डिजिटल भुगतान: जनवरी में यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन 21.70 अरब के पार
खबर सार :-
यूपीआई ने जनवरी में ट्रांजैक्शन और वैल्यू दोनों के मामले में नया कीर्तिमान बनाया है। बढ़ते क्यूआर कोड, छोटे भुगतानों में बढ़ता इस्तेमाल और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच ने यूपीआई को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना दिया है। आने वाले समय में यूपीआई की यह रफ्तार और तेज होने की पूरी संभावना है।
खबर विस्तार : -
NPCI Report: भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) है। जनवरी महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 21.70 अरब ट्रांजैक्शन किए गए। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के रविवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है।
ट्रांजैक्शन वैल्यू भी नई ऊंचाई पर
सिर्फ ट्रांजैक्शन की संख्या ही नहीं, बल्कि यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतान की कुल राशि में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। जनवरी में ट्रांजैक्शन वैल्यू 21 प्रतिशत की सालाना बढ़त के साथ 28.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि लोग बड़ी और छोटी दोनों तरह की भुगतान जरूरतों के लिए यूपीआई पर भरोसा कर रहे हैं।
महीने-दर-महीने भी दिखी मजबूती
एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर की तुलना में जनवरी में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या और रकम दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली। जनवरी में रोजाना औसतन 91,403 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 90,217 करोड़ रुपये था। यह बढ़त भले ही मामूली दिखे, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका असर काफी अहम है।
रोजाना 70 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन
जनवरी में यूपीआई के जरिए रोजाना औसतन 70 करोड़ ट्रांजैक्शन किए गए। दिसंबर में यह संख्या 69.8 करोड़ थी। लगातार बढ़ता यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि यूपीआई अब केवल शहरी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

दिसंबर में भी रहा था मजबूत प्रदर्शन
गौरतलब है कि दिसंबर महीने में भी यूपीआई ने शानदार प्रदर्शन किया था। उस दौरान ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़कर 21.63 अरब पहुंच गई थी। वहीं, ट्रांजैक्शन वैल्यू 20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 27.97 लाख करोड़ रुपये रही थी। इससे साफ है कि यूपीआई की ग्रोथ किसी एक महीने तक सीमित नहीं है।
IMPS और अन्य डिजिटल सेवाओं का योगदान
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में केवल यूपीआई ही नहीं, बल्कि आईएमपीएस (इंस्टेंट मनी ट्रांसफर सर्विस) का भी अहम योगदान रहा है। दिसंबर में आईएमपीएस के जरिए कुल 6.62 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 10 प्रतिशत ज्यादा था। यह आंकड़ा नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक रहा।
70 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूपीआई क्यूआर कोड
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ एक्टिव यूपीआई क्यूआर कोड मौजूद हैं। जुलाई 2024 की तुलना में यह 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वर्ल्डलाइन इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, ट्रांसपोर्ट हब और ग्रामीण बाजारों में क्यूआर कोड की आसान उपलब्धता ने ‘स्कैन और पे’ को सबसे लोकप्रिय भुगतान माध्यम बना दिया है।

P2M भुगतान ने पकड़ी बढ़त
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि व्यक्ति से दुकानदार को किए जाने वाले भुगतान (P2M) की संख्या, व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान से ज्यादा रही। पीटूएम ट्रांजैक्शन 35 प्रतिशत बढ़कर 37.46 अरब तक पहुंच गए, जबकि पीटूपी ट्रांजैक्शन 29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 21.65 अरब हो गए। यह रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
छोटे भुगतान, ज्यादा इस्तेमाल
औसतन हर यूपीआई ट्रांजैक्शन की राशि घटकर 1,262 रुपये रह गई है, जो पहले 1,363 रुपये थी। इससे यह साफ होता है कि लोग अब यात्रा, खाना, दवाइयों और स्थानीय दुकानों पर छोटे-छोटे भुगतान के लिए ज्यादा यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) शहर और गांव के बीच की दूरी कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है और भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।
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