डीपफेक पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई, सोशल मीडिया कंपनियों को 3 घंटे में हटाना होगा फर्जी कंटेंट

खबर सार :-

केंद्र सरकार ने AI डीपफेक और फर्जी कंटेंट पर कड़े नियम लागू किए हैं। नए आईटी नियमों के तहत 3 घंटे में गैर-कानूनी सामग्री हटानी होगी और एआई कंटेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
AI Deepfake Rules 2026: 3 घंटे में हटाना होगा फर्जी कंटेंट, नियम लागू

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार की जाने वाली फर्जी तस्वीरों, वीडियो और ऑडियो के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में व्यापक बदलाव लागू कर दिए हैं। 10 फरवरी 2026 से प्रभावी इन संशोधनों के तहत अदालत या सक्षम सरकारी प्राधिकारी का निर्देश मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को गैर-कानूनी या भ्रामक कंटेंट को तीन घंटे की समय-सीमा में हटाना होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा जारी इस दिशानिर्देश का मुख्य उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पहचान की चोरी, धोखाधड़ी और भ्रामक जानकारियों के प्रसार को नियंत्रित करना है।

सामग्री पर लेबल और मेटाडेटा अनिवार्य

नए विनियामक ढांचे के अनुसार, यदि कोई उपयोगकर्ता एआई उपकरणों के माध्यम से कानूनी रूप से स्वीकार्य फोटो, वीडियो या ऑडियो सामग्री तैयार करता है, तो उसे यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा कि यह डिजिटल रूप से निर्मित है। इसके साथ ही, सामग्री के साथ ऐसा तकनीकी डेटा (मेटाडेटा) संलग्न करना अनिवार्य किया गया है, जिससे उसके मूल स्रोत की पहचान की जा सके। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को वास्तविक और कृत्रिम रूप से बनाई गई सामग्री के बीच अंतर समझने में मदद करना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बाल यौन शोषण सामग्री, किसी व्यक्ति की बिना सहमति के जारी निजी तस्वीरें, किसी अन्य की पहचान का अनधिकृत इस्तेमाल और राष्ट्र की सुरक्षा या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले एआई कंटेंट के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी।

कंपनियों की जिम्मेदारी और नियमों का उल्लंघन

आईटी नियमों में किए गए इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही का दायरा काफी बढ़ गया है। अब मंचों को केवल शिकायत मिलने का इंतजार करने के बजाय एआई और स्वचालित तकनीकी माध्यमों का उपयोग करके स्वयं भी ऐसी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान कर उसे रोकना होगा। यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे आईटी अधिनियम की धारा 79 के अंतर्गत मिलने वाला 'सेफ हार्वर' (कानूनी संरक्षण) वापस ले लिया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, संबंधित मंच पर भारतीय कानूनों के तहत सीधी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। नियमों के तहत प्लेटफॉर्म्स को अपने उपयोगकर्ताओं को यह चेतावनी देना भी अनिवार्य कर दिया गया है कि गैर-कानूनी सामग्री साझा करने की स्थिति में उनका खाता निलंबित किया जा सकता है और उनके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।

पीड़ितों के लिए शिकायत और समाधान प्रक्रिया

किसी भी व्यक्ति के डीपफेक अथवा फर्जी एआई सामग्री का शिकार होने की स्थिति में शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। प्रभावित व्यक्ति सबसे पहले संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। मंच की ओर से निर्धारित समय में समाधान न मिलने पर मामला शिकायत अपील समिति (जीएसी) के समक्ष ले जाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, पीड़ित राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं अथवा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क साध सकते हैं। गंभीर मामलों में पुलिस के पास प्राथमिकी दर्ज कराने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।

तकनीकी शोध और जन-जागरूकता

सरकार के अनुसार इन नियमों का उद्देश्य नवाचार को अवरुद्ध करना नहीं, बल्कि तकनीक के उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करना है। इसी रणनीति के भाग के रूप में 'इंडिया एआई मिशन' के तहत देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों—आईआईटी जोधपुर, आईआईटी मद्रास और आईआईटी खड़गपुर—में एआई जनित फर्जी सामग्री की स्वचालित पहचान करने वाली तकनीकों का विकास किया जा रहा है। इस नीतिगत बदलाव के बाद आम उपयोगकर्ताओं को भी डिजिटल सामग्री के उपयोग में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी संदिग्ध वीडियो या ऑडियो की सत्यता जांचे बिना उसे साझा करने से बचने को कहा गया है। एआई सामग्री पर लेबलिंग प्रणाली लागू होने से भविष्य में फर्जी खबरों और ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद जताई गई है।

FAQ...

1. नए नियम के अनुसार एआई डीपफेक कंटेंट पर क्या कार्रवाई होगी?

अदालत या सरकार का आदेश मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 3 घंटे के भीतर गैर-कानूनी या फर्जी एआई कंटेंट हटाना होगा।

2. क्या सभी एआई (AI) कंटेंट पर पाबंदी लगा दी गई है?

नहीं, एआई कंटेंट पर पाबंदी नहीं है। हालांकि, वैध एआई कंटेंट पर स्पष्ट लेबल/वॉटरमार्क और मेटाडेटा लगाना अनिवार्य किया गया है ताकि लोग गुमराह न हों।

3. यदि सोशल मीडिया कंपनियां नियमों का पालन नहीं करती हैं तो क्या होगा?

नियम न मानने पर प्लेटफॉर्म्स आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला कानूनी संरक्षण ('सेफ हार्वर') खो देंगे और उन पर सीधी कानूनी कार्रवाई हो सकेगी।

4. किस तरह के एआई कंटेंट पर पूरी तरह से रोक रहेगी?

फर्जी पहचान, डीपफेक वीडियो/ऑडियो, बिना अनुमति निजी तस्वीरें, बाल यौन शोषण, भ्रामक सूचनाएं और देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली सामग्री पर पूरी तरह सख्ती रहेगी।

5. डीपफेक का शिकार होने पर पीड़ित कहाँ शिकायत कर सकते हैं?

पीड़ित संबंधित प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी, राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in), हेल्पलाइन नंबर 1930 या पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा सकते हैं।

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