बांध-झील और सिंचाई से लेकर डिजिटल इंडिया तक,जानें इंजीनियरों के दम पर कैसे बदल रहा है नया भारत
खबर सार :-
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का नाम भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। देश के सबसे महान इंजीनियर सर विश्वेश्वरैया के जन्मदिन को इंजीनियर्स डे के रूप में मनाया जाता है।
खबर विस्तार : -
Engineers Day 2026: नेशनल इंजीनियर्स डे हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के सबसे महान इंजीनियर, सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती का दिन है। इंजीनियरिंग की दुनिया में उनके योगदान को आज भी मिसाल के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने न केवल डैम, झील और सिंचाई सिस्टम को बेहतर बनाने में योगदान दिया, बल्कि उनके विजन में देश के विकास के लिए एक बड़ा विजन भी था।
इंजीनियर्स डे सिर्फ इंजीनियरिंग प्रोफेशन में काम करने वालों को सम्मान देने का दिन नहीं है, बल्कि यह साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और देश बनाने में इंजीनियरों की भूमिका को दिखाने का भी एक मौका है। इंजीनियरिंग सिर्फ मशीनें, पुल या इमारतें बनाना नहीं है। एक सच्चा इंजीनियर वह होता है जो किसी समस्या को समझता है और ऐसा समाधान ढूंढता है जिससे लोगों को लंबे समय तक फायदा हो।आज, इंजीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस और एनर्जी तक, लगभग हर फील्ड में अहम भूमिका निभाते हैं।
क्यों मनाया जाता है इंजीनियर्स डे
दरअसल इंजीनियर्स डे मनाने का मुख्य मकसद उन लोगों को सम्मान देना है जिन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में योगदान दिया है और युवाओं को साइंस और टेक्नोलॉजी में तरक्की करने के लिए प्रेरित करना है। अपने काम से, सर एम. विश्वेश्वरैया ने दिखाया कि इंजीनियरिंग सिर्फ बिल्डिंग, पुल या डैम बनाने तक ही सीमित नहीं है; यह समाज की समस्याओं को हल करने और देश के आर्थिक विकास में योगदान देने का एक जरूरी जरिया भी हो सकता है। पीएम कार्यालय ने इंजीनियर्स डे के मौके पर उनके योगदान को भारत के मॉडर्न इंजीनियरिंग लैंडस्केप की नींव से जोड़ा है।
सर एम. विश्वेश्वरैया कौन थे?
भारत के सबसे महान इंजीनियर, पॉलिसी मेकर और मॉडर्न भारत के आर्किटेक्ट सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का नाम देश के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा है। उनका जन्म 15 सितंबर, 1861 को कर्नाटक के कोलार जिले के मुद्देनहल्ली गांव में हुआ था। उनका जन्मदिन हर साल पूरे भारत में इंजीनियर्स डे के तौर पर मनाया जाता है। वे एक दूर की सोचने वाले लीडर, काबिल एडमिनिस्ट्रेटर और देशभक्त इंजीनियर थे।
उन्होंने आजादी से पहले ही भारत के मॉडर्न, इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड भविष्य का रास्ता बना दिया था। उन्होंने 1912 से 1918 तक मैसूर राज्य के दीवान के तौर पर काम किया। इस दौरान, उन्होंने इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया। उनके योगदान में भद्रावती आयरन एंड स्टील प्लांट, मैसूर सोप फैक्ट्री और स्टेट बैंक ऑफ़ मैसूर जैसे इंस्टीट्यूशन से जुड़े प्रयास शामिल थे। 1955 में, उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
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इंजीनियरिंग क्षेत्र में सर एम. विश्वेश्वरैया का योगदान
विश्वेश्वरैया ने बाढ़ कंट्रोल, वॉटर मैनेजमेंट और सिंचाई के क्षेत्र में अहम काम किया। 1908 में हैदराबाद में आई भयानक बाढ़ के बाद, उन्होंने बाढ़ कंट्रोल के लिए समाधान बनाने में योगदान दिया। उन्होंने वॉटर मैनेजमेंट के लिए जलाशयों और बांधों की प्लानिंग के महत्व पर जोर दिया। बाद में, मैसूर के चीफ इंजीनियर के तौर पर, उन्होंने कृष्ण राजा सागर (KRS) बांध के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। इस प्रोजेक्ट ने सिंचाई और खेती में बड़े बदलाव लाने में मदद की।
- उनके ऑटोमैटिक स्लुइस गेट लाइफ इंजीनियरिंग, डिसिप्लिन, इनोवेशन और नेशन-बिल्डिंग का एक इंस्पायरिंग उदाहरण हैं।
- आज, जब भारत तेजी से टेक्नोलॉजिकल और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की ओर बढ़ रहा है, तो विश्वेश्वरैया का विजन और योगदान पहले से कहीं ज़्यादा रेलिवेंट लगता है।
- उन्होंने इस सिस्टम का पेटेंट भी कराया, जिसे 1903 में पुणे के खड़कवासला रिजर्वॉयर में इंस्टॉल किया गया था।
- उनकी सोच सिर्फ अपने समय की प्रॉब्लम तक ही सीमित नहीं थी। वे इंडस्ट्रियलाइजेशन, टेक्निकल एजुकेशन और प्लान्ड इकोनॉमिक डेवलपमेंट को भारत की प्रोग्रेस के लिए ज़रूरी मानते थे।
इंजीनियरों के दम पर बदल रहा है नया भारत
आज, जैसे-जैसे भारत टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहा है, इंजीनियरों की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। देश में हाईवे, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, रेलवे, पुल, पोर्ट और पावर प्रोजेक्ट से लेकर स्मार्ट सिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इन प्रोजेक्ट की प्लानिंग और उन्हें लागू करने में इंजीनियर अहम भूमिका निभाते हैं।
इंजीनियरिंग का दायरा अब सिर्फ ईंट, सीमेंट और मशीनरी तक ही सीमित नहीं है। भारतीय इंजीनियर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, ड्रोन और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से काम कर रहे हैं। इंजीनियर स्पेस और डिफेंस जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर में नई टेक्नोलॉजी डेवलप करने में भी अहम योगदान दे रहे हैं।
डिजिटल इंडिया इसका एक बड़ा उदाहरण है। आज आधार, UPI और डिजिटल लॉकर जैसी डिजिटल सेवाओं ने लाखों लोगों के रोजाना के काम आसान कर दिए हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इन डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत के डिजिटल सिस्टम की ग्लोबल पहचान में इंजीनियरों की कड़ी मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, देश तेजी से ग्रीन टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहा है। इंजीनियर सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में नई टेक्नोलॉजी और सॉल्यूशन डेवलप कर रहे हैं। PM सूर्य घर, PM-KUSUM और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन जैसे इनिशिएटिव में टेक्निकल एक्सपर्ट भी अहम रोल निभाते हैं। भविष्य में क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की जरूरत और बढ़ने वाली है।
भारत डीप टेक के फील्ड में भी अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसी टेक्नोलॉजी पर रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है। इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स और युवा रिसर्चर्स को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा भारत
गौरतलब है कि आज, भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ने की बात कर रहा है। इस मामले में, इंजीनियर सिर्फ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट करने वाले प्रोफेशनल नहीं हैं, बल्कि वे लोग भी हैं जो देश की भविष्य की जरूरतों के लिए सॉल्यूशन बनाते हैं। बेहतर सड़कों से लेकर स्मार्ट सिटी तक, डिजिटल पेमेंट से लेकर स्पेस मिशन तक, और क्लीन एनर्जी से लेकर एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी तक इंजीनियरिंग का असर हर फील्ड में दिखता है। इसलिए, नेशनल इंजीनियर्स डे सिर्फ एक महान इंजीनियर की जयंती मनाने का दिन नहीं है। यह उन लाखों इंजीनियरों के योगदान को पहचानने का भी मौका है, जो पर्दे के पीछे रहकर देश के विकास के लिए एक मजबूत नींव बना रहे हैं।
FAQ...
1. राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे (अभियंता दिवस) भारत में हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है।
2. भारत में इंजीनियर्स डे किसकी जयंती पर मनाया जाता है?
भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (Sir M. Visvesvaraya) की जयंती पर 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे बनाया जाता है।
3. भारत महान इंजीनियर सर एम. विश्वेश्वरैया का जन्म कब और कहां हुआ था?
महान इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले के मुदनेहल्ली गांव में हुआ था।
4. सर एम. विश्वेश्वरैया को भारत का सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' कब मिला था?
महान इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को 1955 में, उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
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