चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप का निर्यात हुआ

खबर सार :-

केंद्र सरकार किसानों की आय लगातार बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसकी क्रम में जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा से सिंगापुर को प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप का निर्यात हुआ है।
चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप का निर्यात हुआ

खबर विस्तार : -

 

नई दिल्ली। केंद्र सरकार किसानों की आय लगातार बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसकी क्रम में जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा से सिंगापुर को प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप का निर्यात हुआ है। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में गोयल ने कहा, "शोपियां और पुलवामा के बागवानों के लिए ये खबर किसी खुशखबरी से कम नहीं है। एपीडा के सहयोग से प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप सिंगापुर रवाना हुई। यह पहल किसानों को बेहतर दाम, वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच और भारत के कृषि निर्यात को नई मजबूती प्रदान करेगी।

पहले निर्यात खेप के लिए फ्लैग-ऑफ समारोह का आयोजन किया

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि उसके आधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने शोपियन और पुलवामा से सिंगापुर के लिए प्रीमियम अरेको चेरी (उच्च घनत्व वाली यूरोपीय मीठी चेरी) और सेंटरोज प्लम की पहली खेप के निर्यात की सुविधा प्रदान की है। यह उपलब्धि इस क्षेत्र से संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी और दुबई को ताजी चेरी और प्लम के सफल निर्यात के बाद हासिल हुई है, जिससे कश्मीर के प्रीमियम शीतोष्ण फलों की वैश्विक उपस्थिति और भी बढ़ गई है। मंत्रालय ने बताया कि एपीडा ने मेसर्स ओसुम फूड सॉल्यूशंस एलएलपी और मेसर्स फ्रूट मास्टर एग्रो फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड, पुलवामा के सहयोग से 16 जुलाई 2026 को सिंगापुर को पहले निर्यात खेप के लिए फ्लैग-ऑफ समारोह का आयोजन किया।

पैकिंग और परिवहन वैज्ञानिक तरीके से किया गया था

मंत्रालय ने कहा कि जम्मू और कश्मीर, जो अपनी अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, उत्कृष्ट स्वाद, बनावट और लंबे समय तक टिकने वाले उच्च गुणवत्ता वाले शीतोष्ण फल पैदा करता है। निर्यात खेप की कटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन वैज्ञानिक तरीके से किया गया था, और सिंगापुर पहुंचने पर ताजगी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पौध स्वच्छता मानकों का पालन करते हुए एक कुशल कोल्ड चेन के माध्यम से इसे पहुंचाया गया था। इस पहल से उत्पादकों को पारंपरिक विपणन माध्यमों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक प्रतिफल प्राप्त होने की उम्मीद है।

इसके साथ ही, इससे निर्यात-उन्मुख उत्पादन, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा, मूल्य प्राप्ति में वृद्धि होगी और जम्मू-कश्मीर के फल उत्पादक समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा होंगे। मंत्रालय ने बयान में आगे कहा कि यह निर्यात, बाजार विविधीकरण, निर्यात सुगमता और बेहतर रसद के माध्यम से भारत के बागवानी निर्यात को मजबूत करने के लिए एपीईडीए के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। उत्पादकों को प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर, इस पहल से किसानों की आय में वृद्धि होने और वैश्विक बाजारों में उच्च मूल्य वाले ताजे शीतोष्ण फलों के एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में जम्मू-कश्मीर को और अधिक स्थापित करने की उम्मीद है। 

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