दिल्ली दंगा: रो पड़ा पूर्व पार्षद, अंकित की हत्या हिंसा के दौरान हुई थी
खबर सार :-
वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली। वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे, जिनमें से छह आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया। ताहिर हुसैन के साथ नाजिम, जावेद, कासिम और अनस को भी दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों पर आईपीसी की धारा 302, 365, 188, 153ए, 147, 148 और 149 के तहत दोषी करार दिया, हालांकि आपराधिक साजिश (120बी) के आरोप से बरी किया। सजा पर बहस की तारीख अभी कोर्ट ने तय नहीं की है।
आईबी अधिकारी का शव चांद बाग के नाले से बरामद किया था
मंगलवार को लिखित आदेश आने के बाद कोर्ट सजा पर जिरह की तारीख तय करेगी। फैसला सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में ताहिर हुसैन रोने लगा। अदालत के फैसले के बाद अब दोषियों की सजा की अवधि पर आगे सुनवाई होगी। इस मामले में कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और पेश किए गए साक्ष्यों पर विचार करने के बाद यह निर्णय सुनाया। अंकित शर्मा की हत्या फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान हुई थी। उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद किया गया था। इस घटना के बाद अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दयालपुर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था।
पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था
दिल्ली पुलिस की जांच में पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। इनमें हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा, हत्या के प्रयास, सबूत मिटाने और अन्य गंभीर धाराएं शामिल थीं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान हिंसा की साजिश और घटनाओं को अंजाम देने में आरोपियों की भूमिका रही। अदालत में इस मामले की सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। अभियोजन पक्ष ने गवाहों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अपनी दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज किया। कड़कड़डूमा कोर्ट के इस फैसले को वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े प्रमुख मामलों में से एक माना जा रहा है। अब अदालत दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा पर सुनवाई करेगी, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
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