Greg Chappell Article Vaibhav Sooryavanshi Batting : ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज कप्तान और धाकड़ बल्लेबाज ग्रेग चैपल ने आधुनिक टी20 क्रिकेट के मौजूदा स्वरूप और बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे को लेकर एक बेहद गंभीर और डराने वाली चेतावनी दी है। 'क्रिकइन्फो' (Cricinfo) में लिखे अपने हालिया तीखे लेख में चैपल ने साफ कहा है कि अगर खेल में तुरंत क्रांतिकारी बदलाव नहीं किए गए, तो गेंदबाजों का वजूद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। चैपल ने अपने इस विश्लेषण के केंद्र में भारत के नए सनसनीखेज खिलाड़ी को रखा है और बताया है कि कैसे वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी आज के दौर में गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ा काल बन चुकी है।
ग्रेग चैपल ने अपने लेख की शुरुआत हाल ही में संपन्न हुए आईपीएल सीजन के उस अजूबे से की है, जिसने वैश्विक क्रिकेट बिरादरी को हैरत में डाल दिया। महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने टूर्नामेंट पर सिर्फ अपनी छाप ही नहीं छोड़ी, बल्कि स्थापित गेंदबाजों के घमंड को चूर-चूर कर दिया। इस बाएं हाथ के युवा बल्लेबाज ने 237.3 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन कूटकर दुनिया के सबसे अत्याधुनिक गेंदबाजी आक्रमणों की धज्जियां उड़ा दीं। वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी के दौरान लगे रिकॉर्डतोड़ 72 छक्कों ने क्रिस गेल के एक सीजन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी बौना साबित कर दिया। यह एक ऐसा कारनामा है जो पारंपरिक क्रिकेट के हर लॉजिक को सीधी चुनौती देता है।
क्रिकइन्फो में चैपल लिखते हैं कि जब उन्होंने इस युवा खब्बू बल्लेबाज को आधुनिक बैटिंग को एक नए और अनसुने धरातल पर ले जाते देखा, तो इस आश्चर्यजनक चीज को देखने के साथ उनके मन में एक गहरा डर भी पैदा हुआ। चैपल के मुताबिक, आज क्रिकेट जगत के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है, क्या हम टी20 बैटिंग का एक शानदार विकास देख रहे हैं, या हम गेंद और बल्ले के बीच के मुकाबले को हमेशा के लिए दफन होते हुए देख रहे हैं?
ग्रेग चैपल ने माना कि वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी को करीब से देखने पर सबसे पहले उनकी तकनीकी आकर्षित करती है, जो उन्हें आधुनिक युग के केवल ताकत के दम पर शॉट खेलने वाले 'मसल्स-बाउंड' बल्लेबाजों से अलग बनाती है। उनके बल्ले का साफ और सहज स्विंग एक ऐसा संतुलन पैदा करता है जो क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों की याद दिलाता है। चैपल को उनके डाउनस्विंग और लाजवाब संतुलन में महान ग्रीम पोलक और अतुलनीय सर गारफील्ड सोबर्स की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। जब वह एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से शॉट लगाते हैं, तो उसमें ब्रायन लारा की सहज प्रतिभा और एडम गिलक्रिस्ट जैसी पहली ही गेंद से संहार करने वाली मानसिकता का मिश्रण दिखाई देता है।
चैपल ने लिखा, "यह आधुनिक हिंसा (आक्रामकता) के साथ इस्तेमाल की जा रही एक क्लासिक और शुद्ध पद्धति है, जो साबित करती है कि वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी खेल के लिए एक दुर्लभ उपहार है। हालांकि, इतनी कम उम्र में उनकी यह अभूतपूर्व सफलता खेल के मौजूदा ढांचे के लिए एक 'खतरे का अलार्म' भी है।"
चैपल ने इस बात पर भी जोर दिया कि वैभव आज भले ही सुर्खियों में हों, लेकिन वह एक ऐसी विकास प्रणाली का नवीनतम उदाहरण हैं जो क्रिकेट की अगली पीढ़ी को आकार दे रही है। यह परिणाम अचानक या संयोग से नहीं आए हैं। इसके पीछे राजस्थान रॉयल्स के जुबिन भरूचा जैसे दूरदर्शी संरक्षकों की कड़ी मेहनत और सोच है। भरूचा ने खेल की भविष्य की मांगों को पहले ही भांप लिया था। युवा क्रिकेटरों की पहचान करना, उन्हें निखारना और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करना भारतीय क्रिकेट में एक क्रांतिकारी योगदान है।
ग्रेग चैपल ने अपने लेख में इस विरोधाभास को उजागर किया कि यह बेहतरीन टैलेंट डेवलपमेंट सिस्टम एक ऐसे टी20 माहौल के भीतर काम कर रहा है जो संरचनात्मक रूप से पूरी तरह से बल्लेबाजों के पक्ष में झुका हुआ है। चैपल के अनुसार, यदि शारीरिक रूप से पूरी तरह विकसित न हुआ एक बच्चा वैश्विक मंच पर आकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशिष्ट गेंदबाजों को आसानी से बेअसर और अपमानित कर देता है, तो यह खेल के भीतर की एक गंभीर बीमारी को उजागर करता है। वैभव सूर्यवंशी उस खतरे की घंटी की तरह हैं जो दिखा रहे हैं कि आधुनिक माहौल को गेंदबाजों के अस्तित्व को मिटाने (विलुप्त करने) के लिए ही तैयार किया गया है।
हाइपर-इंजीनियर्ड बल्ला तकनीक, बेहद छोटी बाउंड्री और पूरी तरह से बेजान व सपाट पिचों ने खेल को बल्लेबाजों के पक्ष में इतनी बेरहमी से मोड़ दिया है कि अब गेंदबाजों के पास कोई रास्ता नहीं बचा है। चैपल चेतावनी देते हैं कि यह असंतुलन टी20 क्रिकेट को चौकों-छक्कों के एक उबाऊ, उचाट और मैकेनिकल लूप में बदलने का जोखिम पैदा करता है, जो अंततः खेल प्रेमियों को स्टेडियम से दूर कर देगा। किसी भी खेल का असली रोमांच जोखिम और अनिश्चितता में होता है, और जब वह जोखिम ही छीन लिया जाए, तो तमाशा अपनी चमक खो देता है। चैपल ने मशहूर क्रिकेट विश्लेषक जैरड किंबर के लेख का हवाला देते हुए कहा कि हम 21वीं सदी के एक ऐसे नाजुक मोड़ पर हैं जहां प्रशासकों को तय करना होगा कि क्या वे क्रिकेट के 250 साल के समृद्ध इतिहास को भुलाकर इसे बेसबॉल जैसा कोई एंटरटेनमेंट प्रोडक्ट बनाना चाहते हैं या खेल की आत्मा को बचाना चाहते हैं।
चैपल ने अपने लेख में नवंबर 1970 के एक ऐतिहासिक मुकाबले को याद किया, जब वह साउथ ऑस्ट्रेलिया के लिए वेस्ट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वाका (WACA) के मैदान पर खेल रहे थे। उस मैच के पहले ही दिन दक्षिण अफ्रीका के महान ओपनर बैरी रिचर्ड्स ने ग्राहम मैकेन्जी, टोनी लॉक और युवा डेनिस लिली जैसे घातक गेंदबाजों के सामने 300 से अधिक रन कूट दिए थे। उसी दिन ग्रेग के भाई इयान चैपल ने भी शानदार 129 रन बनाए थे। चैपल कहते हैं कि वह पारी मनोरंजक थी, लेकिन रिचर्ड्स गेंदबाजों के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
चैपल ने स्पष्ट किया कि 1970 और आज के दौर में जमीन-आसमान का अंतर है। रिचर्ड्स का वह कारनामा एक खतरनाक और जीवंत पिच पर विशुद्ध प्रतिभा का एक दुर्लभ चमत्कार था। लेकिन आज के आईपीएल ने उस तबाही का 'लोकतंत्रीकरण' (डेमोक्रेटाइजेशन) कर दिया है। आधुनिक टी20 के नियमों ने एक जादुई मास्टरक्लास को असेंबली-लाइन की उम्मीद में बदल दिया है। इस असंतुलन को आईपीएल के 'इम्पैक्ट प्लेयर' जैसे अदूरदर्शी नियम ने और संस्थागत बना दिया है। इस नियम ने बल्लेबाजी टीम को बिना किसी नुकसान के एक अतिरिक्त विशेषज्ञ बल्लेबाज का ऐशो-आराम दे दिया है, जिससे ऊपरी क्रम के बल्लेबाजों से विकेट गिरने का डर ही खत्म हो गया है और वे पहली गेंद से बिना किसी जिम्मेदारी के बल्ला घुमा रहे हैं।
क्रिकइन्फो के अपने लेख में ग्रेग चैपल ने साफ कहा कि जब भी अतीत में खेल का संतुलन बिगड़ा है, अधिकारियों ने नियम बदले हैं—चाहे वह बॉडीलाइन पर रोक हो या शॉर्ट-पिच की सीमा तय करना। अब समय आ गया है जब खेल के प्रशासकों को एक साहसिक और निर्णायक हस्तक्षेप करना होगा। खेल को बचाने के लिए चैपल ने निम्नलिखित क्रांतिकारी संरचनात्मक बदलावों को तुरंत लागू करने की मांग की है:
चैपल के अनुसार, इन बदलावों को लागू करने से मिडिल ओवर्स में रोमांच वापस आएगा, और प्लेसमेंट, विकेटों के बीच दौड़ तथा रक्षात्मक रणनीतिक जागरूकता का महत्व फिर से बढ़ेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि 160 रन का स्कोर भी एक तनावपूर्ण और रोमांचक शतरंज का खेल बने। चैपल ने चेतावनी भरे लहजे में अंत में लिखा कि हम वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी के रोमांच में इतने अंधे नहीं हो सकते कि खेल के सामने मौजूद अस्तित्व के खतरे को ही न देखें। यदि टी20 क्रिकेट को एकतरफा तमाशा बनने से बचना है, तो गेंद को भी समान अधिकार देना होगा। नियमों को बदलकर गेंदबाज को सशक्त करने से सूर्यवंशी जैसे सितारों की चमक कम नहीं होगी, बल्कि उनकी असली महानता तब सिद्ध होगी जब वे एक कठिन चुनौती को पार करके रन बनाएंगे।
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