तेहरान : मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और गहरा गई है। ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पहले कड़े संबोधन में अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। सरकारी टेलीविजन के माध्यम से जारी एक संदेश में खामेनेई ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने नागरिकों की मौतों का बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रग कही जाने वाली दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइन, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने का अपना कड़ा फैसला बरकरार रखा है। मोज्तबा खामेनेई ने अपने संबोधन में इसे महज एक जलडमरूमध्य नहीं, बल्कि ईरान का एक 'शक्तिशाली रणनीतिक हथियार' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि जब तक ईरान के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की पूरी तरह रक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक इस समुद्री मार्ग को व्यापार के लिए दोबारा खोलना नामुमकिन होगा।
तेहरान के इस अडिग रुख ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। आर्थिक जानकारों और वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग की लंबी बंदी न केवल दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल ला सकती है, बल्कि यह कदम पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को चरमराने और एक गहरे मंदी के संकट में धकेलने के लिए काफी है।
ईरानी नेता मोज्तबा खामेनेई का हालिया बयान केवल जुबानी चेतावनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भविष्य के संघर्ष की स्पष्ट रणनीति भी दिखाई देती है। उन्होंने खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सैन्य अड्डों को 'तत्काल बंद' करने की दोटूक मांग करते हुए साफ कर दिया है कि ईरान अब किसी भी बाहरी सैन्य मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा। खामेनेई ने दो टूक शब्दों में कसम खाई कि जंग में हुई हर क्षति और हर मौत का बदला लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अपने दुश्मनों से भारी मुआवजे की वसूली करेगा और यदि दुश्मन इस मांग को ठुकराता है, तो उसकी संपत्तियों को या तो पूरी तरह जब्त कर लिया जाएगा या फिर उन्हें उसी स्तर तक नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।
इस आक्रामक रुख के साथ ही उन्होंने एक नए खतरे का संकेत भी दिया है। ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि वे युद्ध के ऐसे नए और गुप्त मोर्चे खोलने की क्षमता रखते हैं, जिनकी दुश्मन ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। यह बयान स्पष्ट करता है कि ईरान अपनी सैन्य रणनीति को केवल पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि वह दुश्मन को ऐसे घाव देने की तैयारी में है जिसका उसे अंदाजा तक नहीं होगा।
अपने हालिया संबोधन के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर न केवल आक्रामक दिखे, बल्कि उनके शब्दों में एक गहरा भावनात्मक आक्रोश भी साफ झलका। उन्होंने विशेष रूप से दक्षिणी ईरान के शहर मीनाब में हुई उस हृदयविदारक घटना का स्मरण किया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। युद्ध के पहले ही दिन एक मिसाइल हमले ने वहां के एक कन्या विद्यालय (लड़कियों के स्कूल) को मलबे में तब्दील कर दिया था। इस त्रासदी का उल्लेख करते हुए खामेनेई ने बेहद कड़े और संकल्पित लहजे में घोषणा की कि ईरान एक-एक मासूम की मौत का हिसाब चुकता करेगा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपने शहीदों के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे और अपने नागरिकों के बहाए गए खून का प्रतिशोध लेने में तेहरान जरा भी संकोच या देरी नहीं करेगा।
ईरान ने अपनी विदेश नीति के संतुलन को बेहद चतुराई से पेश किया है, जहाँ एक ओर अमेरिका के प्रति उनका रुख अत्यंत कठोर है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देशों के लिए सहयोग के द्वार खुले रखे गए हैं। मोज्तबा खामेनेई ने स्पष्ट संदेश दिया कि तेहरान क्षेत्रीय देशों के साथ गहरे मैत्रीपूर्ण संबंधों और आपसी सहयोग को प्राथमिकता देता है, लेकिन इस दोस्ती के लिए उन्होंने एक अनिवार्य शर्त भी रख दी है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्र में वास्तविक शांति तभी संभव है जब पड़ोसी देश अपनी सरजमीं पर अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करना बंद कर दें। खामेनेई ने पड़ोसी मुल्कों को एक तरह से दोराहे पर खड़ा कर दिया है, जहाँ उन्हें यह तय करना होगा कि वे क्षेत्र की अखंड शांति का हिस्सा बनना चाहते हैं या बाहरी ताकतों का साथ देकर अस्थिरता को बढ़ावा देना चाहते हैं।
मोज्तबा खामेनेई के इस कड़े और स्पष्ट बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। ईरान की ओर से आए इस रुख ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि तेहरान अब किसी भी दबाव में झुकने के मूड में नहीं है। एक तरफ 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसी वैश्विक लाइफलाइन को बंद रखने का फैसला और दूसरी तरफ अमेरिकी सैन्य अड्डों पर सीधे हमले की खुली धमकी-इन दोनों ही कारकों ने पूरे मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) को एक विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
यह स्थिति केवल दो देशों के बीच का तनाव नहीं रह गई है, बल्कि इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव इसे और अधिक गंभीर बना रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और संयुक्त राष्ट्र की अगली चाल पर टिकी हैं। क्या कूटनीति के जरिए इस बारूद के ढेर को फटने से रोका जा सकेगा, या फिर खामेनेई की यह 'बदले की कसम' एक बड़े वैश्विक संघर्ष की शुरुआत साबित होगी, यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे।
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