदले उपलब्ध कराया जाता था। साइबर अपराध की भाषा में ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या गिरोह की अवैध रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में पहले ऐसे लोगों की तलाश की जाती थी जो कमीशन के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने को तैयार हों। खाते में साइबर ठगी की रकम आने के बाद उसे एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता था। कुछ रकम निकालने के बाद बाकी रकम को कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था।
56 खातों से जुड़ी 325 साइबर शिकायतें
पुलिस की जांच में अब तक 56 म्यूल बैंक खातों की पहचान होने की बात सामने आई है। इन खातों से देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज 325 साइबर शिकायतें जुड़ी हुई बताई जा रही हैं। इन शिकायतों से संबंधित रकम की मनी ट्रेल करीब 403 करोड़ रुपये होने का दावा किया गया है। इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद पुलिस इस मामले को केवल स्थानीय स्तर की साइबर ठगी का मामला नहीं मान रही है। जांच एजेंसियां अब इन खातों में हुए प्रत्येक महत्वपूर्ण लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। रकम किन खातों से आई, किन खातों में भेजी गई, किस व्यक्ति ने खाता उपलब्ध कराया और रकम को आगे किस माध्यम से स्थानांतरित किया गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
कमीशन के बदले उपलब्ध कराए जाते थे बैंक खाते
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य लोगों को उनके बैंक खाते इस्तेमाल करने के बदले कमीशन देते थे। खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों के खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी। इसके बाद इस रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता या कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आगे भेजा जाता था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य रकम के मूल स्रोत और अंतिम लाभार्थी के बीच सीधा संबंध छिपाना बताया जा रहा है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 56 बैंक खातों के पीछे कितने लोग सक्रिय थे और इन खातों को उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका केवल कमीशन लेने तक सीमित थी या वे नेटवर्क के संचालन में भी शामिल थे।
सात मोबाइल फोन और डायरी से मिलेंगे अहम सुराग
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने सात टचस्क्रीन मोबाइल फोन और एक पॉकेट डायरी/रजिस्टर बरामद किया है। इसके अलावा 500 USDT भी सीज किए गए हैं। पुलिस अब मोबाइल फोन और डायरी में दर्ज जानकारी की जांच कर रही है। डिजिटल उपकरणों से बैंक खातों, संपर्क नंबरों, चैट, लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े रिकॉर्ड मिलने की संभावना है। पुलिस का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और रकम के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है।
USDT में बदलकर विदेशी हैंडलर तक रकम पहुंचाने का आरोप
जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साइबर ठगी की रकम को USDT यानी Tether में बदलने की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार ठगी से प्राप्त रकम को बैंकिंग चैनल में अलग-अलग खातों से घुमाने के बाद क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। आरोप है कि इसके बाद USDT को आगे विदेशी हैंडलर तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम किन क्रिप्टो वॉलेट, एक्सचेंज या अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए भेजी गई और इस नेटवर्क के विदेशी संपर्क कहां सक्रिय हैं। 403 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल सामने आने के बाद डिजिटल लेनदेन की जांच इस मामले की सबसे अहम कड़ी बन गई है।
नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा
इस मामले में थाना प्रेमनगर में मु0अ0सं0 397/2026 के तहत कुल नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 112(2), 318(4) और 317(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की है। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों को नियमानुसार न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार झांसी भेज दिया गया। मामले में वांछित तीन आरोपियों की तलाश जारी है।
अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े होने की जांच
पुलिस टीम अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। 56 म्यूल खातों और 325 साइबर शिकायतों का सामने आना इस नेटवर्क के व्यापक स्तर की ओर इशारा करता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि देश के दूसरे राज्यों में इस नेटवर्क से जुड़े कितने बैंक खाते सक्रिय हैं और साइबर ठगी की रकम किन-किन राज्यों से होकर झांसी तक पहुंची। इसके साथ ही विदेशी हैंडलरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नेटवर्क का संचालन कहां से किया जाता था, आरोपियों को निर्देश कौन देता था और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम आखिर किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
पुलिस टीम की कार्रवाई
पूरी कार्रवाई थाना प्रेमनगर के प्रभारी निरीक्षक तुलसीराम पाण्डेय के निर्देशन में उपनिरीक्षक रविकान्त शुक्ला और पुलिस टीम ने की। टीम में हेड कांस्टेबल बलबीर सिंह, हेड कांस्टेबल बृजेश कुमार, हेड कांस्टेबल राघवेन्द्र, कांस्टेबल नवनीत सिंह, ज्ञान प्रकाश, नितेश सागर, आशीष द्विवेदी और दीपू शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ बैंक खातों, साइबर शिकायतों और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की कड़ियों से इस कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
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