एमपी में UCC बिल पास, हलाला और तीन तलाक से लेकर लिव-इन तक, जानें क्या-क्या होंगे बदलाव
खबर सार :-
Madhya Pradesh UCC Bill Passed: मध्य प्रदेश में UCC बिल पास होने के बाद, राज्य में शादी, तलाक, पैतृक संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए, मध्य प्रदेश UCC बिल के प्रावधानों पर एक नज़र डालते हैं।
खबर विस्तार : -
MP UCC Bill passed: मध्य प्रदेश में भारी हंगामे के बीच,विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश किया। जिसे मोहन यादव सरकार ने पास कर दिया है। अब गवर्नर की मंज़ूरी मिलने के बाद ऑफिशियल गजट में एक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश में UCC को असरदार तरीके से लागू किया जाएगा। इसे लागू करने से प्रॉपर्टी कानून, शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कड़े नियम लागू होंगे। सरकार के इस बड़े कदम से विपक्ष में हलचल मच गई है। एक ओर जहां सत्ताधारी पार्टी इसे ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस बात पर सवाल उठाया है कि सरकार ने यह बिल सप्लीमेंट्री लिस्ट (पूरक सूची) के ज़रिए पेश किया।
क्या है UCC बिल
समान नागरिक संहिता (UCC) का मतलब है हर नागरिक के लिए एक जैसा कानून, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो। एक बार लागू होने के बाद, शादी, तलाक, गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे से जुड़े एक ही कानून उस राज्य में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों पर लागू होंगे। यह मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। जनसंघ के समय से ही यूसीसी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एजेंडे में प्राथमिकता पर रहा है। BJP पहली ऐसी पार्टी थी जिसने सत्ता में आने पर यूसीसी लागू करने का वादा किया था, और यह मुद्दा 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी शामिल था। इसके अलावा, पार्टी द्वारा शासित राज्यों में इसे लागू करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं। यह बिल बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों को बराबर अधिकार देता है।
ये भी पढ़ेंः- मध्य प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे के बीच UCC बिल पास, सीएम बोले- भेदभाव मुक्त होगा राज्य
एमपी में क्यों लना पड़ा UCC बिल
मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य में शादी, तलाक, गुजारा-भत्ता, विरासत, गोद लेने, लिव-इन रिलेशनशिप और परिवार से जुड़े दूसरे मामलों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी कानूनों का गहराई से अध्ययन करने के बाद, एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी ढांचा बनाने की ज़रूरत महसूस की गई। इसी मकसद से, 27 अप्रैल 2026 को जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यों वाली एक कमेटी बनाई गई। इस कमेटी में शिक्षाविद, कानूनी विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।
दरअसल संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के बारे में प्रावधान है, जिसके अनुसार राज्य इसे लागू कर सकता है। इसका उद्देश्य धर्म के आधार पर किसी खास वर्ग के प्रति भेदभाव या पक्षपात को खत्म करना और अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देना था।
जनता से मांगे गए थे सुझाव
गौरतलब है कि लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 मई, 2026 को एक वेब पोर्टल लॉन्च किया गया था। इस दौरान लगभग 3.49 करोड़ SMS संदेश भेजे गए। वेब पोर्टल के ज़रिए कुल 9,58,675 सुझाव मिले। ज़िला और राज्य स्तर पर 50 से ज़्यादा जन-परामर्श बैठकें हुईं, जिनसे 10,134 से ज़्यादा सुझाव प्राप्त हुए।
UCC बिल से क्या-क्या होंगे बदलाव
- बेटे और बेटियों को बराबर अधिकार होंगे।
- धर्म के आधार पर अलग-अलग नियम खत्म कर दिए जाएंगे, और पूरे राज्य में विरासत और वसीयत के लिए एक जैसा सिस्टम लागू किया जाएगा।
- मौजूदा शादी के बाद दूसरी शादी तब तक नहीं की जा सकती जब तक पहली शादी कानूनी तौर पर खत्म न हो गई हो।
- सिर्फ "तलाक, तलाक, तलाक" कहने से शादी खत्म नहीं होगी; तलाक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर ही लागू होगा।
- विरासत के मामले में पुरुषों और महिलाओं को बराबर अधिकार होंगे।
- अनुसूचित जनजातियों और सुरक्षित पारंपरिक ग्रुप्स को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
- धार्मिक रस्में, रीति-रिवाज और परंपराएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
- शादियों का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी होगा, यह प्रोसेस पंचायत लेवल से लेकर शहरी लोकल बॉडीज तक फैला होगा।
- पति या पत्नी के जिंदा रहते हुए दूसरी शादी करने की इजाजत नहीं होगी।
- बहु विवाह और तीन तलाक पर पूर्ण प्रतिबंध मसौदे के अनुसार सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह वैध होगा। पुरुषों की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है।
- ऐसे मामलों में जहां मौजूदा कानूनों ने महिलाओं के अधिकारों को कम किया है, वहां भाई और बहनों दोनों को बराबर अधिकार दिए जाएंगे। - इस कानून का मुख्य मकसद महिलाओं की इज्ज़त और सम्मान और महिलाओं को मज़बूत बनाना बताया गया है।
- कोर्ट सिस्टम के बाहर तलाक को मान्यता नहीं दी जाएगी।
ये भी पढ़ेंः- NEET Paper Leak Row : छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ सड़क पर उतरे राहुल गांधी, PM आवास के बाहर दिया धरना
अन्य प्रमुख खबरें
-
भलपहरी और अचानकपुर में होंगे विकास कार्य, उप मुख्यमंत्री शर्मा ने की घोषणा
2026-10-19
-
DELHI विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था होगी हाईटेक, गेट, पास, पार्किंग में होगा बदलाव
2026-10-19
-
INS सुदर्शिनी की समुद्री यात्रा जारी, भारत-ओमान दोस्ती को मिली मजबूती
2026-10-18
-
सीएम धामी लाए दीवाली की सौगात, हर ग्राम सभाओं में कराए जाएंगे विकास कार्य
2026-10-18
-
Kolkata Stampede: कोलकाता भगदड़ मामले में पुलिस का एक्शन, 7 अरेस्ट
2026-10-18
-
पशु चारे के चोकर से बनाया जा रहा था बिस्किट, कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड
2026-10-17
-
प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर नमो घाट हो रहा तैयार, 25 अक्टूबर को वाराणसी में रहेंगे पीएम
2026-10-17
-
FSSAI Draft: 6 महीने तक के शिशुओं के लिए FSSAI का मसौदा जारी
2026-10-17
-
वाराणसी में भक्तों ने की मां कालरात्रि की पूजा, मंदिरों में उमड़ी भीड़
2026-10-17
-
उत्तराखंड में बिजली से नुकसान पर सख्ती, कुमाऊं में 250 से अधिक चोरी के मामले दर्ज
2026-10-17
-
ध्रुव राठी के खिलाफ वारंट जारी, मानहानी केस में सुनवाई
2026-10-17
-
इंदौर: खाद्य प्रसंस्करण और सोया उद्योग के क्षेत्र बढ़ रहा आगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
2026-10-17
-
गुजरात के भरूच की दवा फैक्ट्री में विस्फोट, 5 श्रमिकों की मौत; 6 घायल
2026-10-17
-
गांवों को गरीबी मुक्त करने का शिवराज सिंह का संकल्प, आजीविका मिशन से जुडे़गा हर परिवार
2026-10-17
-
नवरात्रि के सातवें दिन PM ने की सर्वमंगल की कामना, नेताओं ने दी बधाई
2026-10-17