BRICS Summit: पहलगाम हमले की निंदा से SU-57 तक, भारत ने रूस-चीन के बीच साधा रणनीतिक संतुलन
खबर सार :-
BRICS Summit में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा, रूस से रक्षा सहयोग और चीन के साथ LAC पर शांति के मुद्दे पर भारत की रणनीति को डिफेंस एक्सपर्ट पीके सहगल ने बड़ी उपलब्धि बताया।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः BRICS Summit के दौरान भारत ने कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाया गया और पहलगाम आतंकी हमले की निंदा को सबसे अहम बिंदुओं में माना गया। खास बात यह रही कि इस घोषणा के दौरान चीन भी BRICS का हिस्सा था। सेवानिवृत्त मेजर जनरल और डिफेंस एक्सपर्ट पीके सहगल ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता करार दिया है।
पीके सहगल के मुताबिक भारत ने BRICS के मंच पर जिस तरह अपनी बात रखी, वह किसी सामान्य उपलब्धि से कहीं बड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया, विशेष रूप से पश्चिमी देशों को यह संदेश दिया है कि वह अमेरिका, रूस, चीन और ईरान जैसे अलग-अलग रणनीतिक ध्रुवों वाले देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना संवाद कर सकता है।
आतंकवाद पर भारत को मिली बड़ी कूटनीतिक सफलता
डिफेंस एक्सपर्ट ने संयुक्त घोषणा में आतंकवाद के मुद्दे को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, घोषणा में किसी देश का नाम लिए बिना पहलगाम हिंसा की निंदा की गई, लेकिन सभी जानते थे कि संकेत किस घटना और किस संदर्भ की ओर था। उन्होंने कहा कि BRICS जैसे मंच पर, जहां चीन भी मौजूद था, आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ स्पष्ट रुख सामने आना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। घोषणा में इस बात पर जोर दिया गया कि आतंकवाद की आलोचना उसके स्रोत या उसके पीछे बताई जाने वाली वजह के आधार पर नहीं होनी चाहिए और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। सहगल के मुताबिक इससे भारत की उस लंबे समय से चली आ रही दलील को मजबूती मिलती है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक तर्क के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
चीन के साथ तनाव के बीच रणनीतिक संतुलन
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को भी रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। सहगल के अनुसार, बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक भारत एक तरफ चीन के साथ सीमा पर अपनी सुरक्षा चिंताओं को स्पष्ट कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ संवाद के रास्ते भी खुले रख रहा है। यह भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें प्रतिस्पर्धा और सहयोग के बीच संतुलन कायम रखने की कोशिश की जा रही है।
रूस के साथ रक्षा सहयोग में बदलाव
रूस के साथ भारत के रक्षा संबंधों को लेकर भी सहगल ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का जिक्र किया। उनके अनुसार भारत अब केवल विक्रेता और खरीदार के पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं रहना चाहता। भारत का जोर 'मेक इन इंडिया' और संयुक्त उत्पादन पर है। रक्षा क्षेत्र में भारत की प्राथमिकता ऐसी तकनीक और उत्पादन क्षमता हासिल करना है, जिससे आने वाले दशकों में देश अपनी सैन्य जरूरतों को अधिक आत्मनिर्भर तरीके से पूरा कर सके। सहगल ने रूस से जुड़े तीन प्रमुख रक्षा प्रस्तावों का उल्लेख किया। पहला है SU-30 लड़ाकू विमानों का व्यापक अपग्रेड। उनके अनुसार इस कार्यक्रम पर करीब 11 अरब डॉलर खर्च किए जाने की बात है और इससे विमान अगले 20 से 30 वर्षों तक उपयोगी बने रह सकते हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा रूस का SU-57 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर है। सहगल के मुताबिक रूस भारत को इस विमान की पेशकश कर रहा है और तकनीक हस्तांतरण की भी बात है। हालांकि असली सवाल यह है कि रूस भारत को कितनी तकनीक ट्रांसफर करेगा। भारत चाहता है कि विमान के रखरखाव और मरम्मत से लेकर उसकी तकनीकी जरूरतों का बड़ा हिस्सा देश में ही पूरा किया जा सके। उन्होंने बताया कि भारत अपनी जरूरतों के अनुरूप रडार और सेंसर को विमान में इंटीग्रेट करना चाहता है और इसके लिए आवश्यक तकनीकी पहुंच महत्वपूर्ण होगी। रूस तत्काल दो स्क्वाड्रन उपलब्ध कराने को तैयार बताया जा रहा है, जबकि बाकी तीन-चार स्क्वाड्रनों पर भारत में संयुक्त रूप से काम करने की संभावना पर चर्चा है। तीसरी प्राथमिकता लंबी दूरी की मिसाइल है। सहगल के मुताबिक भारत रूस से करीब 350 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइल भी चाहता है।
भारत की बदलती रक्षा रणनीति
सहगल के मुताबिक इन सभी घटनाक्रमों को एक साथ देखने पर भारत की बदलती रक्षा रणनीति साफ दिखाई देती है। भारत रूस के साथ अपने पुराने रक्षा संबंधों को बनाए रखते हुए अब तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त उत्पादन और घरेलू क्षमता निर्माण पर ज्यादा जोर दे रहा है। वहीं चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत संवाद और सुरक्षा, दोनों मोर्चों पर अपनी स्थिति बनाए रखना चाहता है। BRICS के मंच पर आतंकवाद के खिलाफ साझा भाषा तैयार करना और प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ समानांतर संवाद जारी रखना इसी रणनीतिक संतुलन का हिस्सा माना जा सकता है। पीके सहगल के अनुसार भारत ने BRICS Summit में जो हासिल किया, उसकी तुलना किसी सामान्य कूटनीतिक उपलब्धि से नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक यह भारत की बढ़ती रणनीतिक स्वायत्तता का उदाहरण है—एक ऐसा देश जो अमेरिका, रूस, चीन और ईरान से अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए बातचीत करने की क्षमता रखता है।
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