एआई आर्किटेक्चर के सभी स्तरों पर भारत की मजबूत पकड़ः अश्विनी वैष्णव

खबर सार :-
अश्विनी वैष्णव के बयान से साफ है कि भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार और समाधान देने वाला देश बन चुका है। व्यावहारिक मॉडल, किफायती तकनीक, जीपीयू उपलब्धता और बड़े पैमाने पर स्किलिंग के जरिए भारत एआई को आर्थिक विकास का मजबूत आधार बना रहा है। आने वाले समय में यही रणनीति भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व दिला सकती है।

एआई आर्किटेक्चर के सभी स्तरों पर भारत की मजबूत पकड़ः अश्विनी वैष्णव
खबर विस्तार : -

World Economic Forum Davos : केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने और विकसित करने वाले देशों के अग्रणी समूह में शामिल हो चुका है। भारत ने एआई आर्किटेक्चर के सभी पांच प्रमुख स्तरों-अनुप्रयोग (Applications), मॉडल (Models), चिप्स (Chips), बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और ऊर्जा (Energy) में योजनाबद्ध और संतुलित प्रगति की है। यह बयान उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान “AI Power Play” विषय पर हुई एक उच्चस्तरीय वैश्विक पैनल चर्चा में दिया।

बड़े मॉडल नहीं, व्यावहारिक एआई पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की एआई रणनीति का लक्ष्य केवल अत्यधिक बड़े और महंगे एआई मॉडल बनाना नहीं है। भारत का फोकस एआई को वास्तविक दुनिया में लागू करने और निवेश पर ठोस लाभ (ROI) सुनिश्चित करने पर है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़े मॉडल विकसित करने से ही निवेश पर लाभ नहीं मिलता।

छोटे और स्मार्ट मॉडल से 95% समस्याओं का समाधान

अश्विनी वैष्णव के अनुसार, वास्तविक जीवन में उपयोग होने वाले लगभग 95 प्रतिशत एआई उपयोग मामलों को 20 से 50 अरब पैरामीटर रेंज वाले मॉडलों के माध्यम से प्रभावी ढंग से हल किया जा सकता है। इससे यह संदेश स्पष्ट होता है कि व्यावहारिक, कुशल और किफायती मॉडल ही व्यापक स्तर पर एआई को सफल बनाते हैं।

कम लागत, अधिक प्रभाव वाली भारतीय रणनीति

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत पहले ही ऐसे कुशल और सस्ते तकनीकी मॉडल विकसित कर चुका है, जिन्हें उत्पादकता बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। यह दृष्टिकोण भारत की उस नीति को दर्शाता है, जो कम लागत में अधिकतम लाभ देने और आर्थिक रूप से टिकाऊ एआई समाधान अपनाने पर केंद्रित है।

वैश्विक रैंकिंग पर उठाए सवाल

वैश्विक मानकों का उल्लेख करते हुए अश्विनी वैष्णव ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कुछ रैंकिंग पर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत एआई पैठ और तैयारी के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है, जबकि एआई प्रतिभा के क्षेत्र में भारत दूसरे स्थान पर काबिज है।

एआई तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने की पहल

केंद्रीय मंत्री ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उन्नत क्षमताओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से जीपीयू की उपलब्धता से जुड़ी बड़ी बाधा को दूर करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

38,000 जीपीयू की राष्ट्रीय साझा सुविधा

इस पहल के तहत 38,000 जीपीयू को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी के कारण ये जीपीयू छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को वैश्विक लागत के लगभग एक-तिहाई मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे एआई अनुसंधान और नवाचार को तेज गति मिलने की उम्मीद है।

एआई स्किलिंग से भविष्य की तैयारी

अश्विनी वैष्णव ने भारत के राष्ट्रव्यापी एआई कौशल विकास कार्यक्रम पर भी प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम का लक्ष्य एक करोड़ लोगों को एआई में प्रशिक्षित करना है, ताकि भारत का आईटी उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम घरेलू और वैश्विक सेवा वितरण के लिए एआई का प्रभावी उपयोग कर सकें।

तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक छलांग में एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी नवाचार की भूमिका निर्णायक होगी।

 

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