भाजपा ने पंजाब के राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, स्थानीय निकाय और मेयर चुनावों में धांधली के लगाए गंभीर आरोप
खबर सार :-
भाजपा की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि हाल ही में संपन्न नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अभूतपूर्व हमले का उदाहरण हैं। पार्टी का आरोप है कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया।
खबर विस्तार : -
चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को पंजाब के राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद नगर निगमों तथा नगर परिषदों में मेयर एवं अध्यक्ष पद के चुनावों के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाया। पार्टी ने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में सरकारी मशीनरी का व्यापक दुरुपयोग किया गया, प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ और राजनीतिक दबाव के जरिए जनादेश को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। भाजपा ने राज्यपाल से पूरे मामले में संवैधानिक हस्तक्षेप और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन के अनुसार, चुनाव के दौरान राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने, प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से हस्तक्षेप करने और विभिन्न स्तरों पर कथित हेरफेर जैसी गतिविधियां देखने को मिलीं।
चुनाव की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
भाजपा ने कहा कि संविधान के भाग 9-ए के तहत स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से संचालित करने का जो संवैधानिक प्रावधान है, उसे राज्य प्रशासन के पक्षपातपूर्ण रवैये ने कमजोर कर दिया। पार्टी का आरोप है कि यह कथित अनियमितताएं केवल मतदान के दिन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भी जारी रहीं।
ज्ञापन में भाजपा ने आरोप लगाया कि कई नगर निगमों और नगर परिषदों में मेयर तथा अध्यक्ष पद के चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी के पास आवश्यक संख्या बल नहीं होने के बावजूद प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर परिणाम अपने पक्ष में किए गए। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक जनादेश की अनदेखी करते हुए आधिकारिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, जिससे निर्वाचित निकायों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
भाजपा ने सरकारी कर्मचारियों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनाव कराने वाले अधिकारियों का व्यवहार राजनीतिक निष्पक्षता, संवैधानिक मर्यादाओं और कानूनी दायित्वों के अनुरूप नहीं था। ज्ञापन में कहा गया कि प्रशासनिक अधिकारियों के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचाया है।
इसी आधार पर भाजपा ने राज्यपाल से मांग की है कि स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद मेयर एवं अध्यक्ष पदों के चुनावों के दौरान हुई कथित अनियमितताओं का संवैधानिक संज्ञान लिया जाए। साथ ही चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच राज्य सरकार से स्वतंत्र किसी निष्पक्ष प्राधिकरण से कराई जाए, ताकि पूरे मामले की पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित हो सके।
अबोहर नगर निगम चुनाव को बताया सबसे गंभीर मामला
भाजपा ने अपने ज्ञापन में अबोहर नगर निगम के मेयर चुनाव का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए इसे सबसे गंभीर उदाहरण बताया। पार्टी के अनुसार, 50 सदस्यीय सदन में भाजपा के 28 पार्षद, आम आदमी पार्टी के 20, कांग्रेस का एक और एक निर्दलीय पार्षद था। भाजपा का दावा है कि स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद रिटर्निंग अधिकारी ने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया और विधिवत मतदान कराने के बजाय हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई, जिसके बाद आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया गया।
भाजपा का आरोप है कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया में वैधानिक नियमों की अनदेखी की गई। पार्टी के मुताबिक, न तो औपचारिक मतदान कराया गया और न ही बैठक की कार्यवाही को वैधानिक रजिस्टर में दर्ज किया गया। इसके अलावा बहुमत वाले पार्षदों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों को भी नजरअंदाज कर दिया गया।
पार्टी ने यह भी दावा किया कि विरोध बढ़ने के बाद देर शाम संबंधित तहसीलदार ने मेयर चुनाव स्थगित करने की घोषणा कर दी। भाजपा का कहना है कि इस घटनाक्रम से पहले अपनाई गई पूरी प्रक्रिया की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हुई है।
भाजपा ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने और स्थानीय निकायों में जनता के जनादेश की रक्षा के लिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहीं, इस मामले में आम आदमी पार्टी या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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