महाराष्ट्र में फिर गरमाई सियासत, UBT ने 6 बागी सांसदों को भेजा कानूनी नोटिस, एकनाथ शिंदे बोले- नोटिस कूड़ेदान में फेंक दिया

खबर सार :-

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। शिवसेना और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सियासी टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। उद्धव ठाकरे की पार्टी से 6 बागी सांसद एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल हो चुके हैं, जिसके बाद यूबीटी ने कानूनी नोटिस भेजा है।
महाराष्ट्र में फिर गरमाई सियासत, UBT ने 6 बागी सांसदों को भेजा कानूनी नोटिस, एकनाथ शिंदे बोले- नोटिस कूड़ेदान में फेंक दिया

खबर विस्तार : -

Shiv Sena Ubt News: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर टकराव देखने को मिल रहा है। बता दें कि शिवसेना ने सभी 6 बागी सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है। यूबीटी और एकनाथ शिंदे की सियासी घमासान एक बार फिर से तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे ने पार्टी से बगावत कर एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हुए छह लोकसभा सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है। उनका कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना ही संसदीय दल का विलय कानूनी तौर पर मान्य नहीं है। वहीं एकनाथ शिंदे ने इस पर ऐतराज जताते हुए नोटिस को खारिज कर कूड़ेदान में फेंकने की बात कही।  

नोटिस का  कोई कानूनी महत्व नहीं- एकनाथ शिंदे

उद्धव बालासाहेब ठाकरे की पार्टी शिवसेना ने बागी सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल हुए अपने छह सांसदों को कानूनी नोटिस भेजा है। उनका कहना है कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना संसदीय दल का विलय कानूनी रुप से संभव नही है। इस पर ऐतराज जताते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नोटिस को खारिज करते हुए कहा कि सांसदों ने इसे कूडे़दान में फेंक दिया और कहा कि इसका कोई कानूनी महत्व नहीं है। शिवसेना के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को 6 बागी सांसदों को नोटिस भेजा और कहा कि साल 2024 का लोकसभा चुनाव उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में और शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर लड़कर जीता था। उनका कहना है कि सांसदों ने शिंदे गुट के उम्मीदवारों के खिलाफ जीत हासिल की थी। उन्होंने आगे कहा कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना ही संसदीय दल का विलय कानूनी तौर पर मान्य नहीं है।

सांसद खुद को शिंदे गुट में विलय होने का दावा कर रहे हैं- अरविंद सावंत 

अरविंद सावंत ने आगे कहा कि सूत्रों से जानकारी मिली है कि ये सांसद खुद को शिंदे गुट में विलय होने का दावा कर रहे हैं और लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला से इस पर विलय को मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के चौथे खंड से जोड़कर इसे अमान्य बताया। उनका कहना है कि पार्टी पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर निवेदन कर चुकी है कि शिवसेना के टिकट पर चुने गए सांसदों के किसी भी अलग समूह को मान्यता नहीं दी जाए। सावंत ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने इससे जुड़ा कोई फैसला नहीं दिया है। इस नोटिस पर प्रक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिल चुके हैं और जरुरी दस्तावेज और कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी कर चुके हैं। 

हमारे सांसदों ने वह चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी- एकनाथ शिंदे

एकनाथ शिंदे ने कहा, हमारे सांसदों ने वह चिट्ठी कूड़ेदान में फेंक दी। ऐसी चिट्ठियों पर कौन ध्यान देता है, सदन में दो-तिहाई बहुमत मायने रखता है। यह उद्धव ठाकरे गुट की हताशा है और इस नोटिस का हमारे सांसदों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि बागी सांसदों ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हिंगोली सांसद नागेश अष्टीकर ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि वह इसका जवाब नहीं देंगे। वहीं, शिवसेना के अनुसार छहों सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिन्होंने उनके क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण योजनाओं के लिए केंद्र से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

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