नोएडा के सात स्कूलों पर डीएम का हंटर, भरेंगेे एक-एक लाख रूपये जुर्माना
खबर सार :-
समय से पहले जिन स्कूलों ने फीस बढ़ाई थी, वह अब एक-एक लाख रुपए जुर्माना के रूप में भरेंगे। जिला गौतमबुद्ध नगर के सात स्कूलों पर जिलाधिकारी ने दंडात्मक कार्रवाई की है। नोएडा के सात स्कूलों को उन्होंने एक-एक लाख रुपए जुर्माना भरने का आदेश दिया है।
खबर विस्तार : -
नोएडा/ लखनऊः समय से पहले जिन स्कूलों ने फीस बढ़ाई थी, वह अब एक-एक लाख रुपए जुर्माना के रूप में भरेंगे। जिला गौतमबुद्ध नगर के सात स्कूलों पर जिलाधिकारी ने दंडात्मक कार्रवाई की है। नोएडा के सात स्कूलों को उन्होंने एक-एक लाख रुपए जुर्माना भरने का आदेश दिया है। इससे पहले जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई थी, जिसने इन स्कूलों के रवैया को गलत माना और जिलाधिकारी को रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर जिले के कई स्कूल सरकारी आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
बड़े स्तर पर चल रही है मनमानी
जिला प्रशासन ने उन्हें निर्देश देते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश सेल्फ फाइनेंस इंडिपेंडेंट स्कूल यानी फीस रेगुलेटरी कमेटी ने एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूल नियमों का पालन करेंगे। इसके बाद ही निश्चित अवधि के बाद फीस बढ़ा सकते हैं। जिला प्रशासन के इन आदेशों को न मानते हुए तमाम प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ा दी गई। उन्होंने नियम कायदे नहीं माने, इसीलिए इन सभी स्कूलों पर सरकारी एक्शन किया गया है। जिला प्रशासन ने सातों प्राइवेट स्कूलों पर एक-एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रदेश के कई स्कूल सरकारी नियमों को नहीं मानते और स्कूलों को पैसे कमाने का कारखाना बना बैठे हैं।
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इन्होंने फीस बढ़ाने से पहले बिना किसी मंजूरी के स्कूल में खुद की बनाए नियम लागू कर दिए। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के अनुसार, स्कूलों पर जुर्माना लगाने का फैसला उनकी अध्यक्षता में हुई जिला फीस रेगुलेटरी कमेटी की बैठक की संस्तुति पर लिया गया। कमेटी ने 2026 और 27 के बीच अकादमी का सत्र के लिए प्राइवेट स्कूलों की प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी की समीक्षा भी की थी। उत्तर प्रदेश सेल्फ फाइनेंस इंडिपेंडेंट स्कूल यानी फीस रेगुलेटरी कमेटी ने एक्ट के नियमों के पालन की जांच की। इसके बाद समीक्षा की गई, जिसमें प्राइवेट स्कूलों ने 2026-27 एकेडमी सेशन के लिए 7.23 फ़ीसदी की अधिकतम सीमा से भी अधिक फीस बढ़ा दिया।
स्कूल बने हैं रूपये बनाने के उद्योग
नोएडा के सेक्टर 21 के एक अन्य स्कूलों ने फीस के अलावा अलग से सालाना फीस वसूल लिया था। इसके अलावा 2025 और 2026 में भी एकेडमिक सेशन के लिए अपना फीस स्ट्रक्चर तैयार नहीं किया। नियम तो यह है कि फीस स्ट्रक्चर को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होता है। लेकिन इन स्कूलों ने यह गलतियां भी की। इन गलतियों को गंभीर मानते हुए कमेटी की संस्कृति पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई करने का आदेश दिया। यद्यपि स्कूल प्रशासनों में रोष है, लेकिन नियम तो नियम है। डीएम ने कहा कि इनका पालन करना होगा। फीस बढ़ाने वाले सातों स्कूलों को जुर्माना निश्चित अवधि के अंदर भरने के लिए कहा गया है। भविष्य में इस तरह की गलती न करने की हिदायत भी है।
सरकारी नियमों को भी नहीं मानते
इधर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी कई स्कूलों ने फीस बढ़ा दी हैै। अभिभावकों ने इसकी शिकायत बड़े स्तर तक की, लेकिन फिलहाल यहां अभी तक कार्रवाई नहीं की गई। पिछले साल भी जिलाधिकारी की ओर से निर्देश जारी किए गए थे कि स्कूल मनमानी करके आर्थिक दबाव नहीं डाल सकते हैं। कमजोर व पिछड़े वर्गों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए भी स्कूल अपने बनाए नियम नहीं लागू कर सकते हैं। अभी हाल ही में उन स्कूलों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है, जिन्होंने पुस्तकों के दाम बढ़ाकर बेचे थे। इन पुस्तकों की वैल्यू से कई गुना ज्यादा पर पुस्तक बच्चों को दी गई। यह हाल केवल नोएडा या लखनऊ का नहीं है, पूरे उत्तर प्रदेश में चल रहा है।
FAQ...
1. स्कूलों पर की गई कार्रवाई क्या सही है ?
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जग जाहिर है। स्कूलों में पुस्तकों के दामों पर कोई नियंत्रण नहीं है। कई बार जिला प्रशासन की ओर से हिदायत दी जाती है, लेकिन यह किसी प्रकार का दबाव नहीं मानते हैं। इसलिए जिला प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई उचित है।
2. उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में इस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए ?
जहां कहीं भी किसी स्कूल की ओर से अभिभावकों या बच्चों पर किसी भी प्रकार से प्रताड़ित करने की शिकायत हो, निश्चित ही कार्रवाई करनी चाहिए। बहुत से अभिभावक एसे हैं जो प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई का स्वागत कर रहे हैं।
3. स्कूलों पर कार्रवाई क्या यह पहली घटना है ?
इससे पहले भी कई बार कार्रवाई हुई हैं, लेकिन एक साथ कई स्कूलों पर बड़े शुल्क को दंडात्मक रूप में नहीं लागू किया गया। यही कारण है कि स्कूल पुरानी बातों को भूलकर अपने बनाए नियम लागू करते हैं।
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