नहीं रहीं राजमाता विजयराज कुमारी, गमगीन है मेवाड़
खबर सार :-
जयपुर, मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की सदस्य राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का बीती रात निधन हो जाने के बाद राजस्थान के उदयपुर के साथ पूरा मेवाड़ गम में डूबा हुआ है। वह 83 वर्ष की थीं। पिछले कुछ समय से बीमार रह रही थीं।
खबर विस्तार : -
जयपुर : मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की सदस्य राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का बीती रात निधन हो गया है। उनकी मृत्यु पर उदयपुर, मेवाड़ और मारवाड़ में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबी बीमारी के चलते 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने बीते सोमवार की रात अंतिम सांस ली।
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श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं बड़ी संख्या में लोग
जैसे ही राजमाता विजयराज कुमारी के निधन की जानकारी लोगों को हुई वह उनके आवास की ओर दौड़ पड़े। उनके शुभचिंतक भारत के बाहर विदेशों में भी हैं। जैसे ही उनके निधन की जानकारी लोगों को मिल रही है, वह श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंच रहे हैं। इनमें सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में हैं। राजमाता लोगों के बीच सदैव जन कल्याण के प्रति समर्पित रही हैं। उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सेवा के लिए महत्वपूर्ण काम किए हैं। विशेष रूप से उदयपुर में उनका बड़ा योगदान रहा है। उनके निधन से एक व्यक्तित्व के युग का अंत हो गया। वह शहर की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान थीं।
क्षेत्र की परंपराओं में रही है उनकी आस्था
राजमाता विजयराज कुमारी भारत के प्रतिष्ठित राज परिवारों में थीं। उनका जन्म गुजरात के कच्छ के पूर्व राजपरिवार में हुआ था। विजयराज कुमारी कच्छ के महाराज फतेह सिंह की छोटी पुत्री और महाराव की पोती थीं। मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार में उनका विवाह हुआ था। वह स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ की पत्नी थीं। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ उनके बेटे हैं। वह एक प्रख्यात समाजसेवी और शिक्षाविद हैं। राजमाता ने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को तो निभाया ही, साथ ही मेवाड़ की परंपराओं और लोक सेवा के मूल्यों को भी निभाया। उनकी गहरी आस्था अपनी और क्षेत्र की परंपराओं में रही है।
परिवार के प्रति जिम्मेदारियां निभाती रहीं
उदयपुर में उन्होंने शिक्षा का अलख जगाने के लिए हर उत्साही कार्य में भाग लिया। महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से शुरू की गई पहल का भी उन्होंने समर्थन किया। वह हमेशा ही शाही परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहीं। इसीलिए आज उदयपुर के लोगों के बीच उनके न होने पर राजमाता के सार्वजनिक जीवन का को याद किया जा रहा है। ऊटी के फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट स्कूल में उनकी शिक्षा शुरू हुई थी। शिक्षा को भी उन्होंने जीवन का आधुनिक हथियार बताया था।
महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के साथ उनका जुड़ाव रहा। 1980 के दशक में उन्होंने संस्था के विकास और परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह शाही परिवार से ज्यादा निजी स्वभाव के कारण जानी जाती थी। माना जा रहा है कि कई दशकों से वह शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का अभिन्न अंग बन गई थीं। उन्होंने परिवार से जुड़ी विरासत के साथ ही परंपराओं को संरक्षक के नाते एवं शिक्षा व सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में योगदान दिया है।
अंतिम यात्रा के समय रो पड़े शुभचिंतक
आज हर ओर से सामाजिक संगठनों के सदस्य, नेता व गणमान्य व्यक्तियों के साथ स्थानीय लोग उनको श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए महल पहुंचे हुए हैं। अंतिम यात्रा मेवाड़ परिवार के ऐतिहासिक शाही श्मशान घाट, महासतियाजी आहार की ओर बढ़ने पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। वहां उनके अंतिम संस्कार में पारंपरिक रीति-रिवाजों का भी पालन किया गया। यहां शाही गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा निभाई जा रही है। राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ की स्मृति में शोक सभाओं का आयोजन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, 16 सितंबर से 23 सितंबर तक दोपहर 2ः00 बजे से 3ः00 बजे के बीच रोजाना सिटी पैलेस परिसर में स्थित शंभू निवास पैलेस में शोकसभा आयोजित की जाएंगी।
राजमाता के साथ आज अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या मंें उनके शुभचिंतक भी थे। उनके दुखों में राजमाता हिम्मत बढ़ाती रहीं। आज वह सभी को छोड़कर जा रही हैं। इसलिए उनके चाहने वाले यही सोचकर रो रहे हैं। इस मौके पर लोग राजमाता के सहयोग को भी याद कर रहे हैं।
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