ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को तेल संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का रास्ता भारत के लिए पूरी तरह बंद नहीं है। ईरान के इस रुख ने न केवल वैश्विक बाजार बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी उम्मीद की किरण जगाई है।
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि, डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने उन अटकलों पर विराम लगा दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग को पूरी तरह सील कर दिया है। डॉ. इलाही के अनुसार, "ईरान ने कभी नहीं चाहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अवरुद्ध किया जाए। वर्तमान में यह मार्ग खुला है, लेकिन युद्ध जैसे तनावपूर्ण हालात और सुरक्षा कारणों से कई जहाज वहां से गुजरने में कतरा रहे हैं।" उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि जो लोग इस युद्ध के जिम्मेदार हैं, उन्हें ही इसे रोकने की पहल करनी होगी ताकि दुनिया भर के लोग इस संकट से मुक्त हो सकें।
ईरान और भारत के बीच गहरे कूटनीतिक रिश्तों की बानगी तब देखने को मिली जब भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत को सुरक्षित रास्ता देने के सवाल पर सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "भारत हमारा एक भरोसेमंद दोस्त है।" फथाली ने संकेत दिया कि अगले कुछ ही घंटों में इसका असर धरातल पर देखा जा सकेगा। उनके मुताबिक, ईरान और भारत के हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कठिन समय में भारत द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की और कहा कि दोनों देशों की आस्था और व्यापारिक हित एक समान हैं।
रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज महज एक जलडमरूमध्य नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए 'वैश्विक ऊर्जा का केंद्र' माना जाता है। इसे वैश्विक व्यापार की 'जीवन रेखा' कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा, क्योंकि दुनिया के कुल तेल और गैस शिपमेंट का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। भारत के संदर्भ में इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और कच्चे तेल का एक विशाल हिस्सा इसी मार्ग के जरिए आयात करता है। प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी (LNG) की आपूर्ति के लिए भी यह सबसे सुगम और छोटा रास्ता है।
यही कारण है कि इस मार्ग में पैदा होने वाली कोई भी छोटी सी रुकावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकती है। इसका सीधा और नकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था और देश की महंगाई दर पर पड़ता है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ जाता है। वर्तमान तनावपूर्ण स्थितियों के बीच ईरानी राजदूत ने एक विशेष नोट साझा करते हुए विश्व समुदाय से अपील की है। उन्होंने कहा है कि वैश्विक नेताओं को एकजुट होकर अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि इस 'अन्यायपूर्ण युद्ध' को तुरंत रोका जा सके और दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट से बचाया जा सके।
वर्तमान के इस जटिल वैश्विक संघर्ष के बीच ईरान का भारत के प्रति स्पष्ट झुकाव यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच पर भारत की विदेश नीति कितनी प्रभावशाली और मजबूत है। जिस समय दुनिया के कई देश आपूर्ति श्रृंखला को लेकर आशंकित हैं, उस समय ईरान द्वारा भारत को एक भरोसेमंद दोस्त बताना और सहयोग का आश्वासन देना, नई दिल्ली की तटस्थ और संतुलित छवि की सफलता है। यदि भविष्य में भारत को इस मार्ग से सुरक्षित निकासी मिलती है, तो यह न केवल भारतीय शिपिंग कंपनियों के लिए एक बड़ी जीत होगी, बल्कि हमारे ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं होगा। इससे घरेलू बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाया जा सकेगा।
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