हिमाचल प्रदेश में तीन साल में कम दाखिले वाले 885 सरकारी स्कूलों पर लगा ताला, 641 विद्यालयों का विलय

खबर सार :-

हिमाचल सरकार ने तीन सालों में कम विद्यार्थियों वाले 885 सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया है। इनमें सबसे ज्यादा 271 स्कूल शिमला जिले में हैं। वहीं, 641 विद्यालयों का विलय कर दिया है।
हिमाचल में 1,526 स्कूलों पर बड़ा फैसला, 885 विद्यालय बंद, 641 का विलय

खबर विस्तार : -

शिमला: हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन सालों में कम दाखिले वाले 885 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 271 स्कूल शिमला जिले में हैं। विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 अगस्त 2026 तक शून्य या बहुत कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया था। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बंद किए गए 885 स्कूलों में 661 प्राइमरी, 191 मिडिल, 19 हाई और 14 सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में या तो कोई छात्र नहीं था या बहुत कम छात्र थे। जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो शिमला के बाद मंडी में 161 और कांगड़ा में 127 स्कूल बंद किए गए। चंबा और लाहौल-स्पीति में 53-53, किन्नौर में 43, कुल्लू में 42 और सिरमौर में 39 स्कूल बंद किए गए। इसके अलावा, सोलन और हमीरपुर में 29-29, बिलासपुर में 25 और ऊना में 13 स्कूल बंद किए गए।

संसाधनों का नहीं हो रहा था पूरा इस्तेमाल

सरकार के अनुसार, स्कूल बंद करने का फैसला लेते समय न केवल कम दाखिले को बल्कि आस-पास दूसरे स्कूलों की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा गया। सरकार का तर्क है कि बहुत कम छात्रों वाले स्कूलों में शिक्षक, इमारतें और अन्य सुविधाओं जैसे संसाधनों का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था।

मानदंडों के अनुसार किया विलय

इसके अलावा, 641 स्कूलों को या तो आस-पास के स्कूलों में मिला दिया गया या उनका दर्जा घटा दिया गया। इन स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या पांच या उससे कम थी और आस-पास कोई दूसरा स्कूल मौजूद था। विलय के लिए मानदंड इस आधार पर तय किए गए थे कि प्राइमरी स्कूलों के लिए दो किलोमीटर, मिडिल स्कूलों के लिए तीन किलोमीटर, हाई स्कूलों के लिए पांच किलोमीटर और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए दस किलोमीटर के दायरे में कोई दूसरा स्कूल उपलब्ध हो।

इन जिलों के 641 स्कूलों का हुआ विलय

विलय या दर्जा घटाने की प्रक्रिया में शामिल 641 स्कूलों में कांगड़ा में 151, शिमला में 126 और मंडी में 115 स्कूल शामिल हैं। इस प्रक्रिया में शामिल स्कूलों की संख्या इस प्रकार है: बिलासपुर में 51, सिरमौर में 38, हमीरपुर में 34, चंबा में 33, सोलन में 28, ऊना में 20, किन्नौर में 19, कुल्लू में 18 और लाहौल-स्पीति में 8 स्कूल। सरकार का कहना है कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने या उन्हें पास के स्कूलों में मिलाने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और छात्रों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं मिलेंगी। इस प्रक्रिया के तहत कुल 1,526 सरकारी स्कूल आए हैं, जिनमें तीन साल की अवधि में 885 स्कूलों को बंद करना और 641 स्कूलों का विलय या डाउनग्रेडिंग करना शामिल है।

हिमाचल के हक की लड़ाई पर सत्ता-विपक्ष एकजुट

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष, पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े राज्य के अधिकारों के मुद्दे पर एकजुट दिखे। सदन ने विपक्ष द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल अपने जल संसाधनों पर अपने अधिकारों का दावा करने से पीछे नहीं हटेगा और राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने जोर-शोर से उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल किशाऊ परियोजना के लिए अपनी शर्तें मनवाने में सफल रहा है, और अब भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में राज्य के अधिकारों के लिए लड़ाई अगला बड़ा मुद्दा है।

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