US South Korea Relation: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ जारी टैरिफ विवाद पर नरम रुख के संकेत दिए हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन सोल के साथ इस मसले पर “कुछ” समाधान निकाल लेगा। इस बयान ने दोनों देशों के बीच हालिया व्यापार तनाव के बीच संवाद और समझौते की उम्मीदें फिर से जगा दी हैं।
हाल के दिनों में ट्रंप ने दक्षिण कोरिया पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ बढ़ाने की धमकी दी थी। इसके तहत कार, लकड़ी और दवाइयों पर लगने वाला शुल्क 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किए जाने की बात सामने आई थी। ट्रंप का आरोप था कि दक्षिण कोरिया व्यापार समझौते से जुड़े कानूनों को लागू करने में देरी कर रहा है। हालांकि अब उनके ताज़ा बयान से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका टकराव के बजाय समाधान की राह तलाश रहा है।
ट्रंप के बयान से पहले दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में खटास देखने को मिल रही थी। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने योनहाप न्यूज एजेंसी को बताया कि दक्षिण कोरिया ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में “कोई खास प्रगति” नहीं की है। इसके विपरीत, अमेरिका ने समझौते के तहत अपने टैरिफ कम किए थे।
इसी बीच, दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान के अमेरिका दौरे की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि वे अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक से मुलाकात कर टैरिफ, निवेश और व्यापार नियमों पर बातचीत करेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब दोनों देश एक-दूसरे के रुख को लेकर सतर्क हैं और समाधान की गुंजाइश तलाश रहे हैं।
पिछले साल जुलाई के अंत में हुए और बाद में अंतिम रूप दिए गए व्यापार समझौते के तहत दक्षिण कोरिया ने अमेरिका में 350 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया था। इसके बदले अमेरिका ने ‘पारस्परिक’ टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। अब सवाल यह है कि क्या सोल इस निवेश प्रतिबद्धता को समय पर पूरा कर पाएगा।
टैरिफ बढ़ाने की नई धमकी ऐसे वक्त आई, जब अमेरिका को दक्षिण कोरिया में चल रही कुछ जांचों को लेकर चिंता है। इनमें अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी कूपांग इंक के खिलाफ बड़े ग्राहक डेटा लीक की जांच और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कंपनियों पर नियंत्रण से जुड़े कदम शामिल हैं। अमेरिका का मानना है कि ये जांच और नियम उसके कारोबारी हितों को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दक्षिण कोरियाई मुद्रा वॉन की कमजोरी भी एक अहम मुद्दा बनकर उभरी है। कमजोर वॉन के चलते आशंका है कि दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि टैरिफ विवाद केवल शुल्क तक सीमित न रहकर व्यापक आर्थिक और रणनीतिक सवालों से जुड़ गया है।
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