अंकित शर्मा हत्याकांड: उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचा ताहिर हुसैन, अगले हफ्ते होगी सुनवाई
खबर सार :-
दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए ताहिर हुसैन ने कड़कड़डूमा कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। जानें इस हत्याकांड से जुड़ी पूरी जानकारी।
खबर विस्तार : -
New delhi : राजधानी दिल्ली में साल 2020 में हुए भीषण दंगों के दौरान आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस बहुचर्चित मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। मामले के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ अब दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ताहिर हुसैन की इस नई याचिका पर हाई कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई होने की उम्मीद है।
हाई कोर्ट पहुंचा उम्रकैद का मामला
निचली अदालत यानी कड़कड़डूमा कोर्ट ने इसी साल 31 जुलाई को अंकित शर्मा हत्याकांड (Ankit Sharma murder case) में अपना बड़ा फैसला सुनाया था। इस फैसले में ताहिर हुसैन को दोषी मानते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा मुकर्रर की गई थी। अब इसी फैसले से बचने के लिए ताहिर हुसैन ने अपने वकीलों के जरिए दिल्ली उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में इस फैसले को चुनौती दी है। अदालत अब इस बात की जांच करेगी कि निचली अदालत का फैसला किन सबूतों और गवाहों के आधार पर दिया गया था। ताहिर की याचिका पर अगले हफ्ते होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला: 5 को सजा, 6 हुए बरी
इससे पहले, कड़कड़डूमा कोर्ट ने मामले की लंबी सुनवाई करते हुए 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत कुल पांच लोगों को इस हत्याकांड में दोषी करार दिया था। जिन पांच लोगों को अदालत ने दोषी माना था, उनमें ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, अनस और जावेद के नाम शामिल हैं। बाद में 31 जुलाई को इन सभी पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
हालांकि, इसी मामले में सबूतों के अभाव के चलते छह अन्य आरोपितों को अदालत ने बरी भी कर दिया था। अदालत से बरी होने वालों में हसीन (उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान), मीर खान, फिरोज, गुल्फाम, शोएब आलम (उर्फ बॉबी) और मुंतजिम (उर्फ मुसा) शामिल थे। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि इन छह लोगों के खिलाफ पुलिस पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई थी।
पुलिस की फांसी की मांग और कोर्ट का इनकार
इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से बेहद सख्त सजा की मांग की थी। पुलिस के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि जिस बेरहमी से अंकित शर्मा की हत्या की गई है, उसे देखते हुए सभी दोषियों को फांसी की सजा (मृत्युदंड) दी जानी चाहिए। लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने पुलिस की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने फांसी की सजा न देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और इसके पीछे तर्क दिया कि दोषियों के अंदर अभी भी 'सुधार की गुंजाइश' बाकी है, इसलिए उन्हें मौत की सजा देना उचित नहीं होगा।
खौफनाक थी वह रात: 51 वार और नाले में फेंका शव
इस पूरे हत्याकांड की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने की थी और 3 जून 2020 को अदालत में अपनी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी। इस चार्जशीट में कई रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हुए थे। पुलिस के मुताबिक, 24 और 25 फरवरी 2020 को ताहिर हुसैन ने खजूरी खास इलाके में स्थित अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास बनी मस्जिद से एक हिंसक भीड़ का नेतृत्व किया था।
चार्जशीट में साफ तौर पर बताया गया कि ताहिर ने ही भीड़ को उकसाया और पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग दे दिया। पुलिस ने ताहिर हुसैन को इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड (मुख्य साजिशकर्ता) बताया है। आरोप है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को ताहिर के घर के बाहर भीड़ द्वारा खास तौर पर निशाना बनाया गया।
अंकित शर्मा को चाकुओं से बुरी तरह गोदा गया। जब उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर पर तेज धार वाले हथियारों से 51 बार वार किए गए थे। हत्या के बाद सबूत मिटाने के इरादे से भीड़ ने अंकित शर्मा के शव को पास के ही एक गंदे नाले में फेंक दिया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि कुछ लोगों ने उन्हें शव को नाले में फेंकते हुए देखा था। इस पूरी घटना के बाद, अंकित शर्मा के पिता ने पुलिस को अपना बयान दिया था और उसी बयान के आधार पर ताहिर हुसैन के खिलाफ हत्या और दंगा भड़काने का केस दर्ज किया गया था।
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