40 दिन बाद आया इंसाफ, फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम को पटक-पटक कर मारने वाले को फांसी की सजा

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से 30 मई को एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसने हर किसी के रुह कंपा दी थी। एक डेढ़ साल के मासूम को सड़क पर पटक-पटक कर मार डाला गया था। 40 दिन बाद कोर्ट ने आरोपी दरिंदे को फांसी की सजा सुनाई है।
40 दिन बाद आया इंसाफ, फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम को पटक-पटक कर मारने वाले को फांसी की सजा

खबर विस्तार : -

Aarav Murder Case: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से मई में एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसने हर किसी को विचलित कर  दिया था। डेढ़ साल के मासूम को सड़क पर पटक कर मार डाला गया था। इस घटना के सामने आने पर हर तरफ लोगों में गुस्सा था। जिसके बाद महज 6 दिन में चार्जशीट दाखिल हुई और 13 गवाहों के बयान के आधार पर 40 दिन के भीतर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। बच्चे को बेरहमी से मारने वाले दरिंदे को फांसी की सजा मिली है। 

फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम को पीट-पीटकर मारने वाले आरोपी मिली सजा

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में 30 मई की दोपहर को यादव कॉलोनी से रुह कंपा देने वाली घटना हुई थी। बदायूं का रहने वाला विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पीट-पीट कर मार डाला। उस मासूम का कसूर बस इतना था कि वह उस महिला का बेटा था, जिससे आरोपी शादी करना चाहता था। परिवार वालों ने बताया कि आरोपी विराज मासूम की मां रति से शादी करना चाहता था, लेकिन महिला ने साफ इंकार कर दिया। विराज रति को एकतरफा पसंद करता था और मना करने पर उसने बदला लेने की ठानी। मौका पाकर वह बच्चे को बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया और सड़क पर निर्दयता से पीट-पीट कर मार डाला। इस हत्या ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। जब  इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया तो हर स्तब्ध रह गया। हर कोई यही सोच रहा था कि एक मासूम के साथ इस तरह की वारदात कोई  कैसे कर सकता है। 

घटना के बाद महज 6 दिन में दाखिल हुई चार्जशीट

इस वारदात के सामने आने के बाद वारदात को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मामले की जांच करनी शुरु कर दी। मौके से साक्ष्य जुटाए गए और आरोपी की तलाश शुरु कर दी। अक्सर इस तरह के केस में चार्जशीट तैयार होने में कई महीने लग जाते हैं, लेकिन पुलिस की ने सबूत मजबूत किए और केस जल्द ही अदालत तक पहुंच गया। इस वारदात के महज 6 दिनों के अंदर ही पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। जिसके बाद जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई शुरु हुई। अभियोजन पक्ष की तरफ से 13 गवाह पेश किए गए, जिनके गवाह, जांच के दौरान जुटाए साक्ष्य और बाकी दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। 

दरिंदे को 40 दिन बाद मिली फांसी की सजा

कोर्ट में लगातार सुनवाई के दौरान आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत ने शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी। 40 दिन बाद 9 जुलाई को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायालय ने जितेंद्र पाठक को दोषी करार देते हुए, फांसी की सजा दी। अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी के मुताबिक आरोपी ने सजा सुनने के बाद खुद को थप्पड़ मारना शुरु कर दिया। आरोपी को फांसी की सजा मिलने के बाद मासूम की मां रति ने पुलिस, प्रशासन, अभियोजन और अदालत को धन्यवाद दिया। उन्होंने 13 गवाहों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने सच्ची गवाही देकर उनके बच्चे को न्याय दिलाया। रति ने कहा कि जिस तरह उनके केस में कोर्ट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैसला सुनाया उसी तरह दूसरे गंभीर मामलों में भी सुनवाई होनी चाहिए। 

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