भोपाल में टैक्सी हड़तालः रेलवे स्टेशन-एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा परेशान हुए लोग, दो गुना किराया वसूल रहे ऑटो चालक
खबर सार :-
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों ने तीन दिन हड़ताल का ऐलान किया है। ऑनलाइन कैब सर्विस बंद होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
खबर विस्तार : -
भोपाल: एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ टैक्सी ड्राइवर यूनियन की हड़ताल की वजह से सोमवार आधी रात से राजधानी भोपाल में ओला और उबर समेत सभी कैब सर्विस बंद हैं। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर भोपाल रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर दिखा, जहां यात्रियों को ऑनलाइन कैब ढूंढने में बहुत मुश्किल हुई और ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों से बहुत ज्यादा किराया वसूला गया, जो आम रेट से 1.5 से 2 गुना ज्यादा था।
एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ टैक्सी ड्राइवर यूनियन की हड़ताल की वजह से सोमवार आधी रात से भोपाल में ओला और उबर जैसी ऑनलाइन कैब सर्विस पूरी तरह से बंद हैं। इसका सीधा असर मंगलवार सुबह रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड पर दिखा। बाहर से आने वाले यात्रियों ने घंटों ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की, लेकिन कोई गाड़ी नहीं मिली। RTO जितेंद्र शर्मा ने कहा कि कैब एसोसिएशन को दोपहर में बातचीत के लिए बुलाया गया है और अगर ओवरचार्जिंग की शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
टैक्सी ड्राइवरों की ये हैं मुख्य मांगें
1. किराया तय करना: सरकार को ₹22–₹30 प्रति किलोमीटर, ₹1–₹2 प्रति मिनट का टाइम चार्ज और एक बेस किराया तय करना चाहिए। एग्रीगेटर कंपनियां बढ़ते फ्यूल और मेंटेनेंस खर्च के बावजूद मनमाने ढंग से कम किराए पर गाड़ियां चला रही हैं।
2. गैर-कानूनी गाड़ियों पर बैन: एग्रीगेटर कंपनियों के जरिए चलने वाली नॉन-कमर्शियल गाड़ियों (प्राइवेट-रजिस्टर्ड कार, बाइक और ई-रिक्शा) के कमर्शियल इस्तेमाल पर तुरंत बैन लगना चाहिए।
बोर्ड ऑफिस चौराहे पर दिया धरना
मंगलवार को संयुक्त मोर्चे ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना दिया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन बंद किया जाएगा। यूनियन ने कहा कि उन्होंने पहले जून में तीन दिन के लिए एयरपोर्ट राइड का बॉयकॉट किया था, लेकिन कंपनियों ने बाद में फिर से रेट कम कर दिए। जनता को हुई परेशानी के लिए अफसोस जताते हुए, ड्राइवरों ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगों का कोई पक्का हल नहीं निकला, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगा।
3 दिन हड़ताल का ऐलान, शांतिपूर्ण रहेगा धरना
संगठन का कहना है कि ड्राइवर अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए विरोध करने पर मजबूर हैं। जॉइंट फ्रंट ने यह भी साफ किया है कि हड़ताल और धरना शांतिपूर्ण रहेगा, और संगठन असामाजिक तत्वों की किसी भी गैर-कानूनी हरकत के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। टैक्सी ड्राइवरों ने 18 अगस्त से 20 अगस्त तक तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में, भोपाल टैक्सी ड्राइवर्स एसोसिएशन और टैक्सी यूनियन वेलफेयर कमेटी के संयुक्त मोर्चे ने 18 अगस्त से हड़ताल का ऐलान किया है। फ्रंट के मुताबिक, शहर में लगभग 3,500 टैक्सियां चलती हैं। हड़ताल की वजह से मंगलवार से टैक्सी सर्विस में रुकावट आने की संभावना है।
19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर देंगे धरना
जॉइंट फ्रंट का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी, लगातार बढ़ते ऑपरेटिंग खर्च और प्रशासन द्वारा उनकी मांगों पर कार्रवाई न करने की वजह से टैक्सी ड्राइवर पैसे की तंगी का सामना कर रहे हैं। अपनी मांगों के समर्थन में, फ्रंट 19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना देगा। इसके बाद, मुख्यमंत्री और ट्रांसपोर्ट मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन ने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने का वादा किया है।
सरकार को टैक्सी का किराया तय करना चाहिए
भोपाल टैक्सी ड्राइवर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राजेश कुमार नागले ने कहा कि उनकी मुख्य मांग है कि सरकार टैक्सी का किराया तय करे। उन्होंने बताया कि मौजूदा किराए से फ्यूल का खर्च, गाड़ी का मेंटेनेंस, इंश्योरेंस, लोन की किश्तें और परिवार के खर्चे निकालना मुश्किल हो रहा है। नागले के अनुसार, किराए में सिर्फ 20 या 30 परसेंट की बढ़ोतरी से कोई पक्का समाधान नहीं होगा; उन्होंने किराया तय करने के सिस्टम में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत पर ज़ोर दिया।
बेसिक किराया और टाइम चार्ज शामिल करना
टैक्सी ड्राइवरों की एसोसिएशन का कहना है कि 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों ने जो किराया स्ट्रक्चर इस्तेमाल किया था, उसमें बेस किराया, टाइम चार्ज और प्रति किलोमीटर रेट शामिल थे। अभी, पेमेंट ज्यादातर तय दूरी के आधार पर होता है। ड्राइवरों का कहना है कि इससे ट्रैफिक में देरी, इंतजार के समय और गाड़ी चलाने के असल खर्च की भरपाई नहीं हो पाती है। यूनियन ने एक ऐसा किराया स्ट्रक्चर फिर से शुरू करने की मांग की है जिसमें बेस किराया, टाइम-बेस्ड चार्ज और प्रति किलोमीटर रेट शामिल हो, जिसमें ड्राइवरों के खर्च शामिल हों।
प्राइवेट रजिस्ट्रेशन नंबर वाली गाड़ियों पर रोक की मांग
टैक्सी ड्राइवरों की यूनियन ने नॉन-कमर्शियल गाड़ियों—खासकर प्राइवेट रजिस्ट्रेशन नंबर वाली कारों और बाइकों, और साथ ही ई-रिक्शा के कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसी गाड़ियों के चलने से उन ड्राइवरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है जिनके पास वैलिड टैक्सी परमिट हैं और जो ऑपरेशन से जुड़े दूसरे ज़रूरी खर्च उठाते हैं।
मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल
जॉइंट फ्रंट ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार और एग्रीगेटर कंपनियां उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं देती हैं, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है। फ्रंट का कहना है कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक कि किराया सही तय नहीं किया जाता और एग्रीगेटर कंपनियों के कथित मनमाने तौर-तरीकों पर रोक नहीं लगाई जाती।
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