श्री गुरु नानक देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर नेताओं ने किया नमन, मानवता और सेवा संदेश की प्रासंगिकता रेखांकित

खबर सार :-

सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस के अवसर पर देश के प्रमुख राजनीतिक नेताओं और प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गुरु नानक देव ज्योति-ज्योत दिवस: नेताओं ने किया नमन

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: सिख पंथ के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर सोमवार को देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जन प्रतिनिधियों ने उन्हें नमन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्य के मुख्यमंत्रियों और अन्य प्रमुख नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से संदेश जारी कर गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की। इस अवसर पर नेताओं ने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं, उनके सामाजिक सुधारों और मानवता के कल्याण के लिए दिए गए संदेशों को रेखांकित किया।

राजनीतिक दलों के नेताओं और जन प्रतिनिधियों ने किया नमन

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने अपने संदेश में गुरु नानक देव जी को मानवता और आध्यात्मिक चेतना का महान संदेशवाहक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने अपने जीवन दर्शन से संसार को सत्य, करुणा और आपसी भलाई का रास्ता दिखाया। ओम बिड़ला के अनुसार, गुरु नानक देव जी ने समाज में फैली कुरीतियों, भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ निर्भीकता से आवाज उठाई थी और उनका 'सरबत दा भला' (सबका कल्याण) का संदेश आज के दौर में भी पूरी तरह से प्रासंगिक है।

केंद्रीय मंत्रियों ने भी इस अवसर पर गुरु नानक देव जी के योगदान को याद किया। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने उन्हें विश्व को सहिष्णुता और सेवा का मार्ग दिखाने वाला संत बताते हुए कहा कि उनके जीवन की ज्योति से समाज को सदैव प्रेरणा मिलती रहेगी। वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी सोशल मीडिया के जरिए प्रथम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि गुरु साहिब का समानता और निस्वार्थ सेवा का संदेश आज भी लोगों को परोपकार के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को नमन किया। रेखा गुप्ता ने 'एक ओंकार सतनाम' के संदेश का स्मरण करते हुए कहा कि गुरु साहिब की वाणी में जनकल्याण का भाव निहित है और उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने सामाजिक असमानता को समाप्त कर समाज में समरसता की जो लौ जलाई थी, वह आज भी पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर रही है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी इस पावन अवसर पर अपने विचार साझा किए। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने निस्वार्थ सेवा और मानव समानता का विचार देकर समाज को एक नई दिशा दी। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने गुरु साहिब के मूल सिद्धांतों 'नाम जपो, किरत करो और वंड छको' (ईश्वर का नाम लो, ईमानदारी से मेहनत करो और बांटकर खाओ) का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आदर्श समाज को हमेशा जात-पात और हर प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर काम करने की सीख देते रहेंगे।

सामाजिक सुधार और कुरीतियों पर प्रहार

सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी ने अपने जीवनकाल में तत्कालीन समाज में व्याप्त आडंबरों, ऊंच-नीच के भेदभाव और छुआछूत जैसी कुरीतियों पर सीधा प्रहार किया था। उन्होंने देश-विदेश की लंबी यात्राएं कीं, जिन्हें 'उदासी' कहा जाता है। इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंधविश्वास से मुक्त कर सत्य, नैतिक आचरण और एक ईश्वर की भक्ति के प्रति जागरूक करना था। नेताओं ने अपने वक्तव्यों में विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि गुरु साहिब ने जात-पात की सीमाओं को तोड़कर समाज के हर वर्ग को एक समान दर्जा देने की वकालत की।

सामूहिक सेवा और 'संगत-पंगत' की परंपरा

नानक देव जी ने समाज में समानता स्थापित करने के लिए 'संगत' (सामूहिक प्रार्थना) और 'पंगत' (एक साथ बैठकर भोजन करना यानी लंगर) की व्यवस्था शुरू की थी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अमीर-गरीब, राजा-प्रजा या किसी भी जाति का व्यक्ति बिना किसी भेद-भाव के एक साथ बैठकर भोजन कर सके। विभिन्न जन प्रतिनिधियों ने अपने संदेशों में इस बात का उल्लेख किया कि यह परंपरा आज भी वैश्विक स्तर पर निस्वार्थ सेवा और भ्रातृत्व की एक अनुपम मिसाल बनी हुई है। श्री गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में ननकाना साहिब (जो अब पाकिस्तान में स्थित है) में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष करतारपुर (पाकिस्तान) में व्यतीत किए, जहां उन्होंने खेती करते हुए 'किरत करो, नाम जपो, वंड छको' के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारा। करतारपुर साहिब में ही वे ज्योति-ज्योत समाए थे (शरीर त्यागा था)।

प्रतिवर्ष सिख समुदाय और गुरु नानक देव जी के अनुयायी उनके ज्योति-ज्योत दिवस को अत्यधिक श्रद्धा और सादगी के साथ मनाते हैं। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, पाठ और लंगर का आयोजन किया जाता है, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्र होकर उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।

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