25 मार्च 1992 वर्ल्ड कप फाइनल: जब इमरान के 'टाइगर्स' ने मेलबर्न में रचा था इतिहास
खबर सार :-
25 मार्च 1992 को मेलबर्न में इमरान खान के 'कॉर्नर्ड टाइगर्स' ने इंग्लैंड को हराकर इतिहास रचा था। पढ़ें उस ऐतिहासिक जीत और वसीम अकरम के जादुई स्पेल की पूरी कहानी।
खबर विस्तार : -
आज 25 मार्च है, क्रिकेट के इतिहास का वो सुनहरा पन्ना जब पाकिस्तान ने पहली बार विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया था। साल 1992 के विश्व कप फाइनल में इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी टीम ने इंग्लैंड को हराकर लॉर्ड्स के सपनों को मेलबर्न की रोशनी में दफन कर दिया था।
मेलबर्न की वो शाम और इमरान खान का दांव
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) की दुधिया रोशनी में जब फाइनल शुरू हुआ, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि टूर्नामेंट में शुरुआती हार झेलने वाली टीम 'विश्व विजेता' बनकर उभरेगी। कप्तान इमरान खान ने अपनी टीम को 'कॉर्नर्ड टाइगर्स' (कोने में फंसा हुआ शेर) का नाम दिया था, जिसे दुनिया ने उस दिन दहाड़ते हुए देखा। इमरान खान की किस्मत ने भी उस दिन साथ दिया। मैच के शुरुआती दौर में जब इमरान क्रीज पर आए, तब इंग्लैंड के कप्तान ग्राहम गूच ने उनका एक आसान सा कैच छोड़ दिया। यह जीवनदान मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
जावेद मियांदाद और जीवनदान की कहानी
मैच में एक और बड़ा विवाद और रोमांच तब जुड़ा जब डेरेक प्रिंगल की एक गेंद पर जावेद मियांदाद काफी करीब (LBW) पाए गए थे। हालांकि, अंपायर का फैसला मियांदाद के पक्ष में रहा। इमरान खान और जावेद मियांदाद की उस अहम साझेदारी ने पाकिस्तान को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाने में मदद की, जिसने मैच की नींव रखी। "इमरान खान का वह विजन और टीम पर अटूट भरोसा ही था जिसने एक हारती हुई टीम को चैंपियन बना दिया।"
वसीम अकरम: वो दो गेंदे जिन्होंने मैच पलट दिया
इस फाइनल मुकाबले को अगर किसी एक गेंदबाज के लिए याद किया जाता है, तो वह हैं सुल्तान ऑफ स्विंग— वसीम अकरम। जब इंग्लैंड की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए मजबूत स्थिति में दिख रही थी, तब अकरम ने अपनी जादुई गेंदबाजी का प्रदर्शन किया।
अकरम का घातक स्पेल
वसीम अकरम ने दो ऐसी लगातार गेंदों का इस्तेमाल किया जिसने मैच का रुख पाकिस्तान की तरफ मोड़ दिया:
- एलन लैम्ब का विकेट: एक तेज इन-स्विंगर जिसने लैम्ब के डंडे बिखेर दिए।
- क्रिस लुईस का विकेट: अगली ही गेंद पर लुईस को क्लीन बोल्ड कर अकरम ने इंग्लैंड की कमर तोड़ दी।
इन दो गेंदों ने इंग्लैंड की उम्मीदों को पूरी तरह खत्म कर दिया और पाकिस्तान जीत की दहलीज पर खड़ा हो गया।
पाकिस्तान का सबसे यादगार पल
25 मार्च 1992 की वह जीत महज एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि इमरान खान के क्रिकेट करियर का शिखर और पाकिस्तान क्रिकेट के लिए एक नया सवेरा था। मेलबर्न के मैदान पर खिलाड़ियों के आंसू और समर्थकों का जोश आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है।
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