मायावती का विपक्ष पर बड़ा हमला, बोलीं-दलितों को गुमराह करने की चल रही साजिश
खबर सार :-
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को कहा कि बसपा चुनावी स्वार्थ के लिए सड़क जाम, धरना-प्रदर्शन, तोड़फोड़, हिंसा और भ्रामक प्रचार की राजनीति नहीं करती।
खबर विस्तार : -
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को कहा कि बसपा चुनावी स्वार्थ के लिए सड़क जाम, धरना-प्रदर्शन, तोड़फोड़, हिंसा और भ्रामक प्रचार की राजनीति नहीं करती। उन्होंने कहा कि पार्टी संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति पर काम करती है। मायावती ने सोशल मीडिया पर अपने एक बयान में बिना किसी दल का नाम लिए कहा कि कुछ राजनीतिक दल और उनके संरक्षण में काम करने वाले संगठन दलितों और बहुजन समाज को उग्र आंदोलनों तथा भावनात्मक नारों के जरिए गुमराह करने में जुटे हैं। ऐसे लोग दलित हितों के नाम पर केवल राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हैं, जबकि बसपा ने हमेशा सत्ता के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक उत्थान का रास्ता अपनाया है।
जनाधार बढ़ता देख विरोधी दल बेचैन
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार सरकारों के दौरान जनकल्याण, कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में आदर्श शासन का उदाहरण पेश किया गया। उनके मुताबिक बसपा ने हमेशा 'मगरमच्छ के आंसू' बहाने या अवसरवादी राजनीति करने के बजाय गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और है। बसपा प्रमुख ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का जनाधार बढ़ता देख विरोधी दल बेचैन हैं। इसी वजह से वे विभिन्न दलित संगठनों और राजनीतिक समूहों को आगे कर बहुजन समाज को बांटने और भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने समाज से ऐसे प्रयासों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। मायावती ने कहा कि बसपा नहीं चाहती कि बेरोजगार युवा और समाज के वंचित वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलनों के दौरान मुकदमों, जेल या सरकारी कार्रवाई का शिकार बनें, क्योंकि इसका सबसे अधिक नुकसान उनके भविष्य और परिवार को उठाना पड़ता है।
आगे बढ़ाना ही बसपा का मिशन
उन्होंने इसे विरोधियों की सोची-समझी रणनीति बताया। उन्होंने सहारनपुर हिंसा प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि बसपा ने उस समय सड़क से लेकर संसद तक दलितों की आवाज उठाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि संसद में संतोषजनक सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर विरोध दर्ज कराया था। उनके अनुसार बसपा का संघर्ष हमेशा संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायरे में रहा है। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने बसपा की स्थापना बहुजन समाज को राजनीतिक शक्ति बनाकर सामाजिक न्याय का लक्ष्य हासिल करने के लिए की थी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 'सत्ता की मास्टर चाबी' के विचार को आगे बढ़ाना ही बसपा का मिशन है और इस अभियान में बाधा डालने वाले तत्व बहुजन आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
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