सॉवरेन एआई में भारत की बड़ी छलांग, स्वदेशी एआई मॉडल से वैश्विक मंच पर बनेगी भारत की अलग पहचान

खबर सार :-
भारत की सॉवरेन एआई मॉडल रणनीति अब केवल योजना नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बनती दिख रही है। सर्वम एआई जैसे स्टार्टअप्स की सफलता यह साबित करती है कि स्वदेशी तकनीक के दम पर भारत वैश्विक एआई दौड़ में अग्रणी बन सकता है। सरकार, स्टार्टअप्स और युवाओं का यह तालमेल भारत को एआई सुपरपावर बनाने की दिशा में अहम है।

सॉवरेन एआई में भारत की बड़ी छलांग, स्वदेशी एआई मॉडल से वैश्विक मंच पर बनेगी भारत की अलग पहचान
खबर विस्तार : -

Sovereign AI : भारत की सॉवरेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल रणनीति अब ठोस नतीजे देने लगी है। यह बात केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कही। उन्होंने घरेलू स्टार्टअप सर्वम एआई द्वारा विकसित किए गए एडवांस्ड एआई मॉडल की खुलकर सराहना की और इसे भारत के एआई मिशन की बड़ी उपलब्धि बताया।

स्वदेशी एआई पर सरकार का भरोसा मजबूत

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल एआई का उपयोगकर्ता बनना नहीं, बल्कि एआई टेक्नोलॉजी का नेतृत्व करना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सर्वम एआई द्वारा जारी किए गए एडवांस्ड मॉडल की तारीफ अब वही लोग कर रहे हैं, जो पहले इसकी सबसे ज्यादा आलोचना करते थे। यह भारत की सॉवरेन एआई नीति की सफलता का प्रमाण है।

सर्वम एआई को क्यों मिली अहम जिम्मेदारी

पिछले साल भारत सरकार ने देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फाउंडेशनल मॉडल विकसित करने के लिए सर्वम एआई को चुना था। 67 प्रस्तावों में से इसे शॉर्टलिस्ट किया गया, जो स्टार्टअप की तकनीकी क्षमता और विज़न को दर्शाता है। यह चयन भारत के एआई इकोसिस्टम में स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।

भारतीय भाषाओं के लिए तकनीकी क्रांति

सर्वम एआई ने खास तौर पर भारतीय भाषाओं को ध्यान में रखते हुए टेक्नोलॉजी विकसित की है। कंपनी ने भारतीय भाषाओं के लिए देश के अब तक के सबसे बेहतर टेक्स्ट-टू-स्पीच, स्पीच-टू-टेक्स्ट और ओसीआर मॉडल तैयार किए हैं। इससे डिजिटल इंडिया और भाषाई समावेशन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

इंडियाएआई मिशन के तहत बड़ा प्रदर्शन

दिसंबर 2025 में सर्वम एआई के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार ने इंडियाएआई मिशन के तहत मल्टीलिंगुअल एआई सिस्टम का प्रदर्शन किया था। इसमें भारतीय भाषाओं के लिए भारत का पहला सॉवरेन फाउंडेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) भी शामिल था, जिसे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

Ai Mission

10,300 करोड़ रुपये का इंडिया एआई मिशन

भारत के एआई इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए मोदी सरकार ने 2024 में 10,300 करोड़ रुपये के बजट के साथ इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी थी। अगले पांच वर्षों में यह फंडिंग एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च, स्टार्टअप सपोर्ट और स्किल डेवलपमेंट जैसे अहम क्षेत्रों को बढ़ावा देगी।

युवाओं से पाथब्रेकिंग इनोवेशन की उम्मीद

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के युवा इंजीनियर मटेरियल साइंस, हेल्थकेयर और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में ऐसे इनोवेशन पर काम कर रहे हैं, जिन्हें दुनिया आने वाले समय में पाथब्रेकिंग मॉडल के रूप में देखेगी। उन्होंने इसे भारत की तकनीकी ताकत का संकेत बताया।

पीएम मोदी का एआई को लेकर स्पष्ट विज़न

पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई स्टार्टअप्स से सामाजिक भलाई के लिए एआई के इस्तेमाल का आह्वान किया था। उन्होंने एआई को सस्ता, समावेशी और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने यह भी घोषणा की कि भारत 16 से 20 फरवरी तक ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की मेज़बानी करेगा, जिससे भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपनी भूमिका और मजबूत करेगा।

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