अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से झटका, विदेश जाकर इलाज कराने की राह में अटका कानूनी पेंच, 7 अगस्त को अगली सुनवाई

खबर सार :-

कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला अभिषेक बनर्जी के लिए तत्काल राहत की उम्मीद पर ब्रेक है। विदेश इलाज की अनुमति वाली याचिका खारिज होने के बाद अब उनका ध्यान लंबित मामलों की सुनवाई पर रहेगा। अदालत ने मेडिकल जांच और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। 7 अगस्त की सुनवाई उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और सुरक्षा मांगों के लिहाज से अहम होगी।
अभिषेक को हाईकोर्ट का बड़ा झटका, याचिका खारिज

खबर विस्तार : -

Abhishek Banerjee Plea Rejected:  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगने वाली उनकी याचिका बुधवार को खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब याचिकाकर्ता अदालत के निर्देश के अनुसार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए तैयार नहीं है।

मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया था कि अभिषेक बनर्जी की आंखों की स्थिति की जांच एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से कराई जाए। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या उनका इलाज भारत में संभव है या उन्हें विदेश जाने की जरूरत है।

मेडिकल बोर्ड की जांच पर बनी सहमति नहीं

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुरुआत में संतुलित रास्ता अपनाते हुए मेडिकल विशेषज्ञों की राय लेने का निर्देश देने का विचार रखा था। अदालत चाहती थी कि पहले यह स्पष्ट हो जाए कि अभिषेक बनर्जी की चिकित्सा जरूरतों को देश में पूरा किया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को 7 अगस्त तक रिपोर्ट देने का निर्देश देने की बात कही थी। रिपोर्ट के आधार पर ही विदेश में इलाज की आवश्यकता पर अंतिम निर्णय लिया जाना था। हालांकि, अभिषेक बनर्जी मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने को लेकर सहमत नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब याचिकाकर्ता अदालत के निर्देश के अनुसार मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं होना चाहता, तो इस मुद्दे को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर आगे विचार की आवश्यकता नहीं है और मौजूदा याचिका को खारिज किया जाता है।

कई मामलों की जांच के बीच विदेश यात्रा का मामला

अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की अनुमति से जुड़ा मामला उन कानूनी विवादों से जुड़ा है, जिनमें उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और जांच शामिल हैं। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात का भी उल्लेख किया कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं और उनकी जांच जारी है। मुख्य मामले में कुल 16 एफआईआर और सभी मामलों में सुरक्षा यानी ब्लैंकेट प्रोटेक्शन की मांग को लेकर सुनवाई 7 अगस्त को होनी है।

चुनावी घटनाक्रम के बाद दर्ज हुए थे मामले

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज मामलों की पृष्ठभूमि पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ी है। चुनावी घटनाक्रम के बाद उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ बयान देने से जुड़े मामले भी शामिल बताए जा रहे हैं। टीएमसी सांसद ने इन मामलों को रद्द करने के लिए अदालत का रुख किया था। कई मामलों में उन्हें अंतरिम राहत भी मिली है। अब उनकी विदेश यात्रा और लंबित मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

टीएमसी के लिए बढ़ी कानूनी चुनौती

अभिषेक बनर्जी टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में अदालत का यह फैसला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, हाईकोर्ट का आदेश केवल विदेश यात्रा की अनुमति से जुड़ी याचिका पर है। अन्य मामलों में सुनवाई तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी।

अब 7 अगस्त की सुनवाई पर नजर

विदेश इलाज की अनुमति नहीं मिलने के बाद अब सभी की नजर 7 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर है, जिसमें एफआईआर और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर अदालत विचार करेगी। अभिषेक बनर्जी के लिए यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। वहीं, अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी भी राहत से पहले कानूनी प्रक्रिया और जांच से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

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FAQ.

1. अभिषेक बनर्जी की याचिका किस मामले से जुड़ी थी?

अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

2. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका क्यों खारिज की?

अदालत ने याचिका इसलिए खारिज की क्योंकि अभिषेक बनर्जी कोर्ट के निर्देश के अनुसार मेडिकल बोर्ड के सामने जांच के लिए पेश होने को तैयार नहीं थे।

3. मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश क्यों दिया गया था?

हाईकोर्ट यह जानना चाहता था कि क्या अभिषेक बनर्जी की आंखों का इलाज भारत में संभव है या विदेश में इलाज की जरूरत है।

4. अब इस मामले में आगे क्या होगा?

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी मामलों पर 7 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

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