Iran-Israel-US War : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, बावजूद इसके भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना कम बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार को फिलहाल उम्मीद है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बढ़ोतरी के असर को झेल लेंगी और तेल की कीमतें स्थिर रहेंगी। इसके कारण तेल कंपनियों को कुछ समय के लिए कम मुनाफे के साथ काम करना पड़ सकता है।
इस बीच वैश्विक बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का भाव लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, तो वहीं ब्रेंट क्रूड का भाव भी लगभग 28 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल हो गया। साल 2022 के बाद यह पहली बार है जब दोनों प्रमुख सूचकांकों का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा है। तेल की कीमतों में यह तेज उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण आया है।
इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम पूरे देश में अभी स्थिर बने हुए हैं। आम तौर पर भारत में ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार बदली जाती हैं, लेकिन जब बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, तो सरकार कभी-कभी तेल कंपनियों से कीमतों का बोझ खुद उठाने को कहती है। इससे पहले सरकारी सूत्रों ने शनिवार को भी कहा था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। उन्होंने बताया कि भारत के ऊर्जा भंडार की स्थिति पहले से बेहतर हो रही है और हालात धीरे-धीरे स्थिर हो रहे हैं।
ऊर्जा भंडार में सुधार से सरकार को ईंधन आपूर्ति को संभालने में ज्यादा भरोसा मिला है। इसके साथ ही भारत ने कच्चे तेल के आयात को विविध बनाने के लिए कदम उठाए हैं, ताकि संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सके। सूत्रों के अनुसार, पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से आता था, लेकिन अब यह हिस्सा बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से पहली तेल खेप फिर से रवाना हो चुकी है, जिससे संकेत मिलता है कि तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
इस बीच कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर मध्य पूर्व में युद्ध कुछ दिनों तक और जारी रहता है तो खाड़ी देशों के निर्यातक फोर्स मेज्योर घोषित कर सकते हैं, जिससे तेल की आपूर्ति रुक सकती है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक और प्राकृतिक गैस की कीमत 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में आई तेजी का बचाव करते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की अस्थायी कीमत है। उन्होंने कहा कि जब यह खतरा खत्म हो जाएगा तो तेल की कीमतें फिर से कम हो जाएंगी।
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