सोनिया गांधी का बड़ा बयान: इतिहास डॉ. मनमोहन सिंह को एक शांत और बेहद अहम प्रधानमंत्री के रूप में रखेगा याद

खबर सार :-

सोनिया गांधी ने कहा कि इतिहास पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक शांत और अहम प्रधानमंत्री के रूप में याद रखेगा। जानिए पूरी खबर।
इतिहास के पन्नों में : मनमोहन सिंह की विदाई और सोनिया गांधी का राजनीतिक वार

खबर विस्तार : -

New Delhi :भारतीय राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बार फिर से पिछले दशक की यादें ताजा हो गईं हैं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल और उनके खिलाफ चले लंबे राजनीतिक षड्यंत्र को लेकर एक तीखा और बेबाक लेख लिखा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने कोल ब्लॉक आवंटन मामले में डॉ. सिंह को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल उठाने वाले ट्रायल कोर्ट को कड़ी फटकार लगाई है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह लेख महज एक श्रद्धांजलि या समर्थन पत्र नहीं है, बल्कि यह मौजूदा सत्ता के तौर-तरीकों पर एक सुनियोजित वैचारिक प्रहार है। सोनिया गांधी ने बहुत ही बेबाकी से यह साबित करने की कोशिश की है कि वक्त के साथ सच की जीत होती है और झूठे आरोप खुद-ब-खुद दम तोड़ देते हैं।

एक दशक पुराना कलंक और अदालती क्लीन चिट

अपने हालिया आलेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि कैसे एक सोची-समझी रणनीति के तहत डॉ. मनमोहन सिंह की छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया था। नौकरशाही से लेकर मीडिया और राजनीतिक दलों तक ने मिलकर एक ऐसा माहौल बनाया मानो देश का सबसे बड़ा घोटाला उन्हीं के कार्यकाल में हुआ हो। लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह में आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने उन तमाम हवा हवाई हवाओं का रुख बदल दिया। सोनिया गांधी ने अपने इस लेख के जरिए देश की जनता को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि कैसे एक शांत और सौम्य राजनेता को जानबूझकर राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाया गया। अदालत से मिली इस क्लीन चिट ने उन सभी आरोपों को नेस्तनाबूद कर दिया जो कभी विपक्ष में बैठे नेताओं द्वारा उछाले गए थे।

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आर्थिक सुधार और सामाजिक अधिकारों का स्वर्णिम काल

केवल भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी होना ही मनमोहन सिंह के कार्यकाल की एकमात्र उपलब्धि नहीं थी। उनके प्रधानमंत्री रहते देश ने अभूतपूर्व आर्थिक तरक्की देखी। वैश्विक मंदी के दौर में भी भारतीय अर्थव्यवस्था चट्टान की तरह मजबूत खड़ी रही। इतना ही नहीं, यूपीए सरकार के उन दस सालों में देश को कई ऐतिहासिक और क्रांतिकारी अधिकार मिले जिन्होंने आम आदमी की जिंदगी बदल दी। सूचना का अधिकार यानी आरटीआई, शिक्षा का अधिकार और मनरेगा जैसी योजनाओं ने समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को ताकतवर बनाया। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि आज भले ही वर्तमान सरकार इन योजनाओं में फेरबदल कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी सार्थकता को नकारा नहीं जा सकता। स्वतंत्र मीडिया, मुखर नागरिक समाज और संसद के प्रति जवाबदेही उस दौर की असली पहचान थी, जो आज के समय में लगभग गायब सी नजर आती है।

लोकतंत्र की घटती साख और वर्तमान राजनीति पर सवाल

लेख का सबसे तीखा हिस्सा वह है जिसमें मौजूदा राजनीतिक संस्कृति और प्रशासनिक प्रणाली की तुलना यूपीए काल से की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसियों के बेजा इस्तेमाल और विपक्षी नेताओं पर बनाए जा रहे दबाव का जिक्र करते हुए यह साफ किया गया है कि आज किस तरह भय और खामोशी का माहौल तैयार किया जा रहा है। संसद के भीतर अमर्यादित टिप्पणियों से लेकर संवादहीनता के मौजूदा दौर तक, हर एक पहलू पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। लोकतंत्र के जिन स्तंभों को मजबूत करने में डॉ. मनमोहन सिंह ने अपना पूरा जीवन खपा दिया, आज उन्हीं संस्थाओं की कमजोर स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अंततः यह लेख इस बात की तस्दीक करता है कि राजनीति में शोरगुल भले ही कुछ समय के लिए सच को दबा दे, लेकिन इतिहास हमेशा शांत और गंभीर प्रयासों को ही याद रखता है।

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