मूक-बधिर मासूम से दरिंदगी करने वाले 3 सगे दरिंदों को आखिरी सांस तक जेल
खबर सार :-
मध्य प्रदेश के अशोकनगर में विशेष अदालत ने मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम एक 10 वर्षीय मूक-बधिर मासूम बालिका के साथ हैवानियत करने वाले तीन सगे दरिंदों को शेष प्राकृतिक जीवनकाल (आखिरी सांस) तक के लिए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
खबर विस्तार : -
अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर में विशेष अदालत ने मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम एक 10 वर्षीय मूक-बधिर मासूम बालिका के साथ हैवानियत करने वाले तीन सगे दरिंदों को शेष प्राकृतिक जीवनकाल (आखिरी सांस) तक के लिए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। हरे रंग की बाइक पर किया था मासूम का अपहरण:सोमवार को अदालत से मिली जापनकारी अनुसार घटना 26 सितंबर 2025 की है। नईसराय थाने के अंतर्गत आने वाले एक ग्राम में रहने वाली 10 वर्षीय मूक-बधिर बालिका दोपहर में अपने भाई के घर खेल रही थी। तभी गांव किररदा के तीन आरोपी—भगवत कुशवाहा, अजय उर्फ संजू कुशवाहा और जगदीश उर्फ चऊआ कुशवाहा—उसे बहला-फुसलाकर हरे रंग की डीलक्स मोटरसाइकिल पर जबरन बैठाकर ले गए। आरोपियों गांव के बीच मक्के के खेत में ले जाकर इस मासूम के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया और उसे लहूलुहान व बिना कपड़ों के वहीं छोडक़र भाग निकले।
इशारों और गवाहों की मुस्तैदी से खुला राज
:बताया गया कि खेत में रोती हुई हालत में मासूम को ग्रामीण सिरनाम पाल और भगवत परिहार ने देखा। उन्होंने तुरंत उसे सुरक्षित घर पहुंचाया और माता-पिता को जानकारी दी। चूंकि पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी और उसकी मां भी मानसिक रूप से दिव्यांग हैं, इसलिए पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी के हाव-भाव और इशारों की भाषा को समझकर तुरंत 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी और नईसराय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस और अभियोजन ने तेजी से साक्ष्य जुटाए
रिपोर्ट ने नहीं छोड़ा बचने का कोई रास्ता:इस संवेदनशील मामले में पुलिस और अभियोजन ने तेजी से साक्ष्य जुटाए। मामले में सबसे अचूक और वैज्ञानिक सबूत डीएनए सैंपल की कार्रवाई रही। जब डीएनए रिपोर्ट आई, तो उसमें यह पूरी तरह प्रमाणित हो गया कि मासूम के साथ दरिंदगी इन्हीं तीनों आरोपियों ने की थी। इस वैज्ञानिक साक्ष्य के सामने आरोपियों के सारे बहाने धरे के धरे रह गए। अंतिम सांस तक जेल में कटेंगे दिन:विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) ने अभियोजन के अकाट्य साक्ष्यों और तर्कों से पूरी तरह सहमत होते हुए तीनों आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास (जिसका अभिप्राय व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए कारावास होगा) तथा कुल बीस बीस रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
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