मतदाता सूची संशोधन का नया कैलेंडर जारी: आंध्र प्रदेश-हरियाणा में 3 अक्टूबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
खबर सार :-
निर्वाचन आयोग द्वारा आंध्र प्रदेश और हरियाणा के लिए जारी संशोधित एसआईआर कार्यक्रम मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम है। घर-घर सत्यापन, समयबद्ध दावा-आपत्ति प्रक्रिया और 3 अक्टूबर को अंतिम सूची के प्रकाशन से पात्र मतदाताओं को बेहतर अवसर मिलेगा। साथ ही नए दस्तावेजी नियम मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने में सहायक होंगे।
खबर विस्तार : -
ECI SIR Schedule 2026: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आंध्र प्रदेश और हरियाणा में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- SIR) कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए संशोधित शेड्यूल जारी किया है। आयोग के नए कार्यक्रम के अनुसार दोनों राज्यों में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अब 3 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना बताया गया है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार दोनों राज्यों के लिए 1 जुलाई को ही क्वालिफाइंग डेट माना जाएगा। वहीं संशोधित कार्यक्रम के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन 31 जुलाई को किया जाएगा। इसके बाद मतदाता अपने नाम, पते या अन्य विवरणों में सुधार कराने के लिए निर्धारित अवधि के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।
मतदान केंद्रों का पुनर्गठन और पुनर्व्यवस्था
भारत निर्वाचन आयोग के अंडर सेक्रेटरी संदीप कुमार ने आंध्र प्रदेश और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को भेजे पत्र में विस्तृत कार्यक्रम साझा किया है। पत्र के अनुसार 1 जून से 24 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस दौरान प्रत्येक पात्र मतदाता का सत्यापन किया जाएगा और नए मतदाताओं की जानकारी भी एकत्र की जाएगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 24 जुलाई तक सभी मतदान केंद्रों के पुनर्गठन और पुनर्व्यवस्था का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसका उद्देश्य मतदान केंद्रों की संख्या, स्थान और मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। निर्वाचन आयोग का मानना है कि व्यवस्थित मतदान केंद्र चुनाव प्रक्रिया को अधिक सुचारु बनाएंगे।
वोटर लिस्टः दावे और आपत्तियों की समय सीमा तय
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 31 जुलाई से 30 अगस्त तक मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। इस दौरान यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है, किसी का नाम गलत दर्ज है या किसी अन्य प्रकार की त्रुटि है, तो संबंधित व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकेगा। इसके अलावा किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में होने पर भी आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी। निर्वाचन आयोग ने बताया कि 31 जुलाई से 28 सितंबर के बीच सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच, नोटिस जारी करने और सुनवाई जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। सभी आपत्तियों और दावों के समाधान के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी, जिसे 3 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा।
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और सत्यापन के नए निर्देश
ईसीआई ने दोनों राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संशोधित कार्यक्रम की जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाई जाए। साथ ही सभी उपलब्ध संचार माध्यमों के जरिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक मतदाता समय पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर सकें। आयोग ने राजनीतिक दलों को भी लिखित रूप से इस संशोधित कार्यक्रम की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। इस बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में शामिल होने और पहले से सूची में मौजूद मतदाताओं के सत्यापन को लेकर भी अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि जो मौजूदा मतदाता पिछले विशेष गहन संशोधन (SIR) में शामिल नहीं थे, उन्हें मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अपने माता-पिता से संबंधित सर्वे विवरण संलग्न करना होगा।
नए आवेदकों के लिए अपने माता-पिता की एसआईआर संबंधी जानकारी देना जरूरी
इसी प्रकार फॉर्म-6 के माध्यम से पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वाले नए आवेदकों को भी अपने माता-पिता की एसआईआर संबंधी जानकारी आवेदन के साथ देनी होगी। आयोग का कहना है कि इससे मतदाताओं का सत्यापन अधिक प्रभावी होगा और फर्जी या दोहराव वाले पंजीकरण की संभावना कम होगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की व्यवस्था पहले बिहार में हुए विशेष गहन संशोधन के दौरान भी लागू की गई थी। वहां डिक्लेरेशन फॉर्म और अभिभावकों से जुड़ी जानकारी लेने की प्रक्रिया से नए मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन आसान हुआ था और अतिरिक्त कागजी कार्रवाई भी कम हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची का नियमित और गहन संशोधन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इससे पात्र मतदाताओं को मतदान का अधिकार सुनिश्चित होता है, जबकि अपात्र या दोहराव वाले नामों को हटाने में भी मदद मिलती है। निर्वाचन आयोग की यह पहल आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और अद्यतन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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