Mette Frederiksen तीसरी बार बनीं डेनमार्क की PM: मोदी ने दी बधाई, ग्रीन पार्टनरशिप पर फोकस

खबर सार :-
मेटे फ्रेडरिक्सन का लगातार तीसरी बार डेनमार्क की प्रधानमंत्री बनना न केवल उनके राजनीतिक नेतृत्व की सफलता है, बल्कि भारत-डेनमार्क संबंधों के लिए भी सकारात्मक संकेत है। प्रधानमंत्री मोदी की बधाई और दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता दर्शाती है कि ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, निवेश, तकनीक और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
Mette Frederiksen तीसरी बार बनीं डेनमार्क की PM: मोदी ने दी बधाई, ग्रीन पार्टनरशिप पर फोकस
खबर विस्तार : -

India-Denmark Relations: डेनमार्क की राजनीति में एक बार फिर मेटे फ्रेडरिक्सन का दबदबा कायम रहा है। फ्रेडरिक्सन लगातार तीसरी बार डेनमार्क की प्रधानमंत्री बनी हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और डेनमार्क के रिश्ते आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सतत विकास की साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं, जो भविष्य में और अधिक मजबूत होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर संदेश जारी करते हुए कहा कि वह अपनी मित्र मेटे फ्रेडरिक्सन को लगातार तीसरी बार डेनमार्क की प्रधानमंत्री बनने पर शुभकामनाएं देते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत और डेनमार्क के बीच सहयोग के नए आयाम स्थापित होंगे और दोनों देशों के नागरिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

‘Green Strategic Partnership’ बनेगी रिश्तों की नई ताकत

पीएम मोदी ने अपने संदेश में विशेष रूप से भारत-डेनमार्क ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच यह साझेदारी स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, हरित प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग का मजबूत आधार बन चुकी है। भारत और डेनमार्क ने पिछले कुछ वर्षों में हरित ऊर्जा, जल प्रबंधन, स्मार्ट सिटी विकास और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रेडरिक्सन के तीसरे कार्यकाल में यह साझेदारी और अधिक मजबूत होगी, जिससे दोनों देशों को आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिलेगा।

India-Nordic Summit: ओस्लो में हुई थी अहम मुलाकात

हाल ही में 19 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच देशों की अपनी यात्रा के दौरान नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में मेटे फ्रेडरिक्सन से मुलाकात की थी। यह बैठक तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की और आगे सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन से निपटने, हरित बदलाव को गति देने और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त प्रयासों को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई थी।

Investment and Technology में सहयोग बढ़ाने की तैयारी

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने डेनमार्क के पेंशन फंड्स को भारत में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण दिया था। उन्होंने डेनमार्क की कंपनियों को गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भी प्रोत्साहित किया। दोनों देशों ने नई और उभरती प्रौद्योगिकियों, डिजिटल संचार, उन्नत अनुसंधान, स्टार्टअप इकोसिस्टम और शैक्षणिक आदान-प्रदान में सहयोग को मजबूत बनाने पर भी सहमति व्यक्त की। इससे नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।

एआई और रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग

भारत और डेनमार्क के बीच रक्षा सहयोग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों का मानना है कि तकनीकी नवाचार और सुरक्षा सहयोग भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और डेनमार्क के संबंध केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक, पर्यावरण और रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम भी तेजी से विकसित हो रहे हैं।

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