भटकटैया: जंगल का रहस्यमयी पौधा, कांटों में छिपा आयुर्वेद का अनमोल खजाना
खबर सार :-
भटकटैया एक ऐसा औषधीय पौधा है, जो जंगलों में आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसके फायदे अनमोल हैं। इसके फूल, तना, बीज और जड़ कई रोगों में राहत दे सकते हैं। हालांकि यह प्राकृतिक औषधि है, फिर भी इसका सेवन सोच-समझकर और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए, ताकि लाभ के साथ सुरक्षा भी बनी रहे।
खबर विस्तार : -
Ayurveda: भारत के जंगलों और ग्रामीण इलाकों में उगने वाला भटकटैया देखने में भले ही कांटेदार और डरावना लगे, लेकिन इसके औषधीय गुण इसे बेहद खास बनाते हैं। इसे कटेरी या कंटकारी भी कहा जाता है। आयुर्वेद में इस पौधे का उल्लेख सदियों से मिलता है। इसके फूल, तना, पत्ते, जड़ और बीज-हर हिस्सा किसी न किसी रोग में लाभकारी माना गया है। यही वजह है कि इसे “जंगल का रहस्यमयी पौधा” कहा जाता है।
फूल, पत्ते और तना: तीनों में छिपी सेहत
भटकटैया के फूल बैंगनी और सफेद रंग के होते हैं, जबकि पत्ते हरे और कांटेदार। इसका तना कड़वा होता है, लेकिन यही कड़वाहट औषधीय गुणों की पहचान है। आयुर्वेद में इसके फूल और तने का उपयोग सूजन, पैरों में जलन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है। पत्तों का रस पाचन सुधारने और पेट की गैस कम करने में सहायक माना जाता है।
तीन प्रजातियां, अलग-अलग फायदे
भटकटैया की मुख्य रूप से तीन प्रजातियां पाई जाती हैं-छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी और श्वेत कंटकारी। ये तीनों प्रजातियां अलग-अलग रोगों में उपयोगी हैं। अस्थमा, खांसी, माइग्रेन और सिरदर्द जैसी समस्याओं में इसका प्रयोग काफी लाभकारी माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे घरेलू नुस्खों के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
बीज और जड़: गंभीर रोगों में भी उपयोगी
भटकटैया के फल कच्चे हरे और पकने पर पीले हो जाते हैं। इसके बीज छोटे, चिकने और औषधीय तत्वों से भरपूर होते हैं। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, इसके बीजों में पाया जाने वाला सिलिबिनिन तत्व ब्रेन ट्यूमर और पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ी कुशिंग बीमारी में सहायक हो सकता है। वहीं इसकी जड़ सर्दी-खांसी, गले की खराश और बुखार में उपयोगी मानी जाती है।
जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस में राहत
ठंड के मौसम में भटकटैया की जड़ और गुडुची का काढ़ा पीने से खांसी और जुकाम में राहत मिलती है। इसके अलावा अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द में भी इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेदाचार्य इसे सूजन कम करने वाला प्रभावी पौधा बताते हैं।
अन्य प्रमुख खबरें
-
गुर्दे स्वस्थ नहीं तो आप भी अस्वस्थ, सुबह उठें और करें यह उपाय
2026-09-01
-
पटियाला: मैराथन कर मनाया गुरु रविदास महाराज का 650वां प्रकाश पर्व
2026-09-01
-
केजीएमयू लखनऊ में रोबोटिक सर्जरी से पांच साल के बच्चे का सफल इलाज
2026-08-31
-
KGMU National Allergy Summit 2026: अस्थमा और एलर्जी के बढ़ते मामलों पर विशेषज्ञों की अहम चर्चा
2026-08-31
-
केजीएमयू के प्रो. फहद मंसूर समदी को प्रतिष्ठित FDS RCPS ग्लासगो फेलोशिप
2026-08-31
-
KGMU: H1N1 मौसमी इन्फ्लुएंजा है, नया स्ट्रेन नहीं मिला
2026-08-31
-
घर का खाना भी बढ़ा सकता है कोलेस्ट्राॅल, इन आदतों में बदलाव जरूरी
2026-08-31
-
कैल्शियम की कमी से हो सकती हैं गंभीर समस्याएं, जानें इसके स्रोत
2026-08-31
-
दिल्ली-NCR में 192 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि, सावधानी की अपील
2026-08-29
-
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 2,000 से अधिक मामले, बचाव एवं सतर्क रहने की अपील
2026-08-26
-
केजीएमयू के डॉ. मृदुल त्रिपाठी को ब्रिटिश थोरेसिक सोसाइटी ट्रैवल ग्रांट, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके नाम
2026-08-26
-
आगरा: जेई की दर्दनाक मौत, ट्रेन से फिसले, दोनों पैर कटे
2026-08-26
-
करौंदे में हैं औषधीय गुण, दिल और पेट के लिए भी है फायदेमंद
2026-08-25
-
स्वाइन फ्लू-डेंगू को लेकर बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की अपील
2026-08-25
-
छापे में मिली मिलावट की मिठाई, रक्षाबंधन में खपाने की थी तैयारी
2026-08-25