ईडी की बड़ी कार्रवाई: बैंक ऑफ बड़ौदा से 255.74 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में 11 ठिकानों पर छापेमारी
खबर सार :-
ईडी ने बैंक ऑफ बड़ौदा से 255.74 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अलफारा इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े मुंबई-दिल्ली के 11 ठिकानों पर छापेमारी की।
खबर विस्तार : -
मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक ऑफ बड़ौदा से कथित तौर पर 255.74 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने अलफारा इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एआईपीएल), उसके निदेशकों और करीबी सहयोगियों से जुड़े मुंबई और दिल्ली के 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी की मुंबई जोनल कार्यालय-1 ने 10 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की।
ईडी की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की आर्थिक अपराध शाखा, चेन्नई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। यह एफआईआर बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर दर्ज की गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, मामला सिविल निर्माण क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी एआईपीएल द्वारा बैंक से ली गई क्रेडिट सुविधाओं और कथित तौर पर उनकी अनियमितता से जुड़ा है।
2012 में 103 करोड़ की क्रेडिट सुविधा
ईडी के अनुसार, एआईपीएल ने वर्ष 2012 में बैंक ऑफ बड़ौदा से करीब 103 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा हासिल की थी। बाद में वर्ष 2015 में इस सुविधा को बढ़ाकर 360.50 करोड़ रुपये कर दिया गया। हालांकि, कंपनी के वित्तीय दायित्वों के पूरा नहीं होने के बाद 18 जून 2018 को उसका बैंक खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। उस समय बैंक का बकाया करीब 255.74 करोड़ रुपये बताया गया था। जांच में ईडी को प्रथम दृष्टया पता चला कि करीब 75.02 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) डिवॉल्व हुए, जबकि लगभग 164.59 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी (बीजी) इनवोक की गई। एजेंसी के मुताबिक, इन लेनदेन से अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई।
कई कंपनियों के जरिए धन को घुमाने का आरोप
ईडी का आरोप है कि अपराध से अर्जित धन का एक बड़ा हिस्सा विभिन्न लाभार्थी और बिचौलिया कंपनियों के माध्यम से कई स्तरों पर ट्रांसफर किया गया। इसके बाद कथित तौर पर यह रकम दोबारा एआईपीएल और उसकी समूह कंपनियों तक पहुंचाई गई। जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत और उसके अंतिम इस्तेमाल को छिपाना था।
जांच के दौरान विदेशी लेनदेन भी एजेंसी के रडार पर आए। ईडी के अनुसार, एआईपीएल ने ग्लेज्ड टाइल्स के निर्यात के नाम पर विदेशी बैंक गारंटी खुलवाई, लेकिन वास्तव में संबंधित निर्यात नहीं किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए सिंगापुर और हांगकांग स्थित विदेशी कंपनियों को धन भेजा गया। बाद में संबंधित एलसी और बैंक गारंटी का भुगतान नहीं किया गया, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर हेरफेर की गई रकम किन-किन कंपनियों और व्यक्तियों के जरिए आगे बढ़ाई गई तथा उसका अंतिम लाभार्थी कौन था।
छापेमारी में नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने 18 लाख रुपये की नकदी के अलावा 9,567 अमेरिकी डॉलर और 860 क्वाचा विदेशी मुद्रा जब्त की। एजेंसी ने करीब 1.02 करोड़ रुपये की एफडी भी फ्रीज की है। इसके साथ ही लगभग 1.75 करोड़ जापानी येन और 1,03,145 अमेरिकी डॉलर की जमा राशि पर भी रोक लगाई गई है। ईडी ने परिसरों की तलाशी के दौरान बैंक लेनदेन, लेटर ऑफ क्रेडिट, बैंक गारंटी और आरोपियों से जुड़ी अचल संपत्तियों से संबंधित कई दस्तावेज बरामद किए। इसके अलावा डिजिटल उपकरण और अन्य रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं।
एजेंसी के मुताबिक, जब्त किए गए दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क तथा अपराध से अर्जित आय के वित्तीय प्रवाह को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ईडी अब इन रिकॉर्ड की जांच कर कथित धन शोधन की पूरी श्रृंखला और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं की भूमिका का पता लगा रही है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। तलाशी के दौरान सामने आए वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
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