बेटी की हत्या कर दूसरों को फंसाने वाले पिता को उम्रकैद
खबर सार :-
कुठौंद थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय मासूम बेटी की हत्या कर गांव के दो लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने वाले पिता को अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
खबर विस्तार : -
उरई, कुठौंद थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय मासूम बेटी की हत्या कर गांव के दो लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने वाले पिता को अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। करीब सात साल तक चली सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव सिंह ने आरोपी पिता को दोषी करार देते हुए उम्रकैद के साथ 17 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
मामला कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम बिजवाहा का है। गांव निवासी लाखन सिंह ने 9 जून 2019 को पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसकी आठ वर्षीय पुत्री संगीता 8 जून की शाम करीब चार बजे खेलने के लिए घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन सुबह गांव के ही मातादीन के खेत में झाड़ियों के बीच बालिका का शव बरामद हुआ।
पुरानी रंजिश के चलते बेटी की हत्या का आरोप लगाया था
लाखन सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में गांव के मोतीलाल और जाहर सिंह उर्फ बललवान पर पुरानी रंजिश के चलते बेटी की गला दबाकर हत्या करने और शव छिपाने का आरोप लगाया था। इस आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब गांव के ही आल्हा सिंह ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन उसने लाखन सिंह को अपनी बेटी संगीता के साथ चबूतरे पर मारपीट करते देखा था। उसने लाखन को बच्ची को न पीटने की सलाह दी थी, जिसके बाद वह बेटी को लेकर घर के अंदर चला गया था। इस महत्वपूर्ण बयान के बाद पुलिस ने लाखन सिंह से सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि गुस्से में उसने अपनी बेटी का गला दबाकर हत्या कर दी थी।
आजीवन कारावास तथा 17 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई
बाद में खुद पर शक न जाए, इसलिए गांव के दो लोगों को फंसाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ झूठी नामजद तहरीर देकर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपी की निशानदेही और स्वीकारोक्ति के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना पूरी होने के बाद 29 अगस्त 2019 को पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले की नियमित सुनवाई चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव सिंह ने सोमवार को आरोपी पिता लाखन सिंह को अपनी ही मासूम बेटी की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने दोषसिद्धि के बाद आरोपी को आजीवन कारावास तथा 17 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ करीब सात साल पुराने बहुचर्चित हत्याकांड का न्यायिक पटाक्षेप हो गया।
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