राजकोट के मिलावटियों का अद्भुत कारनामा, आटा, मसाला, दूध व काफी भी खराब, एक-दो नहीं कई लोग बेच रहे थे खराब माल

खबर सार :-

स्कूल के बच्चों को भोजन तैयार करने के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा आटा उन बोरियों में भरकर लाया गया था, जिसमें पशुओं के लिए चार आता है। इन खाद्य वस्तुओं को ऐसे ही पैक किया जाता था।
बच्चों को खिला रहे थे बासी भोजन, चारा वाली बोरी में पैक था आटा

खबर विस्तार : -

राजकोट : स्कूल के बच्चों को भोजन तैयार करने के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा आटा उन बोरियों में भरकर लाया गया था, जिसमें पशुओं के लिए चार आता है। इन खाद्य वस्तुओं को ऐसे ही पैक किया जाता था। जब अधिकारियों के पास यह मामला पहुंचा तो वह दंग रह गए। यह मामला राजकोट से जुड़ा हुआ है।  स्कूल के बच्चों को दिया जाने वाला भोजन इसी से बनता था। यही नहीं जो भोजन तैयार किया जाता था, वह सीधे फर्श पर रख दिया जाता था। इस मामले में नगर निगम की एक टीम ने अधिकारियों के साथ जब छापा डाला तो एक दो नहीं तमाम बड़ी कमियां पाई गई। 

जमीन पर रख देते थे रोटियां

बच्चों को बासी भोजन खिलाया जा रहा था। रोटियां जमीन पर रख देते थे। इस चेकिंग अभियान में तीन खाद्य इकाइयों को सील कर इनसे 1000 किलोग्राम बासी भोजन नष्ट कराया गया। जरा सोचिए जो भोजन बच्चों के पुष्ट होने के लिए दिया जाता था, वह भोजन वासी था और बड़ी बात यह है कि थोड़ा नहीं पूरा 1000 किलोग्राम था। चेक की गई इकाइयों में बावड़ी गांव के पास औद्योगिक क्षेत्र में स्थित केसर फूड प्रोडक्ट्स भी शामिल थे। चेकिंग का मामला अभी थमा नहीं है, बीते दिनों शुरू किए गए अधिकारियों की चेकिंग अभियान में अभी बहुत से पर्दे उठने हैं। राजकोट नगर निगम ने शहर भर में यह अभियान चलाया। खाद्य पदार्थ में मिलावट के लिए तमाम जगहों से जांच के लिए नमूने लिए गए। बताया जाता है की निगरानी अभियान के दौरान तीन प्रतिष्ठान तो मौके पर ही सील कर दिए गए। 10 खाद्य नमूने चेकिंग के लिए गए और यह प्रक्रिया शनिवार को पूरी कर ली गई थी। 

75 प्रतिष्ठानों पर अधिकारियों का धावा

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अगला दिन रविवार होने के कारण चेकिंग अभियान में कुछ रुकावट जरूर आई, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी शहर के और स्कूलों में दिए जाने वाले खाद्यान्न व्यवस्था को जांचा जाएगा। आईएमसी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार खाद्य सुरक्षा टीमों ने इस तरह और व्यवसाय से जुड़े हुए करीब 75 प्रतिष्ठानों में जाकर निरीक्षण किया। अभियान के दौरान ही 1020 किलोग्राम बासी भोजन जो खाने योग्य भी नहीं था, यह रखा हुआ मिला। इसे नष्ट कर दिया गया। निश्चित है कि यह भोजन स्कूल के बच्चों में खपाने के लिए रखा हुआ था। इसके अलावा भंडारण लाइसेंस और स्वच्छता से संबंधित तमाम उल्लंघनों के लिए 12 प्रतिष्ठानों को नोटिस दी गई है।

जब यह सिलसिला चला तो एक के बाद दूसरी और दूसरी की बात तीसरी प्रतिष्ठान में कमियां मिलने पर यह तय किया गया की गड़बड़ियां दूर तक हैैं इसलिए अभियान को जारी रखा जाएगा। करीब 34500 मौके पर ही प्रशासनिक शुल्क के रूप में वसूल किए गए। लगभग 1020 किलोग्राम मीठा शकरपारा और मैदा भी मानक के अनुसार नहीं था। इसमें संभावना जताई गई कि यह खराब या मिलावट वाला है। इसे भी नष्ट कर दिया गया। यूनिट को नोटिस जारी कर ₹5000 का जुर्माना लगाया गया, साथ ही हिदायत दी गई कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी न करें। खुले मीठे शकरपारा और चीनी पाउडर के नमूने लेकर जांच के लिए भेजा गया है। 

कई वस्तुएं एक्सपायरी डेट वाली निकलीं

निरीक्षक ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत अनिवार्य लेवल के बिना प्रीमिक्स एसेंस वाली वस्तुओं की भी जांच की। इस दौरान चाय, कॉफी, शीतल पेय, सोडा, मसाला जैसी कई और भी चीजें बरामद की गई हैं। इनमें कई चीजे आउटडेटेड थी। गोंडल रोड पर एक अन्य सील बंद इकाई शाह फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड आवश्यक तकनीकी कर्मियों के बिना और बैच बार उत्पादन रिकॉर्ड रखे बिना चलाया जा रहा था। जानकारी के अनुसार 5972 किलोग्राम खाद्य उत्पादक इसमें लगभग 2000 लीटर विभिन्न स्वाद वाले एसेंस जप्त किए गए। यह उस गणना से अलग की सामग्री है।

जांच की पड़ते अभी खोली जा रही हैैं। इकाई को स्वच्छ भंडारण के लिए नोटिस जारी कर दी गई है और करीब इनसे ₹10000 जुर्माने के रूप में वसूले जाएंगे। आम के पाउडर खुले हुए थे। श्रीनाथ ट्रेडिंग को भी सील किया गया है। इस कंपनी के बारे में अधिकारियों ने बताया कि वहां पर उत्पादन रिकॉर्ड नहीं थे। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत इन पर आवश्यक लेबल लगा होना चाहिए, जिसमें वस्तु के बारे में मात्रा और मूल्य, डेट आदि का निर्धारण तय किया जाता है। 

 बिना पैक मिला 5600 किलोग्राम मसाला

लेवल के बिना पैक किए गए हल्दी , मिर्च और धनिया, जीरा पाउडर करीब 5600 किलोग्राम संदिग्ध स्टॉक के रूप में रखा हुआ था। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में यह वस्तु दुकानों में क्यों रखी हुई थी। गोदाम में भी तमाम सारी सामग्री पाई गई। यह कहां खपाया जा रहा था? इसकी भी जांच की जाएगी। प्रतिष्ठानों पर करीब ₹10000 का जुर्माना लगाकर भविष्य में ऐसा न करने के लिए कहा गया है। निगम ने लाइसेंस संबंधी उल्लंघन के लिए भी जुर्माना लगाया है। कई लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया था, इसलिए सरकारी काम में रुकावट या उपद्रवों के लिए अन्य व्यवसाय पर ₹500 से लेकर ₹1000 तक प्रशासनिक शुल्क लगाया गया है। डेयरी आउटलेट्स खुले मावा, मलाई, दूध में भी कुछ संका होने के कारण इनका नमूना लिया गया है। बता दंे की निगरानी अभियान के तहत यूनिवर्सिटी रोड पर भी कई स्थानों पर जांच की गई। निरीक्षण के दौरान 150 फीट रिंग रोड और श्रद्धा पार्क के आसपास खाद्य व्यवसाय हैं। यहां के अलावा आसपास क्षेत्र में उम्मीद है कि सोमवार को अभियान चलाया जाएगा।

FAQ

1- अधिकारियों को इतनी बड़ी मात्रा में बच्चों को खराब भोजन दिए जाने की जानकारी कैसे मिली?

अधिकतर लोगों को जानकारी होती है की कहां गड़बड़ी चल रही है। लेकिन आंखों पर पट्टी लगाकर काम करने वालों को अपनी जिम्मेदारी नजर नहीं आती है।

2-  क्या यह एक अकेला स्कूल था, जहां खराब भोजन दिया जाने वाला था? 

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि यदि अभियान बिना किसी सूचना या जानकारी के चलाया जाए तो तमाम स्थानों में और कमियां मिलेगी।

3- आखिर इस तरह का अभियान अधिकतर क्यों नहीं चलाए जाते हैं?

काम का दबाव और कानूनी दांवपेच की वजह से ज्यादातर अधिकारी इस तरह की कार्रवाई से बचते हैं।

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