छात्र आंदोलन पर बोले अखिलेश यादव, कहा- केवल मंत्री नहीं, पूरी व्यवस्था बदलने से मिलेगा न्याय

खबर सार :-

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार से ही छात्रों को न्याय मिलेगा। उन्होंने पेपर लीक, एनटीए जवाबदेही, आउटसोर्सिंग और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र पर निशाना साधा।
छात्र आंदोलन पर बोले अखिलेश यादव, कहा- केवल मंत्री नहीं, पूरी व्यवस्था बदलने से मिलेगा न्याय

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलनों, परीक्षा प्रणाली और कथित पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि देश के छात्रों को न्याय केवल किसी मंत्री के इस्तीफे से नहीं, बल्कि शिक्षा और शासन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव से मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं ने युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया है और सरकार को अब जवाबदेही तय करनी होगी।

शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली बदलने की मांग

संसद भवन परिसर में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि हाल में हुए छात्र आंदोलन को देशभर के अभिभावकों और परिवारों का व्यापक समर्थन मिला। इसी कारण यह आंदोलन इतना बड़ा बन गया कि अंततः केंद्र सरकार को छात्रों की मांगों के सामने झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब जनता और युवा एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते हैं तो सरकारों को उनकी बात सुननी ही पड़ती है।

अखिलेश यादव का यह बयान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के संदर्भ में आया। उन्होंने कहा कि केवल किसी एक मंत्री के पद छोड़ने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली, परीक्षा संचालन प्रणाली और प्रशासनिक सोच में व्यापक सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

सपा प्रमुख ने कहा, "जब तक स्थापित व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव नहीं होगा, तब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा। केवल चेहरे बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती। शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना होगा।"

उन्होंने उत्तर प्रदेश का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 20 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। उनके अनुसार इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित वही छात्र हैं, जो वर्षों तक कठिन मेहनत कर सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए तैयारी करते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह की गैरमौजूदगी पर सवाल

अखिलेश यादव ने कहा कि हालिया छात्र आंदोलन में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के युवा शामिल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को देशभर से समर्थन मिलने के कारण सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया था। उनके अनुसार यदि छात्रों और उनके परिवारों का समर्थन नहीं मिलता तो सरकार इतनी जल्दी अपनी स्थिति नहीं बदलती।

उन्होंने कहा कि करीब 20 लाख छात्रों ने नीट परीक्षा दी थी। यदि उनके परिवारों को भी जोड़ा जाए तो लगभग एक करोड़ लोग सीधे तौर पर इस मुद्दे से प्रभावित हुए। उन्होंने दावा किया कि इतने बड़े वर्ग की नाराजगी का असर जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों पर भी पड़ा, जिसके कारण सरकार को छात्रों की मांगों पर विचार करना पड़ा।

सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी होनी चाहिए थी। उनका कहना था कि छात्र आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई भी एक महत्वपूर्ण विषय था, क्योंकि पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने कठोर व्यवहार किया और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई।

आंदोलन को नजरअंदाज करने का आरोप

अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने के बजाय केवल "जुमले" देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन बार-बार पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की खबरें सामने आने से युवाओं का विश्वास कमजोर हुआ है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार छात्रों की सभी मांगों को गंभीरता से स्वीकार करेगी और ऐसी व्यवस्था विकसित करेगी, जिसमें किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल न उठे। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन को शुरुआत में हल्के में लिया गया था, वही बाद में इतना व्यापक हो गया कि सरकार को प्रदर्शन के लिए औपचारिक अनुमति देनी पड़ी। उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि छात्रों की आवाज को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

केंद्र सरकार पर साधा जमकर निशाना

आउटसोर्सिंग के मुद्दे पर भी सपा प्रमुख ने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष को आशंका है कि सरकार धीरे-धीरे शासन व्यवस्था के विभिन्न हिस्सों को भी आउटसोर्स करने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) जैसी महत्वपूर्ण संस्था के कार्यों में भी आउटसोर्सिंग की भूमिका है, तो किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली जैसी संवेदनशील व्यवस्था में जवाबदेही स्पष्ट होना बेहद आवश्यक है।

इस बीच लोकसभा में मंगलवार दोपहर पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। बहस की शुरुआत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था लागू की है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकारों के समय ऐसी व्यापक कानूनी व्यवस्था नहीं बनाई गई थी।

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