UPI पर लग सकता है MDR? आरबीआई बोला-'खर्च तो किसी को उठाना होगा, उपभोक्ताओं पर बोझ जरूरी नहीं'

खबर सार :-

यूपीआई पर एमडीआर लागू करने का प्रस्ताव अभी शुरुआती स्तर पर है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आरबीआई का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी, लेकिन आम उपभोक्ताओं पर बोझ डालना जरूरी नहीं है। सरकार भी संकेत दे चुकी है कि छोटे और दैनिक यूपीआई भुगतान फिलहाल निशुल्क बने रहेंगे।
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खबर विस्तार : -

Digital Payment UPI MDR: देश में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और पूरा मामला शुरुआती चरण में है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इसका बोझ सीधे आम उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा।

मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू करने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार, आने वाले समय में नीति से जुड़े घटनाक्रमों का इंतजार करना चाहिए।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत बना अहम मुद्दा

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यूपीआई जैसी बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने, सुरक्षित बनाए रखने और लगातार विकसित करने में भारी लागत आती है। ऐसे में इस पूरी व्यवस्था को टिकाऊ बनाए रखने के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। उन्होंने दोहराया कि लागत का भुगतान किसी न किसी स्तर पर करना ही होगा। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़े। सरकार और नियामक इस बात पर विचार कर रहे हैं कि ऐसा मॉडल तैयार किया जाए जिससे डिजिटल भुगतान प्रणाली मजबूत भी रहे और लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न बढ़े।

MDR क्या है और क्यों हो रही है चर्चा?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देते हैं। वर्तमान में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के अधिकांश लेनदेन पर एमडीआर लागू है। हालांकि यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान पर फिलहाल कोई एमडीआर नहीं लिया जाता। यही वजह है कि यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हुआ और आज देश में करोड़ों लोग रोजाना इसका उपयोग कर रहे हैं। अब सरकार भुगतान प्रणाली को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए कानूनी ढांचे में बदलाव पर विचार कर रही है।

Ministry of Finance-Digital Payment

कानून में बदलाव की तैयारी कर रही सरकार

वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य भविष्य में जरूरत पड़ने पर विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क तय करने की कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। यदि यह संशोधन लागू होता है तो सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह तय करे कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लागू होगा और किन्हें शुल्क मुक्त रखा जाएगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि फिलहाल आम उपभोक्ताओं के नियमित यूपीआई भुगतान को निशुल्क बनाए रखने की नीति में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

90 प्रतिशत दैनिक भुगतान पर असर नहीं

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यदि भविष्य में किसी प्रकार का एमडीआर लागू भी किया जाता है तो उसका असर रोजमर्रा के छोटे भुगतान पर नहीं पड़ेगा। दूध, सब्जी, किराना, दवा और अन्य दैनिक जरूरतों से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन किसी भी संभावित शुल्क के दायरे से बाहर रह सकते हैं। यानी आम लोगों द्वारा किए जाने वाले छोटे और नियमित भुगतान पहले की तरह मुफ्त बने रहने की संभावना है। यह संकेत उन करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है जो हर दिन छोटे भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं।

व्यापारियों की भूमिका भी होगी अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में कुछ श्रेणी के लेनदेन पर एमडीआर लागू होता है तो उसका भुगतान व्यापारी कर सकते हैं, जैसा कि वर्तमान में कई कार्ड भुगतान के मामलों में होता है। अधिकांश व्यापारी कार्ड ट्रांजैक्शन पर लगने वाले एमडीआर का खर्च स्वयं वहन करते हैं और इसे ग्राहकों पर सीधे नहीं डालते। यूपीआई के मामले में भी ऐसा ही कोई मॉडल अपनाने पर विचार किया जा सकता है।

डिजिटल भुगतान को टिकाऊ बनाना प्राथमिकता

आरबीआई और केंद्र सरकार दोनों का कहना है कि उद्देश्य यूपीआई को महंगा बनाना नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को भविष्य के लिए मजबूत और टिकाऊ बनाना है। यूपीआई का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा और सर्वर क्षमता पर भी निवेश बढ़ाना आवश्यक हो गया है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वित्तीय मॉडल तैयार करना जरूरी माना जा रहा है। फिलहाल न तो आरबीआई और न ही सरकार ने यूपीआई पर एमडीआर लागू करने की कोई समयसीमा या अंतिम निर्णय घोषित किया है। आने वाले समय में नीति, कानून और उद्योग से जुड़े सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा।

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FAQ.

1. क्या यूपीआई (UPI) पर अभी एमडीआर (MDR) लागू हो गया है?

नहीं। फिलहाल यूपीआई पर एमडीआर लागू नहीं हुआ है। आरबीआई के अनुसार यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

2. क्या आम ग्राहकों को यूपीआई भुगतान पर शुल्क देना होगा?

फिलहाल नहीं। सरकार और आरबीआई ने संकेत दिया है कि रोजमर्रा के सामान्य यूपीआई लेनदेन आगे भी निशुल्क बने रहने की संभावना है।

3. एमडीआर (MDR) क्या होता है?

एमडीआर (Merchant Discount Rate) वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देते हैं।

4. यूपीआई पर एमडीआर लागू करने की जरूरत क्यों बताई जा रही है?

आरबीआई का कहना है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन, रखरखाव और विस्तार में लागत आती है। इसे टिकाऊ बनाए रखने के लिए भविष्य में किसी वित्तीय मॉडल की आवश्यकता हो सकती है।

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