समुद्र मंथन योजना: घटेगी तेल-गैस आयात पर निर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा, जानिए क्या है सरकार की मंशा?
खबर सार :-
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दे दी है। सरकार को उम्मीद है कि यह मिशन भारत को ऊर्जा क्षेत्र में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाएगा और साथ ही वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में उसकी रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगा।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: केंद्र सरकार की नई 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण योजना भारत को दीर्घकाल में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से गहरे समुद्री (डीपवॉटर) क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज तथा उत्पादन को नई गति मिलेगी। बेहतर भू-वैज्ञानिक डेटा, जोखिम साझा करने की व्यवस्था, साझा बुनियादी ढांचे और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं के विकास के जरिए देश में एक मजबूत ऑफशोर ऊर्जा इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गति मिलेगी।
आयात पर निर्भरता कम होने से देश को फायदा
मंत्रालय के अनुसार, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है, जबकि घरेलू उत्पादन अभी भी कुल मांग का सीमित हिस्सा ही पूरा कर पाता है। इसके कारण देश को अपनी आवश्यकताओं का बड़ा भाग आयात करना पड़ता है। भारत का वार्षिक कच्चा तेल आयात बिल लगभग 144 अरब डॉलर (करीब 13 लाख करोड़ रुपये) है। मंत्रालय का कहना है कि हाल के वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षित और निर्बाध उपलब्धता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास, शहरीकरण, परिवहन और ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण देश की तेल और गैस की खपत लगातार बढ़ेगी। ऐसे में घरेलू स्तर पर अन्वेषण और उत्पादन को बढ़ावा देना न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों को मिलेगा प्रोत्साहन
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के लिए 84,084 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसे वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी ऑफशोर तेल एवं गैस अन्वेषण मिशन है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्री क्षेत्रों में संभावित हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दोहन करना है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक के दौरान किए गए व्यापक ऊर्जा क्षेत्र सुधारों का अगला चरण है। इसका उद्देश्य नीतिगत सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाना तथा ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना है।
सरकार ने वर्ष 2014 के बाद हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार किए हैं। इनमें पहले प्रतिबंधित माने जाने वाले 99 प्रतिशत से अधिक 'नो-गो' क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए खोलना शामिल है। इस फैसले से पहली बार भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में तेल और गैस की खोज का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाएं मौजूद हैं।
रेगुलेटरी ढांचा विकसित करने पर जोर
इसके साथ ही सरकार ने पारंपरिक प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) व्यवस्था की जगह रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (RSC) प्रणाली लागू की है। मंत्रालय के अनुसार, नई व्यवस्था से कर एवं राजस्व ढांचा अधिक सरल, पारदर्शी और प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त हुआ है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और घरेलू तथा विदेशी कंपनियों के लिए अन्वेषण परियोजनाओं में निवेश करना अधिक आकर्षक बनेगा।
सरकार ने कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए भी कदम उठाए हैं। 'ऑयलफील्ड्स (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) अमेंडमेंट एक्ट, 2025' के जरिए कॉन्ट्रैक्ट में स्थिरता बनाए रखने, इंटीग्रेटेड पेट्रोलियम ऑपरेशन्स को मान्यता देने, विवाद सुलझाने के तरीकों को मजबूत करने और एक आधुनिक रेगुलेटरी ढांचा विकसित करने पर खास जोर दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रोजेक्ट को लागू करने में तेजी आएगी और निवेशकों को लंबे समय तक पॉलिसी में स्थिरता का भरोसा मिलेगा।
इसी संदर्भ में, 'पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रूल्स, 2025' पेश किए गए हैं। इनका मकसद 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (कारोबार में आसानी) को बढ़ाना, रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को ज्यादा असरदार बनाना और पेट्रोलियम लीज से जुड़ी व्यवस्थाओं को आसान बनाना है। सरकार ने सभी तरह के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए 'एम्पावर्ड कमिटी ऑफ़ सेक्रेटरीज' (सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति) के गठन और अधिकारों को भी एक जैसा कर दिया है, ताकि सभी कंपनियों को - चाहे उनके कॉन्ट्रैक्ट कभी भी हुए हों - निष्पक्ष और समान अवसर मिल सकें।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
मंत्रालय ने यह भी बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों - ONGC और ऑयल इंडिया - के परफॉर्मेंस मूल्यांकन (कामकाज के आकलन) के मानदंडों में बदलाव किया गया है। आगे चलकर, इन कंपनियों के मूल्यांकन के दौरान तेल और गैस की खोज (एक्सप्लोरेशन) से जुड़ी गतिविधियों को ज्यादा महत्व दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज और विकास में तेजी आएगी और घरेलू उत्पादन के जरिए देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
जानकारों का मानना है कि अगर 'समुद्र मंथन' योजना को तय समय-सीमा के भीतर सही ढंग से लागू किया जाता है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे न केवल गहरे समुद्र में मौजूद तेल और गैस के भंडार का दोहन बढ़ेगा, बल्कि ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, रोजगार पैदा होंगे, तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और ऊर्जा सुरक्षा को लंबे समय के लिए मजबूती मिलेगी।
FAQ
1. समुद्र मंथन योजना क्या है?
समुद्र मंथन केंद्र सरकार की राष्ट्रीय अपतटीय (ऑफशोर) तेल एवं गैस अन्वेषण योजना है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन को बढ़ावा देना है।
2. समुद्र मंथन योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
योजना का प्रमुख उद्देश्य कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
3. समुद्र मंथन योजना के लिए कितना बजट निर्धारित किया गया है?
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 84,084 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
4. योजना कब तक लागू रहेगी?
समुद्र मंथन योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाएगा।
यह भी पढ़ेंः-पीएम-किसान योजना नहीं होगी बंद, 2031 तक जारी रखने का फैसला, महिला किसानों को भी मिल रहा लाभ
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