धीरे-धीरे बदल रही काक्रोच की चाल, अभिजीत दिपके बन रहे विपक्ष की ढाल

खबर सार :-

धीरे-धीरे काक्रोच पार्टी की चाल बदल रही है। ऐसा भी हो सकता है कि अभिजीत दिपके विपक्ष की ढाल बन रहे हैं। वह पहले तो नई दिल्ली में छात्रों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रदर्षन करने आए थे, अब छात्रों से ज्यादा उनको विपक्ष की भलाई चाहिए।
पहले छात्रों की लड़ाई, अब विपक्ष की भलाई, गदगद हैं दलों के लोग

खबर विस्तार : -


लखनऊ: धीरे-धीरे काक्रोच जनता पार्टी की चाल बदल रही है। ऐसा भी हो सकता है कि अभिजीत दिपके विपक्ष की ढाल बन रहे हैं। वह पहले तो नई दिल्ली में छात्रों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रदर्शन करने आए थे, अब छात्रों से ज्यादा उनको विपक्ष की भलाई चाहिए। विपक्ष किसी भी मसले पर दम भर देता है, लेकिन दो दिन में ही उसको पता चलता है कि उसका भरा गुब्बारा फट गया। उसकी नैया पार करने के लिए अब सहारा जेनजी ही बन सकते हैं? विपक्ष की नजर काक्रोच जनता पार्टी वाले जेनजी पर है। वह भी गदगद हैं, क्योंकि उनके सीनियर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। 

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को केंद्र सरकार, शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों, राजनीतिक दलों और अपनी संगठनात्मक रणनीति के बारे में मीडिया से लंबी बात की थी। इस बातचीत से पता चलता है कि वह धीरे-धीरे लाइन पर आ रहे हैं। उनको असली मजा विपक्ष के साथ रहकर और विपक्ष की आवाज बन कर भाजपा को घेरने में मिलता है। यही तो अरविंद केजरीवाल ने किया था। केजरीवाल छात्र आंदोलन के दौरान मिलने भी पहुंचे थे। छात्र नेता का कहना है कि उनका संगठन किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है।

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शिक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आएंगे

सिस्टम के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। इनकी टीम क्या खेलती है? कह रहे हैं कि जहां भी छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आएंगे, उनकी टीम वहां मौजूद रहेगी। दिल्ली वाली टीम में गालीबाजों की भरमार थी। जिस तरह से हाथ जोड़कर माफी मांग रहे हैं, कह सकते हैं कि अब तो यह आने वाले नहीं। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को यह पता होना चाहिए कि छात्रों की समस्या तो सभी राज्यों में है, तो फिर यह विपक्ष के भैकरा क्यों हैं? इन्होंने  विपक्षी दलों को कमजोर कह दिया। इससे पता नहीं कि कौन दूरियां बना ले? विपक्ष के कमजोर होने के पीछे प्रवर्तन एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को एक प्रमुख कारण बताया। 

दिल की बात जुबां पर आ गई

उनका कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों के खिलाफ किया गया। यही तो दर्द है। दिल की बात जुबा पर आ गई। और उन्होंने हवाला भी दिया। इसमें कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में दो बडे विपक्षी दल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दोनों में विभाजन हुआ। 

प्रदर्शनकारियों ने पीएम, सनातन व देश को गाली दी

लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर कहा कि जब नागरिक अपनी चिंताएं किसी से कहता हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी बात सुने। उस पर कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है। यानी प्रधानमंत्री देश का कुछ भी नहीं? सख्त सजा देने का आश्वासन  पीएम ने पहले ही दिया था। इसके बाद तो हद कर दी आप ने। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री की मां, सनातन और देश सबको गाली दी। अभिजीत दिपके को आज कोर्ट के फैसले की जानकारी जरूर होगी। कोर्ट ने आपराधिक छवि वालों पर मुकदमा चलाने की छूट दी है। छात्र नेता का कहना है कि संगठन किसी विशेष राजनीतिक दल की आलोचना करने या बचाव करने के उद्देश्य से काम नहीं करता, लेकिन यह नहीं बताया कि केवल विपक्ष के लोग ही खास क्यों बने रहे। कहा कि उन्हें किसी सामाजिक या ऐतिहासिक नेता से तुलना पसंद नहीं है। 

आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का आरोप 

उन्हें अन्ना या गांधी जैसे संबोधनों से न पुकारा जाए। शायद दिपके को जानकारी चाएिये, अन्ना हजारे ने आंदोलन चलाया, लेकिन सत्ता और विपक्ष दोनों से दूर रहे। उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहा। आपके आंदोलन के बहाने दिल्ली जलाने की साजिश चल रही थी। कांग्रेस नेता पवन खेडा उनसे मिलने पहुंचे और राहुल गांधी की ओर से समर्थन का संदेश दिया। छात्र नेता के मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ, इसके बाद अब वह कह रहे हैं कि आंदोलन के दौरान पहले ही आशंका जताई थी कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी तत्व भेजे जा सकते है।  

FAQ...

1. लिखित में पुलिस को क्यों नहीं बताया?

बाहरी तत्वों के आने की बात पुलिस कह रही है। इसमें भी गंभीर अपराधी शामिल थे। पिछले दिन एक ऐसा अपराधी पकडा भी गया था जो पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की हत्या करने की साजिश रच चुका था। यह बताना चाहिए था कि उन्हें आंदोलन के खिलाफ साजिश की जानकारी कैसे मिलीे।

2 . क्या किसी राजनीतिक पार्टी के संपर्क में हैं?

पहले से ही उनके दिल्ली प्रदर्शन के दौरान कई दलों के लोग मंच तक पहुंच चुके हैं। सबसे ज्यादा कांग्रेस और आप के लोग संपर्क बनाए हुए हैं। निश्चित है कि राजनीतिक लोगों का संरक्षण उन्हें प्राप्त है।

3. क्या अन्ना हजारे और दिपके एक जैसे आंदोलनकारी हैं?

अन्ना हजारे के आंदोलन में एक डंडा भी नहीं तोडा गया, जबकि छात्रों के आंदोलन में दिल्ली को जलाने की साजिश रची जा चुकी थी। प्रदर्शनकारी संसद भवन के पास तक पहुंच गए थे। कई पुलिस वाले गंभीर हालत में पहुंच गए थे। छात्र-छात्राओं को भी चोट आई हैं।

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