बार-बार चक्कर आना सिर्फ थकान नहीं, इन वजहों से भी घूम सकता है सिर

खबर सार :-

शरीर में पानी की कर्मी से कई गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं। इनको हल्के में लेना नुकसानदायक ही नहीं, जानलेवा भी हो सकती हैं। चक्कर आने की कभी शिकायत हुई हो तो एक बार जल्द ही जांच कराना चाहिए।
पानी की कमी से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां, चक्कर आने पर कराएं जांच

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: शरीर में पानी कितना महत्वपूर्ण है, यह बात कोई वैद्य या डॉक्टर ही बता सकता है। शरीद में यदि पानी की कमी हो गई तब भी आपको पता नहीं चल पाएगा। पानी की कमी के चलते कई बीमारियां पनप रही है। इनमें यदि कभी चक्कर आने की शिकायत महसूस हुई हो, तो सावधान हो जाइए। डॉक्टर से मिलकर परामर्श करिए और ब्लड प्रेशर की जांच भी कराइये। अचानक ही धीरे से चक्कर आना और फिर उसका रुक जाना या लड़खड़ाने की शिकायत आपको महसूस हो रही है तो मान लीजिए, आपके शरीर में पानी की कमी हो रही है। 

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लंबे समय से है यह हाल तो कराएं चेकअप

लंबे समय से कुछ खाना नहीं खाने या अचानक ब्लड प्रेशर गिरने के कारण भी चक्कर आने की शिकायत हो सकती है। डॉक्टर का मानना है कि हर बार चक्कर को सिर्फ कमजोरी और थकान मान लेना ही समझदारी नहीं होगी। कई ऐसे लोगों पर शोध भी किए गए हैं, जिनमें निष्कर्ष निकला है की चक्कर आने के समय लगता है कि कहीं बेहोश होने वाले हैं। बीमार जब ऐसी बातें बताता है, तब ऐसी संभावनाएं बन जाती हैं, जिनसे लगने लगता है कि बीमारी करीब पहुंचने लगी है।

शरीर हल्का पड़ने लगता है, जबकि कुछ लोगों को अपने आसपास की चीजें घूमती हुई दिखाई देने लगती हैं। ऐसी स्थिति को वर्टिगो कहा जाता है। इसके साथ ही कुछ लोगों को उल्टी आने लगती हैं। शरीर में बेचैनी और घबराहट महसूस की जाने लगती है। अचानक ही यह परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। कई बार ऐसा भी पाया जाता है कि बैठे रहने के बाद अचानक से खड़े होने की स्थिति में कुछ समय के लिए आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है। कमजोरी और थकान के साथ ही चक्कर आने की शिकायत महसूस होने लगती है। 

कई शोधों का रिजल्द है बीमारी पर आधारित

कई शोधों में इन संबंधित विषयों पर बताया गया है की तेजी के साथ ब्लड प्रेशर नीचे के साथ जाने लगता है, इसे ऑर्थोस्टेटिक कहा जाता है। शरीर की स्थिति बदलने पर कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। यह स्थिति बदलने के समय ही ऐसा महसूस होता है। कुछ परिस्थितियों ऐसी होती है जिससे दिमाग तक रक्त का श्राव होता है और यह बहुत क्षणिक होता है।

इसके लिए डॉक्टर से मिलना जरूरी होता है गर्मी में भी यह दिक्कत बढ़ जाती है, क्योंकि शरीर में उल्टी, दस्त, पसीना, बुखार की संभावना होने पर पानी की कमी महसूस होने लगती है। भूख प्यास लगने के अलावा थकान मुंह का सूखना यह पानी से संबंधित बीमारियां हैं। पेशाब कम होना और उसका रंग गहरा होना चक्कर आने की परेशानी से जुड़ा होता है। अगर शरीर में पानी की कमी बढ़ जाती है तो यह किसी गंभीर बीमारी की दावत मान लेना चाहिए। शरीर में चक्कर आने की परेशानी को गंभीरता से लेना चाहिए। इसे नजरअंदाज करने से कभी बड़ा हादसा हो सकता है।

सरकारी अस्पतालों में है इसका मुफ्त इलाज

 खासकर डायबिटीज की दवाइयां इंसुलिन लेने वाले ब्लड प्रेशर के मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इन्हीं कारणों में भूख प्यास ना लगना, कमजोरी, थकान, घबराहट और सोचने समझने की परेशानी आदि उत्पन्न होने लगती है। कार्बोहाइड्रेट लेने से भी कुछ परिस्थितियों बल्कि उससे ब्लड शुगर गिर सकता है। बार-बार ऐसा होने पर उसका इलाज करने के लिए डॉक्टर उसे परामर्श लेना जरूरी होता है।

बिना डॉक्टर को बताएं किसी प्रकार की दवाई भी नहीं ली जा सकती हैं। एनीमिया में शरीर के वह तो ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है। चक्कर भी दो तरह से आते हैं या दिन में थकान और कमजोरी ज्यादा महसूस हो रही है या फिर कभी-कभार खड़े होने के समय यही दिक्कत आती है। इन सभी परिस्थितियों के अलावा अचानक नजर में बदलाव डबल विजन या चेहरे हाथ पैर में कमजोरी और सुन्नपन लगे।

बेहोशी की शिकायतें बढ़ने लगं, तभी तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए इन परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार पाया गया कि मरीज चक्कर खाकर गिर जाता है। उसके पास धन की कमी के कारण अस्पताल नहीं जाता है। यह परिस्थिति जानलेवा बन सकती है। यूं तो सरकार हर किसी को इलाज नहीं दे सकती हैं, लेकिन यह छोटी जांच हैं। सरकार की ओर से संचालित अस्पतालों में इसकी जांच करा सकते हैं। यह बिलकुल मु्फ्त इलाल है।  

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