Alzheimer के इलाज में नई उम्मीद! Diranersen दवा ने याददाश्त घटने की रफ्तार की धीमी, ट्रायल में मिले उत्साहजनक नतीजे

खबर सार :-

डिरानर्सेन पर हुए शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल के परिणाम अल्जाइमर के इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण उम्मीद जगाते हैं। दवा ने याददाश्त और मानसिक क्षमता में गिरावट की रफ्तार कम करने के साथ टाउ प्रोटीन का स्तर भी घटाया है। हालांकि, इसे नियमित उपचार के रूप में अपनाने से पहले तीसरे चरण के परीक्षण और नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी।
Alzheimer के इलाज में नई उम्मीद! Diranersen दवा ने याददाश्त घटने की रफ्तार की धीमी, ट्रायल में मिले उत्साहजनक नतीजे

खबर विस्तार : -

Alzheimer's Drug Trial: अल्जाइमर रोग के शुरुआती चरण से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक नई रिसर्च उम्मीद की किरण लेकर आई है। परीक्षणाधीन दवा डिरानर्सेन (Diranersen) के क्लीनिकल ट्रायल में ऐसे परिणाम सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि यह दवा याददाश्त कमजोर होने और सोचने-समझने की क्षमता में आने वाली गिरावट की रफ्तार को धीमा कर सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि आगामी चरणों के परीक्षण भी सफल रहे, तो यह दवा अल्जाइमर के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

CELIA के बैनर तले वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल

यह अध्ययन सीईएलआईए (CELIA) नामक वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल के तहत किया गया, जिसमें शुरुआती चरण के अल्जाइमर से पीड़ित 416 मरीजों को शामिल किया गया। करीब 18 महीने तक चले इस अध्ययन में मरीजों को दवा की अलग-अलग खुराक दी गई ताकि इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन किया जा सके। शोधकर्ताओं के अनुसार, 60 मिलीग्राम की खुराक लेने वाले मरीजों में सबसे अधिक सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।

याद रखने की क्षमता में गिरावट पर लगा ब्रेक

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन हॉस्पिटल्स (यूसीएलएच) की न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर ने बताया कि ट्रायल के दौरान यह पाया गया कि डिरानर्सेन लेने वाले मरीजों में सोचने-समझने और याद रखने की क्षमता में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दवा अभी परीक्षण के चरण में है और इसे नियमित इलाज के तौर पर उपलब्ध कराने से पहले तीसरे चरण के बड़े क्लीनिकल ट्रायल किए जाएंगे। अध्ययन के नतीजों के अनुसार, 60 मिलीग्राम डोज लेने वाले मरीजों में प्लेसीबो (डमी दवा) की तुलना में बीमारी के बढ़ने की रफ्तार 26 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक कम देखी गई। विभिन्न न्यूरोलॉजिकल और संज्ञानात्मक परीक्षणों में भी मरीजों की मानसिक क्षमता अपेक्षाकृत बेहतर बनी रही। यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसका अब तक कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है।

Alzheimer's Drug Trial-Tau Protein-Memory Loss

अल्जाइमर रोग में टाउ (Tau) प्रोटीन की अहम भूमिका

शोधकर्ताओं के मुताबिक, अल्जाइमर रोग में टाउ (Tau) प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। यह प्रोटीन मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर असामान्य रूप से जमा होकर उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, जिससे याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और व्यवहार पर असर पड़ता है। डिरानर्सेन को विशेष रूप से इसी टाउ प्रोटीन के बनने की प्रक्रिया को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। ट्रायल के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दवा ने मरीजों के मस्तिष्कमेरु द्रव (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) में मौजूद कुल टाउ प्रोटीन (टोटल टाउ) के स्तर को 50 से 65 प्रतिशत तक कम कर दिया। इतना ही नहीं, पहली बार टाउ प्रोटीन को लक्षित करने वाली किसी दवा के परीक्षण में पीईटी स्कैन के जरिए मस्तिष्क में टाउ से जुड़े परिवर्तनों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञ इसे इस बात का संकेत मान रहे हैं कि दवा बीमारी की मूल प्रक्रिया पर प्रभाव डाल सकती है। प्रोफेसर ने कहा कि सीईएलआईए अध्ययन के नतीजे इस धारणा को मजबूत करते हैं कि टाउ प्रोटीन को नियंत्रित करने से अल्जाइमर मरीजों को वास्तविक चिकित्सीय लाभ मिल सकता है। उनके अनुसार, डिरानर्सेन के परिणाम अब तक टाउ प्रोटीन आधारित उपचारों में सबसे उत्साहजनक निष्कर्षों में शामिल हैं। यही वजह है कि अब इसे बड़े स्तर पर तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।

मरीजों में दवा के साइड इफेक्ट हल्के       

दवा की सुरक्षा को लेकर भी अध्ययन में सकारात्मक संकेत मिले हैं। अधिकांश मरीजों में इसके साइड इफेक्ट हल्के या मध्यम स्तर के रहे और किसी बड़े सुरक्षा जोखिम की पुष्टि नहीं हुई। यही कारण है कि अध्ययन पूरा करने वाले 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने लंबे समय तक चलने वाले अगले ट्रायल में भी शामिल होने की इच्छा जताई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती परिणाम उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन डिरानर्सेन को व्यापक रूप से मरीजों तक पहुंचाने से पहले इसके तीसरे चरण के परीक्षण पूरे होने और नियामक संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी। यदि आगे के अध्ययन भी इसी तरह के सकारात्मक परिणाम देते हैं, तो यह दवा भविष्य में अल्जाइमर के उपचार के विकल्पों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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