हिम्स के चिकित्सक अब संस्कृति आयुर्वेदिक अस्पताल में देखेंगे मरीज
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश के जिला मथुरा में संस्कृति आयुर्वेदिक अस्पताल में नई व्यवस्था दी गई है। यहां पहली बार हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंसेज (हिम्स) के चिकित्सकों को मुस्तैद किया गया है। यह लोग नेचुरोपैथी और आर्युवेदिक इलाज के लिए आगे आए हैं। इन्होंने एक समझौता के तहत ऐसा किया है।
खबर विस्तार : -
मथुरा; उत्तर प्रदेश के जिला मथुरा में संस्कृति आयुर्वेदिक अस्पताल में नई व्यवस्था दी गई है। यहां पहली बार हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंसेज (हिम्स) के चिकित्सकों को मुस्तैद किया गया है। यह लोग नेचुरोपैथी और आर्युवेदिक इलाज के लिए आगे आए हैं। इन्होंने एक समझौता के तहत ऐसा किया है। आयुर्वेदिक उपचार में पुरानी बीमारियों जैसे गुर्दा रोग, यकृत रोग, कैंसर, दिल की बीमारी, बांझपन, मधुमेह का इलाज होता हैं।
रोगों के मूल कारण का निवारण करेंगे
भारत के आयुर्वेदिक अस्पतालों में से एक हिम्स ने संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल अस्पताल को एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत अपने एक नए केंद्र के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया है। ब्रज और आसपास के क्षेत्र के रोगियों का इलाज नेचुरोपैथी और आयुर्वेदिक चिकित्सा के माध्यम से यहां हिम्स के ख्यातिप्राप्त चिकित्सक अपने अनुभव और विशेषज्ञता के द्वारा कर रहे हैं। रोगियों को आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य को एकीकृत करते हुए प्राकृतिक तरीकों से दीर्घकालिक रोगों का यानी यहां असाध्य रोगों का भी इलाज हो रहा है। अस्पताल में सर्वोत्तम आयुर्वेदिक उपचार प्रदान किया जा रहा है। संस्कृति आयुर्वेदिक अस्पताल और हिम्स का मुख्य उद्देश्य शरीर को शुद्ध, पुनर्जीवित और संतुलित करने वाली चिकित्सा पद्धतियाँ देकर लाभ पहंुचाना है। यह रोगों के मूल कारण का निवारण करेंगे।
स्वास्थ्य समस्याओं को समझने के लिए परामर्श होती
संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने जानकारी दी है कि संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल अस्पताल में शुरू हुआ प्रयास सराहनीय है। हिम्स आयुर्वेद वेलनेस हॉस्पिटल आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए जाना जाता है। हिम्स में शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल उपचार प्रदान करता है। व्यक्तिगत देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाता हैै। इसमें प्रत्येक रोगी की स्वास्थ्य स्थिति को उनकी विशिष्ट शारीरिक संरचना के अनुसार देखा जाता है।
अन्य तकनीकियों में ऐसा नहीं है। इसमें दोष और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार शरीर के रोगों को प्रतिबंधित किया जाता है। पहले परामर्ष किया जाता है। मरीज को समझने का पूरा मौका मिलता है। उपचार की शुरुआत रोगी की स्वास्थ्य समस्याओं को समझने के लिए परामर्श से होती है। डॉक्टर रोगी के दोष असंतुलन का परखते हैंै। पहले वह उपचार योजना बनाते हैं। इस योजना में आमतौर पर हर्बल दवाएं, डिटॉक्स थेरेपी, आहार में बदलाव और जीवनशैली को स्थान देते रहे हैंै। हिम्स के संस्थापक आचार्य मनीष के अनुसार हिम्स अपने असाधारण आयुर्वेदिक का प्रचार भी करेगा।जिनमें चिकित्सा पद्धतियाँ, हर्बल दवाएँ और रोगियों के लिए आहार एवं जीवनशैली आदि शामिल हैं।
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