‘यह संविधान में निहित मूल्यों पर हमला’, खड़गे की रैली स्थल पर हुए ‘शुद्धिकरण’ पर बोले मुख्यमंत्री शिवकुमार
खबर सार :-
हलद्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ की सीएम डीके शिवकुमार ने कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे संविधान में निहित मूल्यों का अपमान बताया।
खबर विस्तार : -
बेंगलुरु: नैनीताल जिले के हल्द्वानी में रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 'विजय शंखनाद' रैली के बाद हुए 'शुद्धिकरण यज्ञ' (धार्मिक शुद्धि समारोह) को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को उत्तराखंड के हल्द्वानी में AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा वाली जगह पर कथित 'शुद्धिकरण' की रस्म की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे शर्मनाक हरकत और संविधान का अपमान बताया।
एक बयान में शिवकुमार ने कहा कि यह घटना "सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि हमारे संविधान में निहित मूल्यों पर सीधा हमला है और आधुनिक भारत में जाति-आधारित भेदभाव का एक घिनौना उदाहरण है।" उन्होंने खड़गे को देश के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक और जीवनभर जनसेवा करने वाला व्यक्ति बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी सार्वजनिक स्थल को केवल इसलिए 'शुद्धिकरण' की जरूरत वाला मानना क्योंकि वहां एक दलित नेता ने सभा को संबोधित किया था, साफ तौर पर जाति-आधारित भेदभाव है। उन्होंने कहा कि यह न केवल मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान है, बल्कि समानता, भाईचारे और मानवीय गरिमा में विश्वास रखने वाले हर भारतीय का अपमान है।
संवैधानिक अपराध और नैतिक कलंक
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि छुआछूत कोई राय का मामला नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक अपराध और नैतिक कलंक है। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग ऐसी प्रथाओं को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, वे डॉ. बी.आर. अंबेडकर और संविधान निर्माताओं द्वारा परिकल्पित गणतंत्र की नींव पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सार्वजनिक जीवन में ऐसी मध्ययुगीन कुरीतियों की वापसी को बर्दाश्त नहीं कर सकता और न ही उसे करना चाहिए। हर नागरिक, चाहे उसकी जाति कोई भी हो, समान गरिमा और सम्मान का हकदार है। ऐसी हरकतों को सामान्य या सही ठहराने की किसी भी कोशिश को पूरी तरह से खारिज कर दिया जाना चाहिए।
घटना के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान
खड़गे के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मजबूती से खड़े हैं और सभी लोकतांत्रिक ताकतों से इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। शिवकुमार ने कहा कि ऐसे भेदभाव के सामने चुप रहने से समाज को बांटने वालों का हौसला ही बढ़ता है। हमें समानता, न्याय और सभी के लिए गरिमा के संवैधानिक वादे पर बने भारत के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को फिर से दोहराना होगा।
भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
उत्तराखंड के हल्द्वानी में रामलीला मैदान में हुए कथित 'शुद्धिकरण अनुष्ठान' (यज्ञ) को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस ने 'श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास' द्वारा आयोजित इस यज्ञ को दलित-विरोधी और पिछड़ा वर्ग-विरोधी सोच से जोड़ते हुए बीजेपी से सवाल किए हैं, जबकि बीजेपी ने इस कार्यक्रम से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने दुख जताया
राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपना दुख जताया और कहा कि ऐसी घटनाओं से उन्हें बहुत अपमानित महसूस हुआ है। संसद में यह मुद्दा उठने के बाद, बीजेपी और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं। बीजेपी ने इस कार्यक्रम से पार्टी का कोई भी संबंध होने से इनकार किया है, जबकि कांग्रेस ने इसे सामाजिक भेदभाव और दलितों के सम्मान से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
संस्था ने बताया धार्मिक कार्यक्रम
अलग-अलग बयानों में, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और खजान दास समेत बीजेपी नेताओं ने कहा कि रामलीला मैदान में हुआ हवन-यज्ञ पार्टी का कार्यक्रम नहीं था। बीजेपी नेताओं के अनुसार, आयोजन करने वाली संस्था ने खुद इसे एक धार्मिक कार्यक्रम बताया था। उनका आरोप है कि कांग्रेस इस घटना को राजनीतिक और जातिगत रंग देकर राज्य के सामाजिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस ने स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए
दूसरी ओर, कांग्रेस ने बीजेपी के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं और मामले में कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव वैभव वालिया ने देहरादून में अंबेडकर भवन, सेवला कलां चौक पर बीजेपी का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जगह पर खड़गे का कार्यक्रम हुआ था, वहां कथित शुद्धिकरण दलितों और समाज के वंचित वर्गों के सम्मान से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है।
क्या है पूरा मामला
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी की ओर से 'विजय शंखनाद' रैली आयोजित की गई थी। इसके बाद, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्यों ने उसी जगह पर शुद्धि यज्ञ किया। संगठन के सदस्यों के मुताबिक, यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से सनातन-विरोधी बताई जाने वाली टिप्पणियों के विरोध में किया गया था और इसका किसी खास जाति या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं था। ट्रस्ट का कहना था कि रामलीला जैसे धार्मिक आयोजन से जुड़े मैदान में, सनातन-विरोधी विचार रखने वाले व्यक्ति की रैली के बाद शुद्धि अनुष्ठान करना उनकी धार्मिक आस्था का मामला था।
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