पीएम श्री योजना: शिक्षा के नए युग की शुरूआत, 20 लाख से अधिक छात्रों को मिलेगा लाभ

खबर सार :-

प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना का उद्देश्य 14,500 से अधिक मॉडल स्कूलों का विकास कर 21वीं सदी के कौशल से लैस करना है। यह योजना 2022-27 तक लगभग 27,360 करोड़ रुपये की लागत से लागू की जा रही है।
पीएम श्री योजना: 13,092 स्कूलों का चयन, लाखों छात्रों को होगा फायदा

खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः भारत सरकार ने 7 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देशभर के स्कूलों का कायाकल्प कर उन्हें उत्कृष्ट मॉडल स्कूलों में परिवर्तित करना है। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरूप है और 2022 से 2027 के बीच पांच वर्षों में लागू की जा रही है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य 14,500 से अधिक स्कूलों को उत्कृष्टता के मानकों पर खड़ा करना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, आधुनिक अवसंरचना और समावेशी माहौल मिल सके।

27,360 करोड़ रुपये का बजट

प्रधानमंत्री श्री योजना का उद्देश्य सिर्फ शिक्षण संस्थानों का विकास ही नहीं, बल्कि भारत में शिक्षा के दृष्टिकोण को पूरी तरह से बदल देना है। यह योजना छात्रों को 21वीं सदी के कौशल, जैसे कि डिजिटल साक्षरता, क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या समाधान, और सामाजिक-भावनात्मक कौशल से लैस करने पर केंद्रित है। साथ ही, यह योजना स्कूलों में शारीरिक अवसंरचना, शिक्षण संसाधनों, समावेशी वातावरण, और टिकाऊ विकास के पहलुओं को भी मजबूत बनाती है।

इस योजना के लिए कुल 27,360 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है, जिसमें से केंद्र सरकार का हिस्सा 18,128 करोड़ रुपये है। योजना के पहले वर्ष में, 2022-23 में, खर्च का आवंटन 2,520 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 तक बढ़कर 5,224 करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 107 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को प्राथमिकता दे रही है। इस वित्तीय ताकत से न केवल स्कूलों का कायाकल्प संभव हो रहा है, बल्कि शिक्षकों के प्रशिक्षण, डिजिटल अवसंरचना, और छात्रवृत्ति योजनाओं में भी वृद्धि हो रही है।

13,092 स्कूलों का किया चयन 

जुलाई 2026 तक, योजना के लगभग 90 प्रतिशत लक्ष्यों को पूरा करते हुए, 13,092 स्कूलों का चयन किया जा चुका है। इनमें केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस), और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों का चयन तीन चरणीय ‘चैलेंज मोड’ प्रक्रिया के माध्यम से किया गया, जो गुणवत्ता मानकों पर आधारित है। इस प्रक्रिया में स्कूलों का मूल्यांकन उनकी बुनियादी सुविधाओं, शिक्षण गुणवत्ता, समावेशिता और स्थिरता के आधार पर किया गया है। इस नेटवर्क का विस्तार पूरे भारत में हुआ है, जिसमें 725 जिलों और 8,340 ब्लॉक/शहरी निकायों को शामिल किया गया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि शिक्षा का लाभ दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों तक भी पहुंचे। इस विस्तृत नेटवर्क में प्राइमरी, अपर प्राइमरी, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। 

छात्रों को दी जाएंगी आधुनिक सुविधाएं

यह योजना भारत के विविध सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इसमें 1,305 प्राइमरी स्कूल, 3,102 अपर प्राइमरी स्कूल, 3,141 माध्यमिक स्कूल और 5,544 उच्चतर माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें 80 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी), 913 केवीएस स्कूल, 620 एनवीएस स्कूल और 4 एनसीईआरटी स्कूल भी शामिल हैं। इससे यह साबित होता है कि योजना न केवल शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार कर रही है बल्कि महिलाओं और वंचित वर्गों के छात्रों के लिए भी विशेष ध्यान दे रही है।

पीएम श्री योजना के तहत चुने गए स्कूलों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण संसाधन, स्मार्ट क्लासरूम, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसमें शिक्षकों का प्रशिक्षण, संसाधनों का अद्यतन, और समावेशी शिक्षण की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे छात्रों को न केवल अकादमिक बल्कि सामाजिक और भावनात्मक विकास का भी अवसर मिल रहा है।

कई चुनौतियां भी आ रहीं सामने

यह योजना टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल स्कूल बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसमें ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, और स्थायी भवन निर्माण जैसी पहलें शामिल हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण संभव हो रहा है, बल्कि स्कूल सुविधाओं की दीर्घकालीन स्थिरता भी सुनिश्चित हो रही है। योजना बहुत ही महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए कई चुनौतियों का सामना भी है। इनमें स्कूलों में उचित संसाधनों का अभाव, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, और भौगोलिक बाधाएं शामिल हैं। इन चुनौतियों का समाधान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, वित्तीय सहायता, और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की योजना बनाई है।

पीएम श्री योजना का उद्देश्य भारत को विश्वस्तरीय शिक्षण केंद्र बनाना है, जहां हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। यह योजना न केवल स्कूलों का कायाकल्प कर रही है, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 

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