राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सपा का भाजपा पर हमला, पवन पांडेय बोले- पोस्टर लगाकर भटका रही सरकार
खबर सार :-
अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाते हुए विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए SP नेता पवन पांडे ने BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
खबर विस्तार : -
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत लगातार गर्म बनी हुई है। समाजवादी पार्टी (सपा) इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को लगातार घेर रही है। इसी बीच अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। इस मामले पर सपा नेता पवन पांडेय ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पोस्टरबाजी के जरिए जनता का ध्यान मूल मुद्दों से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
पोस्टर लगाकर ध्यान भटका रही बीजेपीः पवन पांडेय
पवन पांडेय ने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली को दर्शाता है। उनका आरोप है कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद ने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की छवि को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में भाजपा जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्षी नेताओं को निशाना बनाकर राजनीतिक माहौल बदलने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और अन्य समाजवादी नेताओं के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों का उद्देश्य केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण करना है। उनके अनुसार, पोस्टर लगाने से वास्तविक मुद्दे दबने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले की चर्चा अब आम लोगों के बीच पहुंच चुकी है और श्रद्धालु भी इस पूरे प्रकरण पर सवाल उठा रहे हैं।
सपा नेता ने कहा कि भाजपा सरकार को पोस्टरबाजी कराने के बजाय इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
पोस्टर लगाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर पवन पांडेय ने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मामले को कानूनी रूप से उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और जिन लोगों ने विवादित पोस्टर लगाकर नेताओं की छवि खराब करने का प्रयास किया है, उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रस्तावित दौरे पर भी पवन पांडेय ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य देशभर में गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने, गौ संरक्षण और गौ सम्मान के मुद्दे को लेकर जनजागरण अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी भी गौ संरक्षण और गौ सम्मान के पक्ष में है तथा इस विषय को राजनीतिक विवाद से अलग रखकर देखा जाना चाहिए।
निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की मांग
पवन पांडेय ने भाजपा पर आरोप लगाया कि एक ओर वह गाय के नाम पर राजनीति करती है, जबकि दूसरी ओर ऐसे लोगों से चंदा लेने के आरोप लगते रहे हैं जिनका संबंध पशु वध के कारोबार से बताया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है और जनता अब इन बातों को समझने लगी है। उनके अनुसार, सरकार को धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक को लेकर पूछे गए प्रश्न पर सपा नेता ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग कथित दान चोरी प्रकरण में निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका आरोप है कि जिन लोगों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कथित अनियमितताओं को संरक्षण दिया, उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया दान केवल आर्थिक नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का प्रतीक होता है। ऐसे में यदि उस विश्वास के साथ किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
उल्लेखनीय है कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज बनी हुई है। एक ओर समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं दूसरी ओर अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में लगे विवादित पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। फिलहाल इस पूरे मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और अब सबकी निगाहें संभावित कानूनी कार्रवाई तथा संबंधित पक्षों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
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