Toxic Movie Review: एक्शन-इमोशन और खून-खराबे के साथ यश का स्वैग, जानें कैसी है फिल्म टॉक्सिक

खबर सार :-

Toxic Movie Review:यश, नयनतारा, रुक्मिणी वसंत, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया की 'टॉक्सिक' शुक्रवार को रिलीज हुई। गीतू मोहनदास की डायरेक्ट की गई यह फिल्म कैसी है
Toxic Movie Review: एक्शन-इमोशन और यश का स्वैग, क्लाइमैक्स करेगा हैरान

खबर विस्तार : -

Toxic Movie Review: कन्नड़ सुपरस्टार यश (Yash) की बहुप्रतीक्षित फिल्म, 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' आखिरकार बड़े पर्दे पर आ गई है। फिल्म 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इस फिल्म के साथ यश चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं; उन्हें आखिरी बार 'KGF 2' में देखा गया था। डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने एक आम गैंगस्टर ड्रामा बनाने के बजाय एक ऐसी अलग दुनिया बनाई है जहां अपराध, सत्ता, परिवार, रिश्ते और बदले की भावना आपस में जुड़े हुए हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस है, जो दर्शकों को शुरू से आखिर तक बांधे रखती है। 3 घंटे 14 मिनट की इस फिल्म में एक्शन तो कूट-कूटकर भरा गया है, पर क्या वाकई में इसकी कहानी में दम है?

कैसी है फिल्म टॉक्सिक की कहानी

'Toxic' की कहानी अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी गैंगस्टर की दुनिया की सीमाओं से कहीं आगे तक फैली हुई है। राया और उसके बेटे टिकट के किरदारों के जरिए, कहानी परिवार के समीकरणों, रिश्तों, सत्ता के संघर्ष और वफादारी की कई परतें खोलती है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पारिवारिक रिश्ते भी उतने ही अहम हो जाते हैं जितने कि आपराधिक दुनिया में चल रहे सत्ता के खेल। फिल्म एक्शन और गैंगस्टर ड्रामा के साथ-साथ भावनाओं का भी अच्छा तालमेल बिठाती है; यही बात इसे सिर्फ हिंसा और बदले की कहानी बनने से बचाती है। हालांकि कहानी को समझने और किरदारों की दुनिया में पूरी तरह डूबने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन फिल्म रफ्तार पकड़ती है और कई दिलचस्प मोड़ लाती है।

शुरूआत के 30-40 मिनट आपको कहानी समझने में लग जाएंगे कि आखिर चल क्या रहा है। एक के बाद एक किरदारों की एंट्री होती है, जो शायद फिल्म की जल्दबाजी दिखाती है। हालांकि, यश का स्वैग भरपूर दिखता है। एक्शन इतना जबरदस्त है कि दर्शक नज़रें हटाने पर मजबूर हो सकते हैं। खून-खराबे और गोलियों की आवाज़ के बीच, कई बोल्ड सीन भी हैं। जहां तारा, कियारा और नयनतारा के किरदारों की भावनाएं साफ महसूस होती हैं, वहीं नयनतारा और यश के किरदारों के बीच का रिश्ता कहीं खोया हुआ सा लगता है।

यश का स्वैग 

यश निस्संदेह फिल्म की सबसे बड़ी खूबी हैं। वह राया और टिकट के किरदारों में अलग-अलग रंग भरते हैं। उनका स्वैग, डायलॉग बोलने का अंदाज, बॉडी लैंग्वेज और एक्शन सीन खास तौर पर उनके फैन्स को पसंद आएंगे। यश अपने किरदार को सिर्फ एक खतरनाक गैंगस्टर के तौर पर नहीं दिखाते, बल्कि उसमें भावनात्मक गहराई भी लाते हैं; परिवार और रिश्तों से जुड़े सीन में उनका एक अलग ही पहलू सामने आता है। एक्शन सीन के दौरान उनका आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म में लगातार ऊर्जा बनाए रखता है। वह कई सीन में छाए रहते हैं, जिससे यह फिल्म सचमुच एक शानदार, स्टार-केंद्रित सिनेमाई अनुभव बन जाती है।

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महिला किरदारों की अहम भूमिका

नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत (Rukmini Vasanth) फिल्म में अहम भूमिकाएं निभाती हैं। खास बात यह है कि ये किरदार सिर्फ पुरुष मुख्य कलाकार के इर्द-गिर्द नहीं घूमते; बल्कि वे कहानी को सक्रिय रूप से आकार देते हैं और सत्ता के खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नयनतारा फिल्म के भावनात्मक और पारिवारिक पहलुओं को संभालती हैं, जबकि कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत कहानी को आगे बढ़ाने में अहम योगदान देती हैं। 

डायरेक्शन और टेक्निकल पहलू

महिला गीतू मोहनदास ने फिल्म को एक अलग विजुअल पहचान देने की कोशिश की है और वे इसमें काफी हद तक सफल भी रही हैं। रंग, सेट डिजाइन, कॉस्ट्यूम, लाइटिंग और कैमरा वर्क के इस्तेमाल से गैंगस्टर्स की दुनिया को एक अनोखे अंदाज में पेश किया गया है। कई फ्रेम बड़े पर्दे पर शानदार लगते हैं। एक्शन फिल्म की एक बड़ी खूबी है; बड़े पैमाने पर शूट किए गए एक्शन सीन यश की दमदार मौजूदगी से और भी असरदार बन गए हैं। बैकग्राउंड स्कोर एक्शन और ड्रामैटिक सीन के असर को और बढ़ाता है, जबकि सिनेमैटोग्राफी एक भव्य सिनेमैटिक दुनिया बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

फिल्म की लंबाई थोड़ी ज्यादा 

फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी 3 घंटे 14 मिनट की अवधि है। कहानी की रफ्तार कुछ हिस्सों में धीमी हो जाती है और कई सीन छोटे किए जा सकते थे। खासकर, शुरुआती हिस्से में किरदारों और दुनिया को स्थापित करने में थोड़ा ज्यादा समय लिया गया है। हालांकि, फिल्म की भव्यता, एक्शन सीन और यश की स्क्रीन प्रेजेंस इन कमियों की काफी हद तक भरपाई कर देती है। बेहतर एडिटिंग से फिल्म का कुल असर और भी बढ़ सकता था।

क्यों देख फिल्म Toxic

'टॉक्सिक' एक स्टाइलिश, भव्य और मनोरंजक गैंगस्टर एक्शन ड्रामा है, जो मुख्य रूप से यश की दमदार परफॉर्मेंस और फिल्म के शानदार विजुअल ट्रीटमेंट पर आधारित है। गीतू मोहनदास (Geethu Mohandas) ने पारंपरिक गैंगस्टर कहानियों से अलग एक दुनिया बनाने की कोशिश की है, जिसमें एक्शन को परिवार, रिश्तों, भरोसे और वफादारी जैसे इमोशनल विषयों के साथ खूबसूरती से जोड़ा गया है। फिल्म निश्चित रूप से लंबी है और कुछ हिस्सों में इसकी रफ्तार धीमी पड़ जाती है; हालांकि, बड़े पर्दे के लायक एक्शन, शानदार विजुअल्स और यश का जबरदस्त स्वैग इसे एक दमदार सिनेमैटिक अनुभव बनाते हैं। 'टॉक्सिक' यश के फैंस और बड़े पैमाने पर बनी एक्शन फिल्में पसंद करने वाले दर्शकों के लिए थिएटर में देखने लायक एक बेहतरीन फिल्म साबित होती है। 

अगर आपको मास अपील और एक्शन पसंद है, तो यह फिल्म आपके लिए हो सकती है, हालांकि कहानी में कई अप्रत्याशित मोड़ आते हैं। यश के दमदार एक्शन सीन और हवा में उड़ते हुए लोगों का नजारा निश्चित रूप से आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। क्लाइमेक्स बाकी कहानी से अलग है और दर्शकों को चौंका देता है, हालांकि शायद किरदारों के साथ बेहतर जुड़ाव बनाया जा सकता था। अगर आप यश और जबरदस्त एक्शन का मजा लेना चाहते हैं, तो Toxic को अपनी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल करें।

निर्देशक: गीतू मोहनदास
कलाकार: यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत
फिल्म अवधि: 3 घंटे 14 मिनट
 रेटिंग: 4/5 

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