परिसीमन विधेयक पर खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

खबर सार :-

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मानसून सत्र से पहले एक सर्वदलीय बैठक के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि व्यापक राजनीतिक चर्चा से भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या असहमति की संभावना कम होगी।
परिसीमन विधेयक पर खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आगामी मानसून सत्र से पहले परिसीमन से जुड़े सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। खड़गे ने कहा कि संसद में संशोधित विधेयकों को पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों को उनके अध्ययन और चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

परिसीमन पर विचार-विमर्श करने की मांग

प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में खड़गे ने कहा कि कांग्रेस ने इस वर्ष की शुरुआत से ही परिसीमन के मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने याद दिलाया कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री को कई पत्र लिखकर सरकार से परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया था, लेकिन इन मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

खड़गे ने अपने पत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का भी उल्लेख किया, जो 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पहले सभी दलों के साथ चर्चा करती, तो संभवतः विधेयक पर बेहतर सहमति बन सकती थी।

पत्र में खड़गे ने लिखा कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान उन्होंने लगातार संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से परिसीमन और उससे जुड़े अन्य प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश उनके अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का संशोधित संस्करण दोबारा संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस बार विधेयक पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तृत चर्चा की जाए ताकि व्यापक सहमति बन सके।

खड़गे ने पत्र में लिखा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही हैं, तो सरकार को संसद में संशोधित विधेयक प्रस्तुत करने से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित करनी चाहिए। साथ ही, राजनीतिक दलों को प्रस्तावित संशोधनों का अध्ययन करने और अपने सुझाव देने के लिए पर्याप्त समय भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

यह पत्र कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सार्वजनिक किया। उन्होंने इसे सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। बाद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों से भी इस पत्र को पोस्ट किया गया।

क्या है सरकार का उद्देश्य

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर सके थे। संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, लेकिन सरकार यह संख्या जुटाने में सफल नहीं हो पाई थी।

प्रस्तावित संविधान संशोधन का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण के प्रभावी कार्यान्वयन का रास्ता साफ करना है। इसके साथ ही लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाने और भविष्य के परिसीमन की प्रक्रिया के लिए संवैधानिक आधार तैयार करने का भी प्रावधान किया गया है।

प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के तहत वर्ष 1976 के बाद पहली बार राज्यों के बीच संसदीय सीटों के पुनर्वितरण की संभावना है। यही कारण है कि यह विषय राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और कई राज्यों तथा राजनीतिक दलों ने इसके संभावित प्रभावों को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं पहले भी व्यक्त की हैं।

कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन जैसा संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाला विषय केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस पर सभी दलों के बीच संवाद और सहमति बनाने का प्रयास होना चाहिए। 

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से खड़गे के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने के कांग्रेस के प्रस्ताव पर विचार करती है या संशोधित विधेयकों को सीधे संसद में पेश करती है।

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