स्कूलों में जंक फूड पर अब और अधिक सख्ती की तैयारी: खाद्य पदार्थों में तय होगी फैट, शुगर और नमक की सीमा

खबर सार :-

प्रस्तावित सीमाएं लागू होने के बाद स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले खाद्य विकल्पों की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत हो सकती है। हालांकि अंतिम नियम जारी होने से पहले हितधारकों की राय और आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। एफएसएसएआई की पहल का उद्देश्य बच्चों को अधिक संतुलित भोजन उपलब्ध कराना और ज्यादा वसा, चीनी तथा नमक वाले उत्पादों की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
स्कूलों में जंक फूड पर FSSAI का  शिकंजा!

खबर विस्तार : -

FSSAI New Regulations: बच्चों की थाली से जंक फूड का दबदबा घटाने की तैयारी तेज हो गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने स्कूलों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के लिए अतिरिक्त वसा, चीनी और नमक की मात्रा पर नई सीमाएं प्रस्तावित की हैं। मसौदा नियम लागू होने पर तय सीमा से ज्यादा फैट, शुगर या सोडियम वाले उत्पादों की पहचान आसान होगी और कड़ी निगरानी बढ़ेगी।

स्कूलों में जंक फूड पर कसने वाला है शिकंजा

बच्चों के स्वास्थ्य और संतुलित खानपान को ध्यान में रखते हुए एफएसएसएआई ने स्कूलों में उपलब्ध खाद्य पदार्थों को लेकर नियमों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खाद्य नियामक ने ऐसे उत्पादों की पहचान के लिए स्पष्ट मात्रात्मक मानक प्रस्तावित किए हैं, जिनमें अतिरिक्त वसा, चीनी या नमक की मात्रा अधिक है। भारत के राजपत्र में प्रकाशित ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, एफएसएसएआई ने 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) विनियम, 2020' में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन को ज्यादा पौष्टिक बनाना और अधिक अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता पर नियंत्रण बढ़ाना है।

डायटरी गाइडलाइंस को बनाया आधार

प्रस्तावित बदलावों के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की 'डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस-2024' को आधार बनाया गया है। इसके तहत खाद्य उत्पादों में अतिरिक्त फैट, चीनी और सोडियम की मात्रा के लिए निश्चित सीमा तय की जाएगी। नए मानकों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किस खाद्य पदार्थ को 'हाई फैट', 'हाई शुगर' या 'हाई सोडियम' श्रेणी में रखा जाएगा। इससे स्कूलों और संबंधित अधिकारियों के लिए ऐसे उत्पादों की पहचान और निगरानी करना आसान हो सकेगा।

FSSAI-Children's diet-Junk food

100 ग्राम ठोस खाद्य पदार्थ में 4.2 ग्राम से ज्यादा फैट तो 'हाई फैट'

एफएसएसएआई के प्रस्ताव के अनुसार, किसी ठोस खाद्य पदार्थ में अगर प्रति 100 ग्राम 4.2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा मौजूद है, तो उसे 'हाई फैट' श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं तरल खाद्य पदार्थों के लिए अतिरिक्त वसा की प्रस्तावित सीमा 1.5 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर है। इसका सीधा असर उन खाद्य उत्पादों पर पड़ सकता है, जिनमें फैट की मात्रा अधिक होती है। स्कूल परिसरों में ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और बिक्री की निगरानी के लिए प्रस्तावित मानक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ज्यादा चीनी वाले उत्पाद भी आएंगे दायरे में

अतिरिक्त चीनी को लेकर भी एफएसएसएआई ने स्पष्ट सीमा प्रस्तावित की है। मसौदे के मुताबिक, ठोस खाद्य पदार्थों में 3 ग्राम प्रति 100 ग्राम से अधिक अतिरिक्त चीनी होने पर उसे 'हाई शुगर' श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं तरल खाद्य पदार्थों के लिए यह सीमा 2 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर तय की गई है। यानी निर्धारित मात्रा से ज्यादा अतिरिक्त चीनी वाले पेय और अन्य तरल खाद्य उत्पाद भी प्रस्तावित मानकों के दायरे में आएंगे।

नमक और सोडियम पर भी तय होगा मानक

बच्चों के खानपान में नमक की अधिक मात्रा को लेकर भी नियामक ने सीमा प्रस्तावित की है। ड्राफ्ट के अनुसार, यदि किसी ठोस खाद्य पदार्थ में 0.625 ग्राम से अधिक नमक प्रति 100 ग्राम पाया जाता है, तो उसे 'हाई सोडियम' श्रेणी में रखा जाएगा। तरल खाद्य पदार्थों के लिए यह सीमा 0.175 ग्राम नमक प्रति 100 मिलीलीटर प्रस्तावित की गई है। इस प्रावधान से स्कूलों में बिकने वाले ऐसे खाद्य पदार्थों की पहचान संभव होगी, जिनमें नमक या सोडियम की मात्रा निर्धारित स्तर से अधिक है।

स्कूलों में निगरानी और निरीक्षण होगा मजबूत

प्रस्तावित नया प्रावधान स्कूलों में खाद्य पदार्थों की निगरानी और निरीक्षण से जुड़े मौजूदा नियमों के बाद जोड़ा जाएगा। इससे स्कूल परिसरों में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और पोषण स्तर का आकलन करने के लिए एक स्पष्ट आधार मिल सकता है। नियमों का मकसद केवल खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को बेहतर और संतुलित भोजन विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में व्यवस्था को मजबूत करना भी है। इससे स्कूलों में भोजन संबंधी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

FSSAI New Rules-School junk food-Food safety

अभी मसौदा है, अंतिम नियम नहीं

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि ये प्रस्तावित नियम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के प्रावधानों के तहत तैयार किए गए हैं और इन्हें केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त है। हालांकि फिलहाल ये अंतिम नियम नहीं हैं। खाद्य नियामक ने आम जनता, खाद्य उद्योग, स्कूलों और अन्य संबंधित हितधारकों से मसौदे पर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। अधिसूचना के सार्वजनिक होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां भेजी जा सकती हैं।

सुझावों के बाद होगा अंतिम फैसला

एफएसएसएआई के मुताबिक, तय अवधि में प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ही अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। यानी प्रस्तावित सीमाओं में हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर बदलाव की संभावना बनी हुई है। बच्चों में असंतुलित खानपान की आदतों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह प्रस्ताव स्कूलों में उपलब्ध खाद्य विकल्पों को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। खास तौर पर ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले उत्पादों की पहचान के लिए पहली बार स्पष्ट मात्रात्मक सीमाएं लागू करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1. स्कूलों में जंक फूड को लेकर FSSAI ने क्या प्रस्ताव दिया है?

FSSAI ने स्कूलों में मिलने वाले खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त वसा, चीनी और नमक की मात्रा के लिए नई सीमाएं प्रस्तावित की हैं।

2. हाई फैट खाद्य पदार्थ की सीमा क्या होगी?

ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 4.2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा और तरल खाद्य पदार्थ में 100 मिलीलीटर पर 1.5 ग्राम से अधिक वसा होने पर उसे हाई फैट माना जाएगा।

3. हाई शुगर की सीमा कितनी तय की गई है?

ठोस खाद्य पदार्थों के लिए अतिरिक्त चीनी की सीमा 3 ग्राम प्रति 100 ग्राम और तरल उत्पादों के लिए 2 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर प्रस्तावित है।

4. क्या ये नियम अभी लागू हो गए हैं?

नहीं। ये फिलहाल मसौदा नियम हैं। FSSAI ने जनता, स्कूलों और खाद्य उद्योग से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

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